सहवाग ने कहा - शुक्रिया सौरव, मैं आपका शुक्रगुजार हूं

By: | Last Updated: Tuesday, 20 October 2015 1:45 PM
sehwag thanks ganguly

नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह चुके वीरेंद्र सहवाग ने आज कहा कि वह खुशकिस्मत रहे कि सचिन तेंदुलकर जैसे महान खिलाड़ियों के दौर में खेले.

 

सैंतीस सहवाग के सहवाग ने 1999 से 2013 के बीच भारत के लिये क्रिकेट खेला. उन्होंने कहा कि उन्होंने तेंदुलकर, राहुल द्रविड़, सौरव गांगुली और अनिल कुंबले से काफी कुछ सीखा.

 

सहवाग ने कहा ,‘‘मैं खुशकिस्मत हूं कि सचिन, द्रविड़, गांगुली, अनिल कुंबले, वीवीएस लक्ष्मण, जवागल श्रीनाथ, जहीर खान, एम एस धोनी, हरभजन सिंह और युवराज जैसे खिलाड़ियों के साथ खेला. मैने उनसे काफी कुछ सीखा , जिस तरीके से वे खेलते थे या मैच की तैयारी करते थे.’’ उन्होंने कहा कि वह खेल को सिर्फ आंकड़ों के संदर्भ में नहीं देखते हालांकि उनके नाम कम से कम एक रिकॉर्ड है जो तेंदुलकर या सुनील गावस्कर के नाम भी नहीं है.

 

उन्होंने कहा ,‘‘मैं अपने कैरियर को ऐसे नहीं देखता कि टेस्ट क्रिकेट में अकेला तिहरा शतक जड़ने वाला बल्लेबाज हूं. मेरे रोलमॉडल सचिन, सुनील गावस्कर और कपिल देव रहे हैं. मैं उन्हें खेलते देखकर बड़ा हुआ और उनसे बहुत कुछ सीखा.’’ उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहकर वह खुश हैं.

 

उन्होंने कहा ,‘‘मैने अपना खेल खेला. मेरा फंडा हर गेंद पर रन बनाने का था. मैं हर गेंद को पीटना चाहता था. मेरी सोच हमेशा सकारात्मक रही. मैं इसी वजह से इतने रन बना सका.’’  सहवाग ने कहा ,‘‘मैने काफी रन बनाये और मैं अपने कैरियर से काफी खुश हूं. मैं नहीं कह सकता कि ज्यादा उपलब्धियां रही या कम. मैं अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहकर खुश हूं. मुझे क्रिकेट की कमी खलेगी लेकिन मुझे लगा कि यही संन्यास लेने का सही समय है. मेरे प्रशंसकों, बीसीसीआई, कोचों, दोस्तों, साथियों और टीम के सदस्यों को धन्यवाद जिन्होंने हमेशा मेरा साथ दिया.’’

 

सहवाग ने साउथ अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट में 2001 में अपने पदार्पण को कैरियर का सबसे यादगार पल करार दिया. उन्होंने कहा ,‘‘मेरा पहला तिहरा शतक, विश्व कप 2011 जीतना और श्रीलंका के खिलाफ 201 रन मेरे सबसे सुखद पल थे लेकिन सबसे यादगार पल टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण का था. उससे पहले मुझे वनडे बल्लेबाज समझा जाता था और समझा जाता था कि मेरी शैली सिर्फ वनडे को ही रास आती है.’’ उन्होंने साउथ अफ्रीका के खिलाफ 2001 में पहले टेस्ट में उन्हें टीम में शामिल करने के लिये पूर्व कप्तान सौरव गांगुली को भी धन्यवाद दिया.

 

उन्होंने कहा ,‘‘ गांगुली ने सलामी बल्लेबाज की अपनी जगह मेरे लिये छोड़ दी. वह मुझसे प्यार करता था और मुझ पर उसे भरोसा था. शुक्रिया सौरव , मैं आपका शुक्रगुजार हूं. आपने मुझे टेस्ट क्रिकेटर के रूप में देखा. यदि मैं टेस्ट नहीं खेलता तो इतने रन नहीं बना पाता.’’

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