विश्व कपः संभावितों के एलान के साथ ही खत्म हो गया नौ दिग्गजों का करियर!

By: | Last Updated: Thursday, 4 December 2014 11:29 AM
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नई दिल्लीः ऑस्ट्रेलिया-न्यूजीलैंड में खेले जान विश्व कप 2015 के लिए बीसीसीआई ने आज टीम इंडिया के संभावित 30 खिलाडियों के एलान कर दिया. इसके साथ ही टीम इंडिया के नौ बड़े दिग्गज खिलाड़ियों के करियर पर अब प्रश्न चिह्न लग गया है. ये ऐसे खिलाड़ी थे जिन्होंने 2011 में टीम इंडिया को 28 साल बाद विश्व कप दिलाया था.

 

बीसीसीआई ने जिन नौ दिग्गज खिलाड़ियों से अपनी नजरें हटाई वो हैं विस्फोटक बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग, सहवाग के जोड़ीदार गौतम गंभीर, 2011 विश्व कप में सबसे दमदार प्रदर्शन करने वाले सिक्सर किंग युवराज सिंह, 2011 विश्व कप में सबसे अधिक विकेट लेने वाले तेज गेंदबाज ज़हीर खान और टर्बनेटर के नाम से मशहूर हरभजन सिंह. इनके अलावा तेज गेंदबाज आशीष नेहरा, मुनाफ पटेल, प्रवीण कुमार और विस्फोटक बल्लेबाजी करने वाले यूसुफ पठान.

 

 

वीरेंद्र सहवाग – 251 वनडे में 104.33 के शानदार स्ट्राइक रेट के साथ 8273 रन बनाने वाले विस्फोटक बल्लेबाज सहवाग अपना आखिरी मुकाबला कोलकाता के ईडन गार्डन में पाकिस्तान के खिलाफ खेला था. सहवाग इस मैच में 31 रन ही बना पाए और इसके साथ ही उनके करियर पर प्रशन चिह्न लग गया था. पहले मैच में भी उनका बल्ला खामोश ही रहा और तीसरे मैच में उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया. इसके बाद से सहवाग ने टीम इंडिया में वापसी की कई बार कोशिश की लेकिन अजिंक्या रहाणे, रोहित शर्मा और शिखर धवन ने बहेतरीन सलामी बल्लेबाजी करके उनकी वापसी पर ताला लगा दिया. इस बीच सहवाग ने आईपीएल में कुछ किंग्स इलेवन पंजाब के लिए कुछ अच्छी पारी खेली थी लेकिन चयनकर्ताओं को खुश नहीं कर पाए. 2013 के बाद से सहवाग टेस्ट और वनडे दोनों ही टीम से बाहर ही रहे हैं ऐसे में उनके अंतरराष्ट्रीय करियर को खत्म ही माना जा रहा है.

 

 

गौतम गंभीर – वीरेंद्र सहवाग के साथ ही उनके जोड़ीदार गौतम गंभीर को भी चयनकर्ताओं ने विश्व कप के लिए फिट नहीं समझा. 2011 विश्व कप मुकाबले में श्रींलका के खिलाफ फाइनल मुकाबले में टीम इंडिया को जीत दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले गंभीर ने 147 वनडे में 39.68 के औसत से कुल 5238 रन बनाए. सहवाग की तरह ही गंभीर ने अपना आखिरि अंतरराष्ट्रीय वनडे मैच 2013 में खेला था. इंग्लैंड के खिलाफ धर्मशाला में खेले गए इस मैच में गंभीर 24 रन ही बनाए थे. स्लिप के ऊपर और आस-पास से गेंद को खेलने में महारत रखने वाले गंभीर की टाइमिंग इकनी खराब हुई की गेंद कभी विकेटकीपर तो कभी स्लिप के हाथों में जाने लगी. गंभीर के खराब टाइमिंग ने टीम में शिखर धवन को जगह दी और गंभीर धीरे-धीरे चयनकर्ताओं की नजर से बाहर होते चले गए. हालांकि केकेआर के लिए आईपीएल जीतना इनके लिए इस साल का सबसे खुशनुमा पल रहा लेकिन अब अंतरराष्ट्रीय करियर खत्म ही समझिए.

 

 

युवराज सिंह – विश्व कप 2011 की कहानी जिस एक खिलाड़ी के आस पास घूमी वो थे टूर्नामेंट के हीरो युवराज सिंह. एक समय टीम के बेस्ट मैच फिनिशर और कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी के सबसे पसंदीदा खिलाडी रहे युवराज पर चयनकर्ताओं की तलवार टी-20 विश्व के फाइनल से ही लटकने लगी थी. कैंसर को मात देकर क्रिकेट के मैदान में लौटे युवराज सिंह ने 293 वनडे में 8329 रन बनाए. लेकिन पिछले एक साल से टीम के साथ नहीं हैं. युवराज के नाम 111 विकेट भी हैं हालांकि इस बीच उनके टीम से निकलने के बाद से टीम को अभी तक सही विकल्प नहीं मिला है. रायडू, रहाणे और दूसरे खिलाड़ियों ने मिडिल ऑर्डर में अच्छी बल्लेबाजी करके उनकी वपासी की संभावना खत्म कर दी.

 

 

ज़हीर खान – 36 साल के ज़हीर खान बढ़ती उम्र और इंज्री के कारण पिछले 2 साल से टीम से बाहर रहे. 2011 विश्व कप के बाद से ही ज़हीर मैदान से ज्यादा डॉक्टरों के पास देखे गए. 2011 विश्व कप में 21 विकेट लेकर भारत को विश्व कप दिलाने वाले ज़हीर का करियर अब बस इस बात का इंतजार कर रहा है कि कब वो संन्यास की घोषणा करते हैं. उनके जाने के बाद से टीम में कई शानदार चेहरे आए जिनमें मोहम्मद शमी, भूवनेश्वर कुमार सबसे आगे हैं. ज़हीर ने 200 वनडे में 282 विकेट झटके.

 

 

हरभजन सिंह – भारत के सबसे सफल गेंदबाजों में से एक हरभजन सिंह 2011 विश्व कप के बाद से ही टीम से बाहर होने के कगार पर खड़े थे. भज्जी विकेट के लिए तरसते रहे और चयनकर्ता इसी उम्मीद में थे कि भज्जी एक बार फिर फॉर्म में आएंगे लेकिन आर अश्विन के प्रदर्शन ने इन्हें टीम से बाहर कर दिया. इस बीच कई बार राष्टीय मैचों के सहारे वापसी की उम्मीद तो कि लेकिन चयनकर्ताओं ने इन्हें नजरअंदाज कर दिया और अब हरभजन संन्यास की ओर बढ़ते दिख रहे हैं.

 

 

आशीष नेहरा – तीन विश्व कप खेलने वाले वाले नेहरा अब चयनकर्ताओं के लिए कोई अहमियत नहीं रखते. इसकी वजह उनका प्रदर्शन नहीं बल्कि इंज्री है. हर सीरीज में नेहरा इंज्री होते आए हैं और ये उनके खिलाफ गया. चैंपियन्स लीग में शानदार गेंदबाजी करने वाले नेहरा उस सीरीज में लय में दिख रहे थे लेकिन चयनकर्तओ ने उनपर ध्यान नहीं दिया. दस साल में 120 वनडे ही खेलने वाले नेहरा ने 157 विकेट लिए.

 

 

मुनाफ पटेल – एक समय भारत के सबसे तेज गेंदबाज होने का दर्जा पाने वाले मुनाफ सटीक लाइन लेंथ के लिए जाने जाते हैं लेकिन जुलाई 2011 के बाद से ही चयनकर्ताओं ने उनपर भरोसा दिखाना छोड़ दिया. 70 वनडे में 86 विकेट लेने वाले मुनाफ भी इंज्री के खासे परेशान रहे और इस बीच नए गेंदबाजों ने उनका स्थान ले लिया.

 

 

यूसुफ पठान – 2011 विश्व कप में टीम इंडिया के सदस्य रहे तेज हिट के लिए मशहूर यूसुफ पठान 2011 विश्व कप में टीम इंडिया के साथ थे. 2012 में अपना आखिरी अंतरराष्ट्रीय वनडे खेलने वाले पठान अपनी कमजोरी से पार नहीं पा पाए और चयनकर्ताओं ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया.

 

         

प्रवीण कुमार – गेंद को दोनों तरफ स्विंग कराने की महारत रखने वाले प्रवीण कुमार ने वनडे करियर की शानदार शुरुआत की थी लेकिन धीरे-धीरे वो अपनी गति को खोते चले गए साथ ही लगातार हुई इंज्री ने इन्हें टीम से बाहर रखा और इस बीच भुवनेश्वर कुमार और मोहम्मद शमी ने शानदार गेंदबाजी के दम पर खुद को टीम में स्थायी कर लिया और प्रवीण कुमार चयनकर्ताओं से दूर होते चले गए.

 

 

इनके अलावा दो और खिलाड़ी थे जिन्होंने 2011 विश्व कप में अपनी प्रतिभा दिखाई थी. जिनमें एस श्रीसंत को स्पॉट फिक्सिंग ने क्रिकेट से दूर कर दिया और दूसरे पीयूष चावला जो मैदान पर मौका मिलने के बाद भी अपना जलवा नहीं दिखा पाए. हालांकि चावला की वापसी की संभावना इन सबमें से ज्यादा है.

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