कोर्ट ने श्रीनिवासन से कहा: हितों का टकराव नहीं होने का तर्क स्वीकार करना मुश्किल

By: | Last Updated: Monday, 8 December 2014 2:51 PM

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने बीसीसीआई के अध्यक्ष पद से निर्वासित एन श्रीनिवासन से आज कहा कि उनकी यह दलील स्वीकार करना बहुत मुश्किल है कि चेन्नई सुपर किंग्स का मालिक होना और बोर्ड का मुखिया होने के बावजूद हितों का कोई टकराव नहीं था. कोर्ट ने इसके साथ ही श्रीनिवासन से कुछ तीखे सवाल भी किये.

 

जस्टिस तीरथ सिंह ठाकुर की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि हितों का टकराव तो पूर्वाग्रह के समान है और हो सकता है कि वास्तविक पूर्वाग्रह नहीं हो लेकिन पूर्वाग्रह की संभावना होना भी महत्वपूर्ण है.

 

कोर्ट ने कहा कि क्रिकेट की पवित्रता बनाये रखनी है और इसके मामलों की देखरेख करने वाले सभी व्यक्तियों को संदेह से परे होना चाहिए.

 

न्यायाधीशों ने कहा, ‘‘सभी परिस्थितियों पर गौर करते समय आपकी यह दलील स्वीकार करना बहुत मुश्किल है कि इसमें हितों का टकराव नहीं था.’’ कोर्ट ने कहा कि इस मामले में चार बिन्दु है जिनसे हितों के टकराव का मुद्दा उठता है क्योंकि श्रीनिवासन इंडिया सीमेन्ट्स के प्रबंध निदेशक हैं, इंडिया सीमेन्ट्स चेन्नई सुपर किंग्स की मालिक है और इसका एक अधिकारी सट्टेबाजी में शामिल है जबकि वह खुद बीसीसीआई के मुखिया हैं.

 

न्यायाधीशों ने श्रीनिवासन की ओर से बहस कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल से कहा, ‘‘इन सभी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुये आपके इस तर्क को स्वीकार करना बहुत मुश्किल है कि इसमें कोई हितों का टकराव नहीं था.’’ सिब्बल का कहना था कि मौजूदा समय में सभी गतिविधियों में हितों का टकराव नजर आता है. इस संबंध में उन्होंने कहा कि हाकी फेडरेशन और फीफा में इसकी अनुमति है.

 

कोर्ट ने सुझाव दिया कि चुनाव के बाद गठित होने वाले बोर्ड को जस्टिस मुद्गल समिति की रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई करनी चाहिए. इसके साथ ही कोर्ट ने जानना चाहा कि किसे बीसीसीआई का चुनाव लड़ने की अनुमति दी जानी चाहिए. कोर्ट ने कहा कि यदि हम उसे इसका फैसला करने की अनुमति दें तो बीसीसीआई को हर तरह के कलंक से मुक्त होना चाहिए. कोर्ट ने सवाल किया कि किसे चुनाव लड़ने की अनुमति दी जानी चाहिए? क्या रिपोर्ट में दोषी ठहराये गये व्यक्ति को चुनाव लडने की अनुमति दी जा सकती है? कोर्ट ने कहा कि इस रिपोर्ट के निष्कषरे के आधार पर कार्रवाई करने के लिये क्रिकेट का प्रशासक सभी आरोपों और संदेह से परे होना चाहिए.

 

न्यायाधीशों ने श्रीनिवासन से कहा, ‘‘हम यह नहीं कह रहे हैं कि फ्रेन्चाइजी लेने में छल किया गया लेकिन एक बार जब आप टीम के मालिक हो जाते हैं तो टीम में दिलचस्पी और क्रिकेट के प्रशासक के रूप में आप परस्पर विपरीत दिशा में चल रहे होते हैं.’’ कोर्ट ने कहा, ‘‘आप एक ठेकेदार (सीएसके के मालिक के नाते) हैं और साथ ही ठेका करने वाले पक्ष (बीसीसीआई) के मुखिया भी हैं.

 

कोर्ट ने कहा कि इस मसले को क्रिकेट की जनता के नजरिये से देखना होगा जिसके लिये यह दीवानापन ही नहीं बल्कि धर्म भी है.

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