टीम इंडिया के 'नए बॉस'

By: | Last Updated: Friday, 2 January 2015 4:44 PM
ravi shahtri

नई दिल्लीः महेन्द्र सिंह धोनी का अचानक संन्यास और विराट कोहली की टेस्ट क्रिकेट के कप्तान के तौर पर हुई ताजपोशी ने क्रिकेट प्रेमियों को चौंका दिया है. मीडिया से लेकर क्रिकेट के गलियारों में चर्चा है कि इसके पीछे हैं टीम इंडिया के नए बॉस रवि शास्त्री. हालांकि शास्त्री कह रहे हैं कि ये धोनी का निजी फैसला है. अब धोनी के इस फैसले से ही उठा है ये विवाद क्योंकि सीरीज में अभी एक और खेला जाना बाकी है और उससे पहले ही टीम इंडिया ने ऑस्ट्रेलिया दौरे पर एक और टेस्ट सीरीज गंवा दी है.

 

विदेशी धरती पर इस ताजी हार के साथ कुल 90 टेस्ट मैचों में टीम इंडिया का हिस्सा रहे महेंद्र सिंह धोनी ने टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कह दिया. 60 टेस्ट मैचों में से 45 फीसदी में जीत दिलाने वाले कैप्टन कूल ने ऑस्ट्रेलिया दौरे के तीसरे टेस्ट के ड्रॉ होते ही ड्रेसिंग रूम में टेस्ट क्रिकेट से संन्यास का ऐलान कर दिया. अब कैप्टन कूल की जगह लेंगे फायर ब्रांड क्रिकेटर विराट कोहली कोहली के कप्तान बनते ही एक ही झटके में टीम इंडिया का चेहरा बदल गया है, कप्तान बदल गया है और अब आप देखेंगे कि कैसे फैसलों पर मुहर लगाने वाला भी बदल गया है.

 

टीम इंडिया का नया बॉस – रवि शास्त्री

 

क्रिकेट के पंडित सीधा तर्क दे सकते हैं कि साल 2011 से साल 2014 के बीच भारत विदेशी दौरे पर एक भी टेस्ट सीरीज नहीं जीत पाया. इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, दक्षिण अफ्रीका और फिर दोबारा इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया. कुल मिलाकर छ सीरीज लगातार हारने के बाद धोनी ने संन्यास लिया है और विराट की ताजपोशी हुई है. लेकिन चर्चा है कि संन्यास और ताजपोशी की कहानी इतनी छोटी नहीं है.

 

अगर धोनी के संन्यास और कोहली की ताजपोशी की कहानी छोटी होती तो टीम इंडिया के डायरेक्टर रविशास्त्री अपनी ताजपोशी के पांच महीने बाद पहली बार मीडिया को पहला इंटरव्यू देने की शायद जरूरत ना समझते.

 

जब उनसे पूछा गया कि धोनी के संन्यास पर ड्रेसिंग रूम में क्या माहौल था?

उन्होंने कहा कि हम सब स्टंप्ड हो गए…. सबकुछ बेहद चौंकाने वाला था. मैच के बाद होने वाले प्रजेंटेशन खत्म होने तक कुछ पता नहीं था. संन्यास के बारे में सिर्फ एक व्यक्ति ही जानता था, खुद धोनी. हर खिलाड़ी को कभी न कभी रिटायरमेंट लेना ही होता है. यह बेहद निजी मामला होता है.

 

जब उनसे धोनी के बीच सीरीज में संन्यास के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा शायद उन्हें लगा होगा कि वे अब खुद और टीम के साथ न्याय नहीं कर पा रहे हैं. इससे तो उनका कद बढ़ा ही है.

 

रवि शास्त्री के ये बयान दरअसल उन आरोपों का जवाब हैं जिसमें बार-बार कहा जा रहा था रवि शास्त्री ने धोनी को दरकिनार कर दिया है और टीम इंडिया की कमान पूरी तरह अपने हाथ में ले ली है. कहा जा रहा था कि जो फैसले पहले बतौर कप्तान धोनी और टीम इंडिया के हेड कोच डंकन फ्लेचर ले लिया करते थे उनमें अब रवि शास्त्री की भूमिका अहम हो गई है. ये चर्चा भी गर्म है कि रवि शास्त्री बन चुके हैं टीम इंडिया का पॉवर सेंटर.

 

रवि शास्त्री ने ही अब टीम इंडिया की कमान संभालने के लिए विराट कोहली को चुना है. वो भी तब जब मैदान और मैदान के बाहर उनके चाहने वाले भी उनके गर्म मिजाज को समझते और जानते हैं

 

विराट टीम इंडिया के कप्तान होंगे अब ये तय हो चुका है क्योंकि इस फैसले पर रवि शास्त्री की मुहर लग गई है. रवि शास्त्री भूमिका को समझने के लिए धोनी के संन्यास और कोहली को कप्तान बनाए जाने से पहले 15 नवंबर को दिए गए उनके बयान पर ध्यान देगा होगा.

 

विराट कोहली पर उन्होंने कहा था ‘ वो (विराट कोहली) आक्रामक हैं और वो बहुत युवा हैं इसलिए उनके अंदर उत्साह भरा हुआ है जो कि टीम के लिए बहुत अच्छा है. उनमें मैं खुद को देख रहा हूं. जब मैं 20-22 साल का था तब मेरे अंदर भी हार्मोन दौड़ रहे थे.’

 

जाहिर है भारतीय क्रिकेट के इस ताजा विवाद में जिस शख्स का नाम बार-बार आया वो हैं टीम इंडिया के डायरेक्टर रवि शास्त्री. वही रवि शास्त्री जिन्होंने पहले मैदान पर गेंदबाज से बल्लेबाज और फिर बल्लेबाजी में भी दसवीं पायदान से ओपनिंग तक का सफर तय किया था और अब मैदान से बाहर क्रिकेट कमेंटेटर से भारतीय क्रिकेट के सुप्रीम कमांडर बन चुके हैं.

 

शास्त्री का क्रिकेट करियर –

 

1983 विश्वकप जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा था 21 साल का ये युवा जिसका नाम है रविशंकर जयाद्रिथा शास्त्री. लंबे कद और छरहरी काठी के रवि शास्त्री को टीम इंडिया में आए तब सिर्फ 2 साल हुए थे.

 

उन्हें 21 फरवरी 1981 में स्पिनर दिलीप दोशी की जगह बतौर स्पिनर ही टीम में जगह मिली थी. गेंदबाजी तो कमाल थी ही लेकिन गेंदबाज होने के नाते उन्हें दसवें नंबर पर खेलने भेजा जाता था. लेकिन सिर्फ दस महीने में रवि शास्त्री ने टीम के ओपनर की जगह हथिया ली और ऑलराउंडर बन गए.

 

दरअसल रविशास्त्री ने मुंबई जो तब बॉम्बे हुआ करता था से अपना क्रिकेट करियर शुरू किया था. पोद्दार कॉलेज से खेलते खेलते जब वो रणजी टीम का हिस्सा बने तब उनकी उम्र सिर्फ 17 साल थी और वो तब सबसे युवा रणजी खिलाड़ी थे. रवि शास्त्री उन चंद खिलाड़ियों में से हैं जिन्होंने एक से 10 नंबर की हर पायदान पर बैटिंग की.

 

उन्हें साल 1985 में ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में वर्ल्ड चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन के लिए चैंपियन्स ऑफ चैंपियन्स के खिताब से नवाजा गया था. टेस्ट और वनडे दोनों फार्मेट में 1000 रन और 100 विकेट लेने वाले दुनिया के चंद खिलाड़ियों में शामिल रहे हैं शास्त्री

 

रविशास्त्री ने 80 टेस्ट मैचौं में 35.79 की औसत से 3830 रन बनाए जिसमें 12 शतक और 11 अर्धशतक शामिल हैं. टेस्ट क्रिकेट में उन्होंने 151 विकेट भी लिए. 150 वनडे मैचों में 29.4 की औसत से 3108 रन बनाए और 129 विकेट लिए.

 

रविशास्त्री को टीम इंडिया में कई बार उपकप्तान तो रहे लेकिन सिर्फ एक टेस्ट में कप्तानी कर पाए. उन्होंने ने 1992 में महज तीस साल उम्र में मैदान को अलविदा कह दिया. रणजी ट्रॉफी क्रिकेट में एक ओवर में 6 छक्के मारकर रवि शास्त्री ने ही गैरी सोबर्स के रिकॉर्ड की बराबरी की थी लेकिन बाद में धीमा क्रिकेट खेलने के आरोप लगते थे. पैड पर बॉल खेलने वाला उनका चपाती शॉट बदनाम हो गया था.

 

दूसरी पारी –

 

टीम इंडिया ने साल 2011 में जब दूसरी बार वर्ल्ड कप जीता तो रवि शास्त्री फिर मैदान पर मौजूद थे बतौर कमेंटेटर. क्रिकेट कमेंट्री रविशास्त्री की दूसरी पारी थी और कहा जाता है कि जैसे सुनील गावस्कर रवि शास्त्री को क्रिकेट में लेकर आए थे वैसे ही कमेंट्री की दुनिया में भी रवि शास्त्री उन्हीं की बदौलत पहुंचे.

 

सुनील गावस्कर, वसीम अकरम और हर्षा भोगले के साथ उनकी जोड़ी कमेंट्री की दुनिया में सबसे कामयाब जोड़ियों में शुमार की जाती है. दरअसल कमेंट्री की दुनिया से ही रविशास्त्री उस मुकाम तक पहुंचे हैं जहां वो भारतीय क्रिकेट के सबसे ताकतवर सदस्य बने.

 

साल 2007 में भारत वर्ल्ड कप के फाइनल से पहले ही बाहर हो गया था. इसके बाद उस समय के टीम के कोच ग्रेग चैपल ने इस्तीफा दे दिया और तब भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने बांग्लादेश दौरे के लिए रविशास्त्री को मैनेजर बना दिया. भारत ने वो सीरीज जीती और रवि शास्त्री ने बीसीसीआई का दिल. बीसीसीआई ने उन्हें बोर्ड के कमेंटेटर के तौर पर नियुक्त कर लिया.

 

रवि शास्त्री के कमेंटेटर से भारतीय क्रिकेट के सबसे बड़े बॉस बनने में विदेशी दौरों पर भारतीय टीम की लगातार हार ने बड़ी भूमिका निभाई

 

 

साल 2011 में इंग्लैंड दौरे में भारत 4-0 से हारा. साल 2011-12 में ऑस्ट्रेलिया दौरे पर 4-0 से हार मिली. तो वहीं 2013 में साउथ अफ्रीका में 1-0 से हार मिली. साल 2014 में न्यूजीलैंड में भारत 1-0 से हारा. फिर 2014 में इंग्लैंड में 3-1 से हार मिली.

 

 

टीम इंडिया के गिरते स्तर को सुधारने के लिए इंग्लैंड में वनडे सीरीज से पहले ही बीसीसीआई ने फिर रवि शास्त्री का दामन था लिया. साल 2014 के अगस्त महीने में रविशास्त्री को टीम इंडिया का डायरेक्टर बना दिया गया.

 

 

13 अक्टूबर साल 2014 को फाइनेंशियल टाइम्स के मुताबिक कमेंटेटर के काम के लिए शास्त्री को 4 करोड़ सालाना कॉन्ट्रेक्ट पर काम कर रहे हैं

डायरेक्टर की भूमिका के लिए उन्हें 2 करोड़ रुपये सालाना का बोनस भी दिया गया है. इसके मुकाबले धोनी को हर फार्मेट के 35 मैच खेलने के लिए 2 करोड़ साठ लाख रुपये ही मिले हैं.

 

 

शास्त्री की बीसीसीआई के हर चेहरे से करीबी रही है चाहे वो जगमोहन डालमिया हों या श्रीनिवासन या फिर आईपीएल के सर्वेसर्वा रहे ललित मोदी. एक तरफ रवि शास्त्री बीसीसीआई के पावर सेंटर बने रहने के हक में हैं तो बोर्ड ने उन्हें पावर सेंटर बना दिया है. शास्त्री कह चुके हैं खिलाड़ियों को आलोचना करने की बजाए टीम का हिस्सा बनने के लिए बोर्ड का शुक्रगुजार होना चाहिए. अब वो बोर्ड की पसंद हैं और टीम इंडिया उनकी पसंद से चलने लगी है.

Sports News से जुड़े हर समाचार के लिए हमे फेसबुक, ट्विटर, गूगल प्लस पर फॉलो करें साथ ही हमारा Hindi News App डाउनलोड करें
Web Title: ravi shahtri
Explore Hindi News from politics, Bollywood, sports, education, trending, crime, business, साथ ही साथ और भी दिलचस्प हिंदी समाचार
First Published:

Related Stories

वेस्टइंडीज के खिलाफ इंग्लैंड टीम ने किया सिर्फ एक बदलाव
वेस्टइंडीज के खिलाफ इंग्लैंड टीम ने किया सिर्फ एक बदलाव

      बर्मिंघम: वेस्टइंडीज के खिलाफ शुरू हो...

...तो इस वजह से वनडे टीम में युवराज को नहीं मिली जगह !
...तो इस वजह से वनडे टीम में युवराज को नहीं मिली जगह !

नई दिल्ली: श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज के बाद 20 अगस्त से शुरु हो रहे वनडे सीरीज के लिए टीम...

वनडे सीरीज के लिए श्रीलंका टीम में थिसारा परेरा और सिरिवर्दना की हुई वापसी
वनडे सीरीज के लिए श्रीलंका टीम में थिसारा परेरा और सिरिवर्दना की हुई वापसी

कोलंबो: भारत के खिलाफ पांच वनडे मैचों की सीरीज के लिए श्रीलंका टीम में थिसारा परेरा और मिलिंदा...

4 साल बाद एस. श्रीसंत ने क्रिकेट के मैदान पर की वापसी
4 साल बाद एस. श्रीसंत ने क्रिकेट के मैदान पर की वापसी

कोच्चि: जहां एक ओर पूरा देश 71वें स्वतंत्रता...

Get the Latest Coupons and Promo codes for 2017