व्यक्ति विशेष: एक 'राजकुमार' की विपश्यना! वो 59 दिन!

By: | Last Updated: Saturday, 18 April 2015 3:12 PM
rahul gandhi

एक राजकुमार की ये दास्तान यूं तो हजारों साल पुरानी है लेकिन इस कहानी में राजकुमार जिन सवालों का जवाब ढूढने निकला था वो सवाल आज भी इंसान की जिंदगी में सबसे बड़े सवाल बने हुए हैं. करीब ढाई हजार साल पहले आज के नेपाल में सिद्धार्थ नाम का एक राजकुमार रहता था लेकिन एक दिन उसका सांसारिक कामों से मोहभंग हो गया और वो इंसान की जिंदगी में दुखों का कारण जानने के लिए परिवार और राजपाठ छोड़ कर जंगल की ओर निकल पड़ा. सिद्धार्थ नाम का वो राजकुमार बरसों बियाबान जंगलों में भटकता रहा. कई बरसों तक उसने कठोर तपस्या भी की और आखिरकार उसकी जिंदगी में एक दिन ऐसा भी आया जब बिहार के इसी बोधी वृक्ष के नीचे उसे ज्ञान की प्राप्ति हुई. कहा ये भी जाता है कि राजकुमार सिद्धार्थ को अपने मन में उठने वाले उन सारे सवालों के जवाब भी मिल गए थे जिनको जानने के लिए उन्ॊहोंने अपने राजपाठ और परिवार को त्याग दिया था.

 

कठोर तपस्या के जरिए इंसानी जिंदगी के रहस्य को जानने वाले राजकुमार सिद्धार्थ को आज दुनिया गौतम बुद्ध के नाम से पहचानती है. करीब ढाई हजार साल पहले गौतम बुद्ध ने ही भारत की एक प्राचीन ध्यान विधि विपश्यना को दोबारा खोज निकाला था. कहा जाता है कि पैंतालीस सालों तक बुद्ध ने खुद विपश्यना की थी और इसका अभ्यास दूसरे लोगों से भी करवाया था. लेकिन ढाई हजार साल बाद आज बुद्ध की ये ध्यान विधि विपश्यना एक बार फिर चर्चा में है क्योंकि देश की बड़ी राजनीतिक पार्टी के राजकुमार कहे जाने वाले राहुल गांधी ने भी विपश्यना का सहारा लिया है. कांग्रेस के इस राजकुमार के मन को वो कौन से सवाल कुरेद रहे थे जिनकी तलाश में वो करीब 59 दिनों तक राजनीति के गलियारों से दूर रहे. ये बात अभी सामने आना बाकी हैं क्या राहुल गांधी को भी बुद्ध की तरह अपने सवालों के जवाब मिले ये भी अभी किसी को मालूम नहीं है लेकिन लंबी छुट्टी से वापस लौटे राहुल गांधी के विपश्यना इफेक्ट पर अब कांग्रेस ही नहीं बल्कि विरोधी दलों की निगाहें भी टिकी हुई है.

 

      

थाइलैंड में तपस्या करने के बाद क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जंग लड़ने के लिए राहुल गांधी हैं अब तैयार. गुरुवार को 11 बजकर 15 मिनट पर जैसे ही थाईलैंड एयरवेज के विमान ने दिल्ली एयरपोर्ट के रनवे को छुआ इसी के साथ न्यूज चैनलों पर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की वापसी की खबरें छा गईं थी. एयरपोर्ट से राहुल गांधी का काफिला सीधे 12 तुगलक लेन स्थित उनके निवास पर पहुंचा जहां उनकी मां सोनिया गांधी और उनकी बहन प्रियंका गांधी उनका बेसब्री से इंतजार कर रही थीं. लेकिन राहुल के लौटने का इंतजार देश की जनता भी कर रही थी क्योंकि 59 दिनों तक उनको लेकर तरह-तरह की चर्चांओं का बाजार गर्म रहा है. मीडिया में खबरें आईं कि राहुल गांधी यूरोप या वियतनाम में है तो दूसरी तरफ ये भी कहा गया कि वो थाईलैंड में छुट्टियां मना रहे हैं. विरोधियों ने तो उनकी छुट्टी को लेकर उस वक्त से ही सवाल उठाने शुरु कर दिए थे जब उनके छुट्टी पर जाने का ऐलान हुआ था. 

 

कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा था कि राहुल गांधी ने पार्टी से औऱ कांग्रेस अध्यक्ष से ये निवेदन किया है कि वो कुछ हफ्तों के लिए अवकाश चाहते हैं . उन सब मुद्दों पर आत्मचिंतन करने के लिए कांग्रेस के विषय में हाल में जो हुए हैं और भविष्य के लिए राहुल गांधी चाहते हैं कि ऐसे कई गंभीर मुद्दे हैं जिनको वो रखना चाहेंगे जो आगामी AICC का सेशन है मार्च अंत या अप्रैल के अंत में और वो उन सब मुद्दों पर आत्मचिंतन करना चाहते हैं और गंभीर रुप से विचार करना चाहते हैं उनके इस अनुरोध पर उन्हें कुछ हफ्तों का अवकाश दिया गया है.

 

राजनीति से छुट्टी लेकर 59 दिनों तक राहुल गांधी कहां रहे? और उन्होंने क्या हासिल किया. किस तरह राहुल गांधी ने अपनी छुट्टियां बिताई. इन अहम सवालों के जवाब सामने आना अभी बाकी है और इन सवालों के जवाब इसलिए जरुरी हैं क्योंकि इन्हीं में कांग्रेस पार्टी के भविष्य की रणनीति और लोकसभा चुनावों में पार्टी की ऐतिहासिक हार से उबरने का जवाब भी छिपा हुआ है.

  

वरिष्ठ पत्रकार विनोद शर्मा बताते हैं कि बताया ये जाता था आधिकारिक तौर पर कि वो रिफलै्कटीव मोड पर हैं. वो इंस्पेक्शन कर रहे हैं विपश्ना कर रहे हैं पार्टी के लिए कोई रोडमैप बना रहे हैं कोई ब्लूप्रिंट बना रहे हैं अब जो कुछ भी उन्होंने किया वो जनता के समक्ष रखना पड़ेगा औऱ मैं समझता हूं कि उन्हें सामने आकर बताना होगा मीडिया के माध्यम से देश के लोगों को कि वह कहां थे और किन कारणों से थे और आगे का क्या प्लान है.

 

वरिष्ठ पत्रकार रशीद किदवई बताते हैं कि मुझे लगता है कि वो कांग्रेस की 2014 के हार के बाद में एक मंथन कर रहे थे कि रोल क्या होगा रोड मैप क्या होगा. दरअसल राहुल गांधी जो हैं वो थोड़ा सा कनविंशनल पॉलिटिक्स होते है उससे अलग है और उनके अध्यात्मिक मैंट ऑफ माइंड को देंखे. उनकी विपश्ना में रुचि को देंखे तो हमें नजर आएगा जो वो लीडर बनेंगे तो उस तरीके से जिस तरह से एक कोठरी होती है एक फैवरेट्स होते हैं चाटुकारिता का एलिमेंट होता हैं हो सकता है उन सब में कमी हो.

राहुल गांधी की लंबी छुट्टियों के बाद जहां कांग्रेस पार्टी के अंदर बड़े बदलाव के बवंडर के कयास लगाए जा रहे हैं वहीं विरोधी दल उनकी छुट्टियों पर सवाल उठा रहे हैं.

 

पब्लिक प्लेटफॉर्म यानी सोशल मीडिया पर भी राहुल की 59 दिनों की छुट्टियों को लेकर तरह-तरह के मजाक बनाए गए है. ऐसा कहा जा रहा है कि राहुल गांधी थाईलैंड में बौद्ध धर्म की फॉरेस्ट मॉनेस्ट्री में विपश्यना से जुड़ा एक महीने का रेसीडेंसी कोर्स करने गए थे. हांलाकि कांग्रेस पार्टी की ओर से इस संबंध में अभी तक आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है लेकिन एबीपी न्यूज ने दो मार्च को ही ये खबर दिखाई थी कि राहुल गांधी थाईलैंड में हैं और वो उबान के पास एक बौद्ध मॉनेस्ट्री में विपश्यना यानि ध्यान का कोर्स कर रहे हैं. लेकिन यहां बड़ा सवाल अब ये है कि आखिर राहुल गांधी को विपश्यना करने की जरुरत क्यों पड़ी और विपश्यना के कोर्स के दौरान उन्होंने क्या- क्या किया? इस सवाल का जवाब भी हम आपको बताएंगे लेकिन पहले जरा सा समझ लीजिए की ये विपश्यना आखिर बला क्या है.

 

विपश्यना ध्यान करने का एक प्राचीन भारतीय तरीका है. इसे जो भी व्यक्ति करता है उसके दिमाग को सुकून और मन को शांति मिलती है. विपश्यना को इस तरह भी समझा जा सकता है कि जो चीज असलियत में जैसी है उसे उसी प्रकार जान लेना यानी जो जैसा है, उसे ठीक वैसा ही देखना और समझना विपश्यना है.

 

प्राचीन भारत पर अगर नजर डाले तो हम पाते हैं कि ऋषिमुनियों ने जंगलों और अपने आश्रमों में कई तरह से योग और साधनाएं की हैं. उन्हीं में से एक प्राचीन ध्यान विधि का नाम विपश्यना भी है जिसका लक्ष्य मन के विकारों को खत्म कर आत्ममुक्ति की अवस्था को प्राप्त करना है. विपश्यना में आत्मा के निरीक्षण के जरिए आत्मा को शुद्ध करने की कोशिश की जाती है और मन को स्वस्थ बनाया जाता है. इस दौरान साधक सांसारिक बातों से पूरी तरह से अलग होकर साधना में लीन हो जाता है.

 

योगाचार्यों का कहना है कि विपश्यना हमें इस योग्य बनाती है कि हम अपने अंदर शांति और तालमेल का अनुभव कर सकें. विपश्यना मन को निर्मल बनाती है और संयमित होना सिखाती है. ये साधना विधि मन की व्याकुलता और उसके कारणों को दूर करती है. विपश्यना का अभ्यास करने वाला मानसिक पूर्वाग्रहों और विकारों से पूरी तरह मुक्त हो होकर सजग, सचेत, संयमित और शांतिपूर्ण शख्स बन जाता है और फिर वो अपने अंदर शांति और सामंजस्य का अनुभव करता है. कुल मिलाकर इस साधना को मन की एक्सरसाइज कहा जा सकता है जिस तरह वर्जिस के जरिए शरीर को स्वस्थ्य बनाया जाता है ठीक वैसे ही विपश्यना से मन को स्वस्थ्य बनाया जाता है.

दस दिनों के शिविर में किसी आचार्य के पास रह कर विपश्यना सीखी जाती है. लेकिन इन दस दिनों में साधक को बस उतनी ही विपश्यना समझ आ पाती है जिससे कि वो इसे जिंदगी में उतारने का काम शुरू कर सके. इसके बाद साधक विपश्यना का जितना ज्यादा अभ्यास करता है उतना ही वो मानिसक दुखों से छुटकारा पाता चला जाता है.

 

विपश्यना की इसी परंपरा के मुताबिक राहुल गांधी भी दस दिनों का बेसिक कोर्स कर चुके हैं. राहुल साल 2012 में म्यांमार के रंगून में स्थित धम्मा ज्योति विपश्यना सेंटर में दस दिन का कोर्स करने आए थे. कहा जाता है कि राहुल की बहन प्रियंका गांधी पहले से ही विपश्यना करती रही हैं और उन्हीं के कहने पर राहुल ने भी विपश्यना का कोर्स किया था. इसके बाद वो साल 2013 में 9 मार्च से 15 मार्च तक बौद्ध मॉनेस्ट्री में ध्यान करने भी आए थे.   

 

विपश्यना के लिए दस दिनों का बेसिक कोर्स करना जरूरी होता है क्योंकि साधक को हर दिन एक नई तकनीक के साथ मन को शांत करना सिखाया जाता है. इसमें दस दिनों तक मौन भी धारण करना होता है जिसमें बाहरी दुनिया से साधक का संपर्क पूरी तरह से कट जाता है औऱ यही वजह है कि राहुल गांधी भी 59 दिनों तक सबकी पहुंच से दूर हो गए थे.

 

राहुल गांधी विपश्यना के लिए जिस आश्रम में मौजूद थे वहां उन्हें हर रोज सुबह तीन बजे उठना होता था. उन्हें एक ऐसी दिनचर्या से गुजरना पड़ता था जिसमें दिन में कई बार, करीब दस घंटे तक बैठे – बैठे ध्यान करना होता है. विपश्यना के दौरान आचार्य से तो ध्यान और साधना संबंधी बात की जा सकती है लेकिन दूसरे साधकों से बात करना मना होता है यानि पूरी तरह से खामोश रहना होता है. विपश्यना की दस दिनों की इस कड़ी ट्रेनिंग में तीन चरण होते हैं.

 

विपश्यना का पहला चरण

पहले चरण में साधक उन कामों से दूरी बनाता है जिससे उसे नुकसान होता है. इसके लिए वो पांच बातों जीव हिंसा, चोरी, झूठ बोलना, अब्रहम्चर्य और नशे के सेवन से दूर रहने का व्रत लेता है. इन बातों का पालन करने से मन इतना शांत हो जाता है कि आगे का काम सरल हो जाता है.

 

विपश्यना का दूसरा चरण

दूसरे चरण में ट्रेनिंग के पहले साढे तीन दिनों तक अपनी सांस पर ध्यान केंद्रित कर आनापाना नाम की साधना का अभ्यास करना होता है. जिससे मन को काबू में करना आसान हो जाता है.

 

यानि शुद्ध जीवन जीना और मन को काबू में करना ये दो चरण जरुरी हैं और लाभकारी भी है लेकिन अगर तीसरा चरण ना हो तो विपश्यना की ये ट्रेनिंग अधूरी रह जाती है.

 

विपश्यना का तीसरा चरण

तीसरे चरण में अपने मन की गहराईयों में दबे हुए विकारों या बुराइयों को दूर कर मन को निर्मल बनाना होता है. तीसरा चरण शिविर में साढे छह दिनों तक विपश्यना के अभ्यास के रुप में चलता है. जिसमें तीसरे चरण में साधक अपनी चेतना को जगाकर अपने शाऱीरिक औऱ वैचारिक बंधनों को भेदने की कोशिश करता है. 

 

नौ दिनों तक साधक एक दम मौन रह कर ध्यान साधना करते हैं औऱ फिर दसवें दिन से वो फिर से बातचीत करना शुरु करते हैं. कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी भी विपश्यना की ऐसी ही कड़ी ट्रेनिंग से गुजर चुके हैं. सुबह साढ़े तीन बजे आश्रम में वो बौद्ध भिक्षुओं के साथ ध्यान करते थे और इसके बाद आश्रम के किचन में खाना बनाने और साफ – सफाई के काम में दूसरे साधकों का हाथ बटांते थे. आश्रम में सुबह 8 बजे खाने का वक्त होता था लेकिन नियमों के मुताबिक आश्रम में दिन में सिर्फ एक बार कटोरे में खाना खाना होता था इसके बाद दस बजे से फिर ध्यान का कार्यक्रम चलता था और शाम साढ़े चार बजे कुछ पीने के बाद शाम सवा 6 बजे से मैडिटेशन करना होता था. जो जानकारियां मिली हैं उसके मुताबिक पिछले करीब दो महीनों से राहुल गांधी के दिन आश्रम में इसी तरह से बीत रहे थे. नियमों के हिसाब से आश्रम में मनोरंजन के साधनों पर बैन रहता है यही नहीं सोने के लिए गद्दे या पलंग का इस्तेमाल भी मना होता है यानि राहुल गांधी जमीन पर सोते होंगे.

 

कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी जिस विपश्यना के जरिए अपने मन में उठने वाले सवालों का जबाव ढूढ रहे हैं. उसी के जरिए करीब ढाई हजार साल पहले कपिलवस्तु के राजकुमार सिद्धार्थ यानी गौतम बुद्ध ने भी अपने मन में उठने वाले सवालों के जवाब खोजे थे लेकिन अब ये सामने आना बाकी है कि कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी क्या विपश्यना के जरिए अपने सवालों के जवाब ढूढ सके हैं. 

 

दिल्ली से करीब चार हजार किलोमीटर दूर थाइलैंड में जिन दिनों राहुल गांधी आत्मशुद्धि के लिए कठिन साधना विपश्यना में लीन थे उन दिनों देश में उनकी गैर मौजूदगी को लेकर तमाम सवाल खड़े किए जा रहे थे. फरवरी महीने में कांग्रेस पार्टी ने कहा था कि लोकसभा चुनाव में मिली हार और पार्टी के भविष्य पर चिंतन के लिए राहुल गांधी को समय चाहिए और इसके बाद 16 फऱवरी को ही राहुल बैंकॉक चले गए थे. कांग्रेस ने कहा राहुल गांधी छुट्टी पर हैं लेकिन उन्होंने ये छुट्टी ऐसे वक्त ली जब संसद का बजट सत्र शुरु होने के साथ ही कांग्रेस मोदी सरकार को जमीन अधीग्रहण के मुद्दे पर घेर रही थी. यही वजह है कि राहुल गांधी की छुट्टी उनके विरोधियों ही नहीं उनके अपनों को भी चुभ रही थी.

 

कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने कहा था कि वो बात सही है कि अगर उनको एकांत में जाकर आगे की कारवाई कैसी हो तय करना था तो बेहतर ये होता कि वो ये समय तय नहीं करते यो तो इसके पहले या फिर बाद का समय चुनते तो ज्यादा बेहतर होता.

 

बीजेपी सांसद साक्षी महाराज ने कहा था कि अभी आपने देखा कि जनता का क्या हाल है पर यहां के सांसद राहुल जी गायब हैं . यहां के लोगों ने पोस्टर लगा रखा है कि हमारा सांसद गायब है और जल्दी खोज होनी चाहिए हम तो प्रधानमंत्री जी से कहेंगे कि सीबीआई को लगाए और पता लगाए कि वो कहां हैं.

 

शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा था कि राहुल गांधी अगर गायब है तो कौन से जमीन की खोज में चले गए हैं और क्या कांग्रेस की जमीन खो गई है उसे ढूढ़ने के लिए निकल गए हैं देखना पड़ेगा.

 

केंद्रीय मंत्री गिरिराज किशोर ने कहा था कि बजट सत्र और राहुल जी कहां है ये तो मलेशिया का एक विमान जो गायब हुआ वो आज तक पता नहीं चला है उसी तरह से कांग्रेस नेतृत्व.

 

विरोधी दल कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की लंबी छुट्टी को लेकर सवाल उठा रहे थे तो वहीं सोशल मीडिया पर राहुल को लेकर तरह-तरह के मजाक बनाए जा रहे थे फेसबुक और ट्विटर पर उनको लेकर तरह – तरह की टिप्पणियां भी होती रही हैं. राहुल गांधी कहां गए और वो क्या कर रहे हैं इन सबको लेकर भी राजनीतिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक में खूब बातें कही सुनी जाती रहीं. राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र में तो उनके लापता होने के पोस्टर तक चिपका दिए गए थे. 

 

संसद का बजट सत्र शुरू होने से ठीक पहले राहुल गांधी के छुट्टी पर जाने की खबर आई थी. और उनके छुट्टी पर जाने के बाद से ही इस तरह की खबरें भी आने लगी थी कि वो कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से नाराज है क्योंकि राहुल में अपने तरीके से बदलाव करना चाहते हैं लेकिन सोनिया के करीबी लोग ऐसा होने नहीं देना चाहते. जिससे नाराज होकर वो छुट्टी पर चले गए हैं. 

 

राजनीतिक विश्लेषक अरविंद मोहन ने बताया कि राहुल के जाने आने का कोई बहुत बड़ा मसला नहीं है असली मसला ये है कि जो गॉसिप हम लोग सुन रहे हैं कि वो किसानों वाला मुद्दा लेकर बाहर जाना चाहते थे और मां ने उनसे कहा कि तुम अहमद पटेल से बात कर लो तो उस पर उन्होंने रिएक्ट किया कि अहमद पटेल ने ही या बूढ़े लोगों ने ही पार्टी डुबोई है और अब फिर उनकी सलाह पर पार्टी नहीं चलाऊंगा. अगर ये किस्सा है तो इसका मतलब  है कि राहुल गांधी मेरे हिसाब से समझदार हैं एक तो पॉलिटिक्स की समझ थी दूसरी ये कि आप अगर कांग्रेस को उनके लीडरशीप में चलाना है तो पुरानें लोगों से काम नहीं चलेगा फिर नए तरह की टीम बनानी होगी.

 

टेलीग्राफ में छपी खबर के मुताबिक राहुल के करीबी सोनिया गांधी के राजनीतिक सचिव अहमद पटेल, एआईसीसी के कोषाध्यक्ष मोती लाल वोरा और महासचिव जनार्दन द्विवेदी जैसे नेताओं को कांग्रेस के बुरे हाल के लिए जिम्मेदार मान रहे हैं. खबर ये भी है कि पार्टी के अंदरूनी मतभेदों और झगड़ों से कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी भी परेशान हैं और वो अब आगे अध्यक्ष की कुर्सी संभालना नहीं चाहतीं हैं. पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से वो मतभेद सुलझाने के लिए कह भी चुकी हैं जाहिर है सोनिया ने भी राहुल गांधी के लिए रास्ता तैयार करने का संकेत दे दिया है और इस तरह की बातें पार्टी के अंदर से छन छन कर बाहर आने लगी थी. 

 

दिग्विजय सिंह ने कहा कि कांग्रेस पार्टी की कार्यशैली में आमूल परिवर्तन चाहतें हैं वो चाहते हैं कि हमारे जो निचले संगठन हैं उनको ज्यादा अधिकार दिए जाए. चुनाव निष्पक्षता से हों पार्दर्शी तरीकों से हों वो चाहते हैं कि संगठन का महत्व बढ़े. और यदि आप जयपुर के उनके भाषण को देखेगें जिसमें उन्होंने कहा था कि मैं आज तक ये समझ नही पा रहा हूं कि आखिर ये कांग्रेस पार्टी चलती कैसी है तो वो इसी को सुधारने के लिए उनका प्रयास रहा है लेकिन होता ये है कि हमारी पार्टी में पुराने ऐसे लोग है जो कहते है कि देखिए सवा सौ साल से ज्यादा से हम लोग चल रहे हैं ऐसे में अब बदलने की क्या जरूरत है.

 

लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी कांग्रेस पार्टी के स्टार प्रचारक थे लेकिन कांग्रेस बुरी तरह चुनाव हारी और महज 40 सीटों पर आकर सिमट गई थी. चुनावों में मिली इस करारी हार के बावजूद भी पार्टी के कई नेताओं ने राहुल गांधी को सोनिया गांधी की जगह कांग्रेस अध्यक्ष बनाने की मुहिम सी छेड़ रखी है. यहीं नहीं चुनाव में हार के बाद से ही खुद राहुल गांधी भी पार्टी में बडे बदलाव करने की तैयारी में हैं लेकिन पार्टी में एक खेमा ऐसा भी है जो चुनावों में लगातार मिल रही हार के लिए राहुल गांधी को जिम्मेदार मानता है और इसीलिए ये गुट अप्रैल में होने वाली AICC की बैठक में राहुल को पार्टी अध्यक्ष बनाने के खिलाफ अपनी आवाज भी बुलंद कर रहा है.

 

पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने कहा कि जब समय आएगा राहुल जी एक अच्छे अध्यक्ष होंगे अभी है टाइम. कांग्रेस प्रेसिडेंट का हमारी पंजाब की आज जो हालात हैं वो पर्सेनालिटी बेस्ड हैं मोदी भी पर्शेनालिटी बेस्ड से आये थे और केजरीवाल भी पर्शेनालिटी बेस्ड से आए थे. औऱ आज सोनिया जी 44 सीट लेकर पार्टी को ऊपर जाएंगी. इसीलिए हम चाहते हैं कि सोनिया जी को और कार्यकाल देना चाहिए.

 

दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने कहा कि सोनिया गांधी एक आउटस्टैंडिंग लीडर हैं और वही नेता हैं उन्होंने अपने नेतृत्व को साबित किया है औऱ न केवल दस साल कांग्रेस को जिताया और कोई भी पद नहीं लिया और अभी जो भूमि अधिग्रहण बिल जो हुआ इसमें सारे विपक्ष दलों को साथ लेकर गईं. तो उनके नेतृत्व की बहुत आवश्यकता है. क्योंकि वो कांग्रेस को समझती हैं नीतियों को समझती हैं और सबसे ज्यादा जो कांग्रेस को इस वक्त आवश्यकता है पॉलिटिक्स को वो जानती है देश में उनका बहुत बड़ा नाम है. तो हर कांग्रेसी का इस वक्त यही इच्छा है कि सोनिया गांधी को इस वक्त कांग्रेस का नेतृत्व नहीं छोड़ना चाहिए.

 

हालांकि राहुल गांधी के छुट्टी पर जाने के बाद कांग्रेस की कमान सोनिया गांधी ने फिर से संभाल ली थी. भूमि अधिग्रहण के मुद्दे पर संसद से लेकर गांव -देहात तक वो सक्रिय भी नजर आई लेकिन अब राहुल के वापस लौटने के बाद असल सवाल ये है कि वो क्या सोच कर लौटे है. क्योंकि जयपुर में जब उन्होंने सत्ता को जहर कहा था तब लोगों के जहन में ये बात बैठ गई थी कि राहुल गांधी बेमन से राजनीति में हैं.

 

वरिष्ठ पत्रकार विनोद शर्मा बताते हैं कि आज के दिन कांग्रेस पार्टी एक विकट स्थिति में है औऱ इसी के चलते एक प्वाइंट पार्टी के भीतर है कि अभी लीडरशीप चेंज नहीं किया जाए नेतृत्व परिवर्तन अभी नहीं किया जाए लेकिन दूसरी राय ये भी बस रही है कि जितना जल्दी नया चेहरा आए जितना जल्दी कांग्रेस अपना नया स्वरूप लेकर जनता के सामने जाए उतना अच्छा होगा क्योंकि कांग्रेस अपने पुराने स्वरुप में जनता के मन से उतरी हुई है और अब ये बड़ा मुश्किल सवाल है और इसका जबाव ढ़ूढ़ना भी बड़ा मुश्किल है.

 

कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के हालिया बयान से भी ये साफ जाहिर है कि पार्टी के अंदर अभी राहुल गांधी के नेतृत्व को लेकर एक राय नहीं बन पाई है. राहुल की नेतृत्व क्षमता और उनके काम करने के तौर तरीकों को लेकर भी पार्टी में सवाल बना हुआ है. कांग्रेस के कई सीनियर नेताओं को ये डर भी सता रहा है कि अगर राहुल गांधी के हाथ में पार्टी की कमान आती है तो उनका पत्ता साफ हो सकता है और शायद यही डर है जिसने फिलहाल राहुल गांधी के पार्टी प्रमुख बनने की राह में रोढ़ा अटका रखा है.

 

वरिष्ठ पत्रकार रशीद किदवई बताते हैं कि कांग्रेस में एक बहुत बड़ी कैटेगरी है जिसे हम कहते है रुटलेस वंडर्स. इनका कोई बहुत बड़ा जनाधार नहीं है और वो लोग कांग्रेस के बड़े बड़े महत्वपूर्ण पद पर हैं अब बात ये है कि उन लोगों को खतरा महसूस हो रहा है करीब 150 ऐसे लीडर्स हैं जो कांग्रेस में बड़े बड़े पद पर हैं और केंद्र में जो 24 अकबर रोड में पदाधिकारी हैं और राज्यों में उस सबको लगता है कि राहुल गांधी अब क्या क्राइटेरिया बनाएंगे तो राहुल गांधी खुद कैसे पार्टी चलाएंगे इसको लेकर लोगों के मन में सवाल और डाउट है.

 

वरिष्ठ पत्रकार विनोद शर्मा बताते हैं कि पब्लिक लाइफ में जो लोग होते हैं और जो पार्टियों का नेतृत्व करते हैं उनके पास सलाह तो बहुत होती है लेकिन फैसला उनको खुद लेना पड़ता है तो अब ये कठिन फैसला मेरा ख्याल है कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को और राहुल को लेना है कि नेतृत्व परिवर्तन जो होना है वो कितनी जल्दी होना है और किस प्वाइंट पर होना है और इलेक्शन जो ऑर्गेनाइजेशनल और जो होने वाले हैं आने वाले दो महींनों में उसमें होना है. मेरी अपनी राय ये है कि जब इलेक्शन होगा पार्टी के अंदर तब ही ये परिवर्तन होगा.

 

कांग्रेस पार्टी में इसी साल सितंबर महीने में संगठन के चुनाव भी होने वाले है. इन चुनावों के बाद कांग्रेस का अधिवेशन बुलाया जाएगा जिसमें पार्टी के सभी बड़े फैसले लेने वाली कार्यसमिति का भी चुनाव कराया जाएगा. अभी तक ये समिति कांग्रेस अध्यक्ष द्वारा मनोनीत की जाती रही है. ऐसा माना जा रहा है कि सितंबर में ही राहुल गांधी को चुनावी प्रकिया के तहत पार्टी का अध्यक्ष भी बनाया जा सकता है लेकिन फिलहाल तो राहुल गांधी को ही ये तय करना है कि उन्हें आगे क्या कुछ करना है. चुनावी हार से बेदम पड़ी पार्टी मे एक नई जान फूंकने की चुनौती भी उनके सामने सीना ताने खड़ी है. 

 

वरिष्ठ पत्रकार रशीद किदवई बताते हैं कि राहुल गांधी के लिए बहुत सारी चुनौतियां है लेकिन दो बड़ी चुनौती हैं एक तो कांग्रेस के अंदर की और एक तो कांग्रेस के बाहर की. कांग्रेस की बाहर की तो सबको पता है कि कैसे नरेंद्र मोदी से टकराए हैं और सक्षम नहीं है तो लोगों को बहुत ज्यादा उम्मीद नहीं है. लेकिन दूसरा बड़ा चैलेंज हैं वो ये कि राहुल जहां सकारात्मक भूमिका निभा सकते हैं वो ये है कि कांग्रेस की दशा और दिशा निर्धारित करने के लिए. क्योंकि जैसा आपको पता है कांग्रेस के सगठनात्मक चुनाव इस साल होने वाले हैं तो क्या राहुल गांधी चुनाव लड़ेंगे इतने साल वो कहते रहें हैं 10 साल के कांग्रेस के अदंर अंदरुनी तौर पर लोकतंत्र और प्रजातंत्र होना चाहिए तो क्या वो इसको करेंगे.

 

कांग्रेस में संगठन चुनाव तो अभी दूर है लेकिन छुट्टी से लौटे राहुल गांधी को पार्टी ने रीलांच करने की तैयारी अभी से शुरु कर दी है और इसका पहला पड़ाव रविवार को दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाली किसान रैली है. कांग्रेस की इस किसान रैली पर विरोधी भी नजरें टिकाए बैठे हैं क्योंकि इसमें राहुल गांधी की भविष्य की रणनीति की झलक मिलने की उम्मीद है.

 

दरअसल लगातार हार की हताश से जूझ रही कांग्रेस ने किसान हितों के मुद्दों पर जिस तरह से जमीनी स्तर पर लोगों के बीच वापसी की शुरूवात की है उसे देखते हुए अब वो इन्ही मुद्दों के जरिए अपनी राजनैतिक हैसियत वापिस हासिल करना चाहती है. यही वजह है कि संसद से लेकर सड़क तक किसानों के मुद्दों को देश भर में उठाने के बाद कांग्रेस नेतृत्व ने दिल्ली में बड़ी किसान रैली करने की योजना बनाई है लेकिन कांग्रेस के इस ग्रैंड आयोजन को राहुल गांधी की वापसी के मौके के तौर पर भी देखा जा रहा है. दरअसल किसानों का मुद्दा हमेशा से राहुल गांधी के दिल के करीब रहा है. यूपीए सरकार का लैंड बिल भी उन्हीं की पहल माना जाता था और भट्टा परसौल गांव की यात्रा करके राहुल ने साबित भी किया था कि वह देश के किसानों के हक के लिए संघर्ष करना चाहते हैं.

 

वरिष्ठ पत्रकार विनोद शर्मा बताते हैं कि भट्टा पारसौल में जाकर उन्होंने स्वंय इस मुद्दे का श्री गणेश किया था लेकिन वो पुरानी बात हो गई है औऱ नई बात को नए लबादे में सामने रखना पड़ेगा. उसी तरह से बहुतेरी और सी बातें है जहां पर उनको सीधा सीधा रस्साकशी करनी पड़ेगी और वो रस्साकशी प्रधानमंत्री के साथ होगी जो वाक्यपटु हैं और बोलने में बहुत अच्छे और सत्तारुढ़ हैं. सत्तारुढ़ दल के साथ लड़ना उसके लिए एक खासा हौसला चाहिए और एक खासी एप्लिकेशन ऑफ माइंड चाहिए वो भी दिखानी पड़ेगी लेकिन इन सब चीजों को करने से पहले उनको पार्टी के भीतर उन लोगों को आश्वस्त करना है जो लोग थोड़े से असमंजस में हैं कि क्या उनके नेतृत्व में आज के दिन पार्टी आगे बढ़ सकती है तो उनका विश्वास जीतना है फिर अपनी पार्टी के जरिए जनता का विश्वास जीतना है. ये कहना आसान है औऱ करना मुश्किल है.

 

वरिष्ठ पत्रकार अरविंद मोहन बताते हैं कि लिब्रेलाइजेशन का सेकंड फेज चालू हो या फिर जो इसके सोशल प्रोग्राम हैं वो चलते रहें और उनको मजबूत किया जाए और अगर ये दुविधा पार्टी में अगर उभरती है और बहुत साफ लगता है कि जो सामाजिक प्रोग्राम थे उनके पक्ष में सोनिया जी औऱ राहुल जी तो मुझे कहीं न कहीं थोडी उम्मीद कि किरण दिखाई देती हैं. अगर उन्हें ग्रामीण औरतों की लिटरेसी रेट की बच्चों के स्कूल जाने की औऱ कई अन्य चीजों की चिंता हो सस्ते अनाज की तो अगर इसकी चिंता है तो ये उनकी पॉलिटिक्स को बड़ा बनाता है और अगर मेरे हिसाब सो वो अगर इसको आगे बढ़ाए और इसको तेज करेंगे तो वो और बड़े नेता होंगे. नहीं करेंगें और ढुलमुल व्यवहार रहेगा तो फिर वही हाल होगा और शायद फिर एक बार के बाद मुझे नहीं लगता कि उन्हें चांस मिलेगा.

 

कांग्रेस की किसान राजनीति और पार्टी में मचे घमासान को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी फिलहाल खामोश हैं. शायद वो वेट एंड वाच के फार्मूले पर काम कर रही हैं क्योंकि इसी साल बिहार में विधानसभा के चुनाव होने हैं. फिर अगले साल पश्चिम बंगाल में और 2017 में उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव होगें. साफ है कि आने वाले दिनों में कांग्रेस के लिए राह आसान नहीं है और ऊपर से उसका मुकाबला सत्तारुढ बीजेपी के ताकतवर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से है. ऐसे में ये सवाल आज हर किसी के जहन में कौंध रहा है कि विपश्यना के तप में तप कर वापस लौटे कांग्रेस के राजकुमार राहुल गांधी क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को टक्कर देने के लिए तैयार हैं. 

 

 

Sports News से जुड़े हर समाचार के लिए हमे फेसबुक, ट्विटर, गूगल प्लस पर फॉलो करें साथ ही हमारा Hindi News App डाउनलोड करें
Web Title: rahul gandhi
Explore Hindi News from politics, Bollywood, sports, education, trending, crime, business, साथ ही साथ और भी दिलचस्प हिंदी समाचार
और जाने: Rahul Gandhi
First Published:

Related Stories

INDvsSL: दूसरे दिन अजीबोगरीब तरीके से रन आउट हुए उपुल थरंगा
INDvsSL: दूसरे दिन अजीबोगरीब तरीके से रन आउट हुए उपुल थरंगा

नई दिल्ली/गॉल: टीम इंडिया के विशाल 600 रनों के जवाब में आखिरी अपडेट मिलने तक श्रीलंकाई टीम...

ENGvsSA: बारिश से बाधित पहले दिन इंग्लैंड ने 4 विकेट खोकर बनाए 179 रन
ENGvsSA: बारिश से बाधित पहले दिन इंग्लैंड ने 4 विकेट खोकर बनाए 179 रन

सौजन्य: AP नई दिल्ली/लंदन: एलिस्टेयर कुक की...

INDvsSL श्रीलंका के युवा अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रहे: मुरलीधरन
INDvsSL श्रीलंका के युवा अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रहे: मुरलीधरन

कोलकाता: मुथैया मुरलीधरन ने श्रीलंका क्रिकेट टीम की हाल के समय में खराब प्रदर्शन के लिये युवा...

पीएम मोदी ने महिला क्रिकेट टीम से की मुलाकात कहा- आपने देश को गौरवान्वित किया
पीएम मोदी ने महिला क्रिकेट टीम से की मुलाकात कहा- आपने देश को गौरवान्वित...

नई दिल्ली: महिला विश्व कप में फाइनल तक का सफर तय करने वाली भारतीय टीम से प्रधानमंत्री नरेंद्र...

BCCI ने महिला क्रिकेट टीम को दिया 50 लाख रुपये नकद इनाम, रेलवे ने भी दिया तोहफा
BCCI ने महिला क्रिकेट टीम को दिया 50 लाख रुपये नकद इनाम, रेलवे ने भी दिया तोहफा

नई दिल्ली: बीसीसीआई ने आईसीसी विश्व कप में फाइनल तक का सफर तय करने वाली भारतीय महिला क्रिकेट...

टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू के साथ ही हार्दिक पांड्या के नाम दर्ज हुआ बड़ा रिकॉर्ड
टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू के साथ ही हार्दिक पांड्या के नाम दर्ज हुआ बड़ा...

नई दिल्ली: टीम इंडिया के स्टार खिलाड़ी हार्दिक पांड्या श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट में...

कोहली का विकेट लेकर खुशी का ठिकाना नहीं था: नुवान प्रदीप
कोहली का विकेट लेकर खुशी का ठिकाना नहीं था: नुवान प्रदीप

      गॉल: भारत के खिलाफ जारी टेस्ट मैच में...

रेल मंत्रालय ने समय से पहले ही किया मिताली राज का प्रमोशन
रेल मंत्रालय ने समय से पहले ही किया मिताली राज का प्रमोशन

हैदराबाद: महिला क्रिकेट टीम की कप्तान मिताली राज को रेल मंत्रालय ने उनकी पदोन्नति देकर दक्षिण...

खेल रत्न और अर्जुन अवॉर्ड कमिटी के सदस्य बने वीरेंदर सहवाग
खेल रत्न और अर्जुन अवॉर्ड कमिटी के सदस्य बने वीरेंदर सहवाग

नई दिल्ली: टीम इंडिया के पूर्व विस्फोटक बल्लेबाज वीरेंदर सहवाग को खेल रत्न और अर्जुन अवॉर्ड...

SLvsIND: टीम इंडिया के विशाल स्कोर के आगे लड़खड़ाई श्रीलंकाई टीम
SLvsIND: टीम इंडिया के विशाल स्कोर के आगे लड़खड़ाई श्रीलंकाई टीम

गॉल: पहली पारी में टीम इंडिया के 600 रनों के विशाल स्कोर के सामने श्रीलंकाई पारी लड़खड़ा गई है. गॉल...

Get the Latest Coupons and Promo codes for 2017