विश्व कप से पहले टीम इंडिया की 'अग्नि परीक्षा'

By: | Last Updated: Thursday, 29 January 2015 3:54 PM

नई दिल्लीः विश्व कप के शुरू होने में अब सिर्फ 15 दिन बचे हैं और विश्व कप की अपनी टीम को परखने के लिए टीम इंडिया के पास कल अंतिम मौका होगा. जब ऑस्ट्रेलिया में खेले जा रहे ट्राईसीरीज के ‘सेमीफाइनल’ कहे जाने वाले मैच में उसका सामना इंग्लैंड से होगा. इस मैच के सहारे टीम इंडिया हार को पीछे छोड़कर जीत की पटरी पर लौटने की कोशिश करेगी.

 

टीम इंडिया अगर कल इंग्लैंड को हरा देती है तो ट्राईसीरीज के फाइनल में उसका सामना ऑस्ट्रेलिया से होगा. कल होने वाले इस सेमीफाइनल सरीखे इस मैच में भारत को जीत दिलाने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी टीम इंडिया के कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी पर होगी.

 

विश्व कप से पहल धोनी को खिताब बचाने का पूरा भरोसा है लेकिन इसके लिए धोनी को जीत का तड़का लगाना होगा. साथ ही ये दिखाना होगा कि क्यों टीम इंडिया विश्व कप जीतने की प्रबल दावेदारों में से एक है.

 

ऑस्ट्रेलिया ट्राईसीरीज में 2 मैच हार चुकी टीम इंडिया का सामना कल पर्थ के तेज विकेट पर है. इंग्लैंड के तेज गेंदबाज भारत को इस सीरीज

में 153 रन पर ऑल आउट कर चुके हैं लेकिन धोनी की माने तो पर्थ के विकेट को लेकर ज्यादा चिंता की जरूरत नहीं है..

 

कोहली के बल्ले से निकलेगी जीत

 

विश्व कप और उससे पहले ट्राई सीरीज में भारत को अगर जीतना है तो विराट कोहली को रन बनाना होगा. ऐसा पहले भी हो चुका है कि जब टीम को सबसे अधिक जरूरत होती है तो कोहली के बल्लों से रनों की बारिश होती है. फिलहाल वो दो मैचों से रन नहीं बना पाए हैं लेकिन जब टीम पर प्रेशर आता है तो कोहली खुद फॉर्म में आ जाते हैं. इंग्लैंड के खिलाफ लड़ाई में उम्मीद है कि उनके बल्ले से रन निकलेंगे और टीम जीत की पटरी पर लौट आएगी..

 

कोहली पिछले एक साल से बेहतरीन फॉर्म में हैं. टीम के लिए उन्होंने सबसे ज्यादा रन बनाए है. लेकिन ऑस्ट्रेलिया में पहले दो वनडे में उनके रन नहीं हुए. हालांकि ऑस्ट्रेलिया की पिचों में टेस्ट सीरीज में 4 शतक लगाए थे जो उनके फॉर्म को दिखाता है. टीम के साथ-साथ फैन्स को भी उम्मीद है कि कोहली करो या मरो वाली इस लड़ाई में निराश नहीं करेंगे.

 

सलामी जोड़ी की समस्या

 

भारत की सबसे बड़ी चिंता उसकी ओपनिंग रही है. यही वजह है देश ही नहीं दुनिया भर से लोग टीम इंडिया को मुफ्त की सलाह दे रहे हैं. पर सच यही है कि विश्वकप से पहले शिखर धवन का फॉर्म में आना जरूरी है. धवन का बल्ला जब चलता है तो मैच का पासा पलट जाता है. पर शिखर धवन कुछ महीनों से फ्लॉप चल रहे हैं. पिछले एक साल में भारत से बाहर शिखर धवन ने 8 वनडे मैच खेले हैं जिसमें 28.85 की औसत से सिर्फ 202 रन ही बना पाए हैं.

 

आठ में से सात बार शिखर फ्लॉप रहे हैं. इसी वजह से भारत की ओपनिंग विश्वकप में सबसे खराब नजर आ रही है. रोहित शर्मा को टीम आराम करा रही है. ऐसे में शिखर धवन के पास अपने को साबित करने का एक मौका और है.

 

शिखर धवन को पहली बॉल से मारने की बजाए कुछ देर संभल कर खेलना होगा और फिर अपने नेचुरल गेम पर शिखर कभी भी लौट सकते हैं और जब लौटेंगे शिखर तो भारत को मैच जीतने से कोई रोक नहीं सकता.

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