मैंने क्रिकेट में वो सबकुछ पाया जिसकी कभी कल्पना की थीः सहवाग

By: | Last Updated: Sunday, 7 December 2014 1:03 PM
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नई दिल्लीः टीम इंडिया के विस्फोटक बल्लेबाज वीरेन्द्र सहवाग अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उस वक्त ही चर्चा में आ गए थे जब उन्होंने अपने पहले टेस्ट में ही शतक लगाया था. इसके बाद सहवाग मैदान में जब भी उतरे हमेशा चर्चा के केन्द्र में रहे. सहवाग फिर चर्चा में हैं लेकिन इस बार क्रिकेट के मैदान पर आने के लिए नहीं बल्कि बाहर होने के लिए. 2011 विश्व कप में विश्व विजेता टीम के उपकप्तान रहे सहवाग अब टीम इंडिया में फिट नहीं बैठते. चयनकर्ताओं ने उन्हें विश्व कप 2015 के लिए टीम इंडिया में जगह नहीं दी. ऐसे में सबके सामने यही सवाल है कि इस पर सहवाग क्या सोचते हैं.

 

इएसपीएनक्रिकइन्फो को दिए इंटरव्यू में सहवाग ने खुल कर अपनी बातें रखी. 36 साल के इस बल्लेबाज ने कहा कि ”मैंने वो क्रिकेट में वो सब कुछ पा लिया है जिसकी कल्पना मैंने की थी और अब मैं अपने खेल का मजा ले रहा हूं.”

 

उन्होंने कहा – ”एक क्रिकेटर होने के नाते हर किसी का सपना होता है कि वो अपने देश के लिए खेले. मैंने जब क्रिकेट पर ध्यान दिया तब से मैं टीम इंडिया के लिए खेलना चाहता था. मेरा ये सपना जब पूरा हुआ तब मैं अपने दूसरे सपने को पाने की सोचने लगा. मेरे एक दोस्त ने कहा कि देश के लिए खेलना आसान है लेकिन 10-15 साल तक खेलना मुश्किल. इसके बाद मैंने अपना टारगेट 100 टेस्ट खेलने का रखा और मैंने उसे भी पा लिया. अब मेरे लिए कुछ भी खास नहीं है मैंने सबकुछ पा लिया है और अब क्रिकेट का लुत्फ उठा रहा हूं.”

 

टेस्ट क्रिकेट में दो तिहरा शतक और वनडे में दोहरा शतक लगाने वाले इस बल्लेबाज ने कहा कि वो अब व्यक्तिगत उपलब्धि के लिए नहीं सोच रहे हैं लेकिन एक दो साल और क्रिकेट खेलना चाहते हैं.  

 

2013 में टीम इंडिया से ड्रॉप किए गए सहवाग ने कहा कि ”आपके अपने जीवन में खुश रहना चाहिए. हर क्रिकेटर अपने निजी रिकॉर्ड के लिए चिंतित रहता है. उसे इस बात कि चिंता रहती है कि वो 5000-10000 टेस्ट रन बनाए. लेकिन मैं ऐसा नहीं हूं मैंने 100 टेस्ट देश के लिए खेला और लगातार क्रिकेट खेल रहा हूं.”

 

अपने संन्यास पर बात करते हुए सहवाग ने कहा – ”मैं आज संन्यास लूं या दो साल बाद मेरे लिए इसका कोई मतलब नहीं है. 8000 या 10000 रन मेरे लिए कोई मायने नहीं रखता. टेस्ट में मैं अगर 10000 रन बना भी लूं तो मेरे अलावा कोई खुश नहीं होगा. किसी को आपके निजी रिकॉर्ड से कोई मतलब नहीं.”

 

2011 विश्व कप में टीम इंडिया के सदस्य रहे सहवाग ने कहा कि ”मैं अब कुछ भी नया नहीं कह रहा हूं. हां ये सच है कि अब मैं वैसी बल्लेबाजी नहीं कर पा रहा हूं जिसके लिए मैं जाना जाता हूं. फर्स्ट क्लास क्रिकेट में भी मैं वैसे ही खेल रहा हूं. अगर रन बनते हैं तो तेज बनते हैं नहीं तो फिर जल्दी आउट हो जाता हूं.”

 

दाएं हाथ के इस बल्लेबाज ने भारत के लिए 104 टेस्ट में लगभग 50 के औसत से 8586 रन बनाए हैं. मार्च 2013 में सहवाग ने अपना आखिरी टेस्ट मैच खेला था.

 

 

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