1983 और 2003 की टीमों जैसी है 2015 वर्ल्ड कप में टीम इंडिया की बॉलिंग

By: | Last Updated: Saturday, 31 January 2015 6:22 AM

नई दिल्ली: हाल में टीम इंडिया अपनी गेंदबाज़ी की वजह से बहुत ज्यादा परेशानी में दिख रही है. साथ ही ट्राई सीरीज़ में बल्लेबाज़ी ने भी टीम के फैंस को वर्ल्ड कप से पहले खासा निराश कर दिया है. टीम इंडिया को अगर अपना वर्ल्ड कप खिताब बचाना है तो उसे खेल के हर क्षेत्र में खासा अच्छा प्रदर्शन करना होगा.

 

क्रिकेट विशेषज्ञों की नज़र में टीम इंडिया की गेंदबाज़ी लाईन अप में अनुभव की कमी खासी बड़ी वजह लग रही है.

 

लेकिन टीम इंडिया की हौसला अफज़ाई और फैंस के लिए हम आज 1983 की वर्ल्डकप विनिंग टीम और साल 2003 की वर्ल्ड कप फाइनल्स तक पहुंचने वाली टीम का बॉलिंग रिकॉर्ड लेकर आए हैं. जिससे वर्ल्ड कप से पहले भारतीय गेंदबाज़ी पर उम्मीदें बढ़ जाएंगी.

 

वर्ल्ड कप से ठीक पहले ट्राई सीरीज़ हारने के बाद टीम इंडिया के फैंस में वर्ल्ड कप को लेकर काफी निराशा है. लेकिन अभी भी टीम इंडिया के लिए देर नहीं हुई है क्योंकि साल 1983 और 2033 वर्ल्ड कप में देश को किताब दिलाने और फाईनल्स में पहुंचाने वाले गेंदबाज़ भी बिल्कुल युवा और नए थे जिन्होनें वर्ल्ड कप में देश को नई ऊंचाईयों तक पहुंचाया.

 

आईये एक नज़र डालते है 1983, 2003 और 2015 के गेंदबाज़ों पर.

 

रविंद्र जडेजा: साल 2015 वर्ल्ड कप में हिस्सा लेने जा रही टीम में सबसे ज्यादा मैच खेलने वाले गेंदबाज़ों में ऑल-राउंडर रविंद्र जडेजा हैं जिन्होनें 111 वनडे मैचों में 134 विकेट झटके हैं. जडेजा ने साल 2013 में इंग्लैंड में खेली गई चैंपियंस ट्रॉपी में टीम इंडिया के लिए धमाकेदार गेंदबाज़ी करते हुए टीम को चैंपियन बनाया था. जबकि साल 1983 में वर्ल्ड कप विनिंग टीम में सबसे ज्यादा मैच खेलने का अनुभव कप्तान कपिल देव को था और वर्ल्ड कप में जाने से पहले कपिल ने महज़ 34 विकेट झटके थे.

 

ईशांत शर्मा/उमेश यादव: टीम इंडिया की तेज़ गेंदबाज़ी की बागडोर इस बार ईशांत शर्मा के हाथों में होगी. ईशांत फिटनेस की वजह से ट्राई सीरीज़ में नहीं खेल पाए. लेकिन 76 मैचों के अनुभव के साथ टीम में सबसे आगे हैं. ईशांत ने भी वर्ल्ड चैंपियंस ट्रॉफी के फाईनल मुकाबले में टीम इंडिया को मैच जितवाया था. साथ ही ऑस्ट्रेलियाई सरज़मी पर उन्हें अच्छा अनुभव है और वो वहां की पिचों पर अच्छा उछाल भी हासलि कर सकते हैं. अगर इशांत अपनी पुरानी लय में दिखी तो देश के लिए ये शुभ संकेत होंगे.

 

वहीं उमेश यादव के पास 40 मैचों का अनुभव है लेकिन उनका असली हथियार  है उनकी गति. अगर वो विपक्षी टीमों के खिलाफ सही दिशा में गेंदबाज़ी करते हैं तो टीम लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं. वहीं वर्ल्ड कप 1983 में भारत के गेंदबाज़ मोहिंदर अमरनाथ को महज़ 21 मैचों का अनुभव था. उन्होनें वर्ल्ड कप से पहले महज़ 18 विकेट झटके थे. ईशांत शर्मा को टीम की गेंदबाज़ी लाईन अप की रीड़ बनना होगा.

 

स्टुअर्ट बिन्नी: वर्ल्ड कप में सलेक्शन के बाद बिन्नी को लेकर काफी विवाद रहा. लेकिन इस खिलाड़ी ने खुद की काबीलियत को ऑस्ट्रेलिया की पिचों में साबित करके दिखाया. कल के मुकाबले में बिन्नी ने शानदार गेंदबाज़ी करते हुए 3 विकेट झटके. वहीं साल 1983 में जो टीम वर्ल्ड कप में गई थी उसमें ऑल-राउंडर रवि शास्त्री ने वर्ल्ड कप से पहले महज़ 10 मैच खेले थे जिसमें उन्होनें 6 विकेट झटके थे. बिन्नी का प्रदर्शन वर्ल्ड कप में जाने से पहले शास्त्री से बेहतर ही है और वो शानदार फॉर्म में भी हैं.

 

भुवनेश्वर कुमार/ मौहम्मद शमी: टीम इंडिया के इस गेंदबाज़ से वर्ल्ड कप में देश को बहुत उम्मीदें हैंय अगर भुवी ने अपनी स्विंग का सही से इस्तेमाल किया तो वर्ल्ड कप में टीम इंडिया को बहुत फायदा मिलेगा. भुवनेश्वर कुमार ने अभी 44 मैच खेले हैं. साल 1983 की वर्ल्ड कप विनिंग टम का हिस्सा रहे मदनलाल ने भी साल 1983 में जाने से पहले महज़ 20 वनडे खेले थे जिसमें उन्होनें 23 विकेट झटके थे. देश इस बार भुवी से भी ऐसे ही प्रदर्शन की आशा करता है.

 

अश्विन, अक्षर पटेल: अश्विन और अक्षर पटेल दोनों ही टीम इंडिया के भरोसेमंद स्पिनर है. जहां अश्विन को 88 वनडे मैचों का अनुभव है तो वहीं अक्षर पटेल ने हाल में अच्छी गेंदबाज़ी करके टीम में अपनी जगह बनाई है. अगर ये दोनों गेंदबाज़ अपनी प्रतिभा मैदान पर दिखाने में कामयाब रहे तो टीम इंडिया वर्ल्ड कप में बेहतर प्रदर्शन करने में कामयाब रहेगी.

 

इन आंकड़ों के साथ ही हम आपके सामने 2003 विश्व कप के कुछ आंकड़े रख रहे हैं. इस विश्व कप में टीम इंडिया वर्ल्ड कप फाइनल तक पहुंची थी. इस दौरान भारत की तरफ से सबसे सफल गेंदबाज़ ज़हीर खान थे. उन्होनें 11 मैचों में 18 विकट झटके थे. 2003 विश्व कप में जब ज़हीर उतरे तब उन्हें महज़ 56 मैचों का अनुभव था. जबकि विश्व कप 2003 में शानदार प्रदर्शन करने वाले आशीष नेहरा ने भी वर्ल्ड कप में जाने से पहले महज़ 30 मैच खेले थे.

 

इसलिए टीम इंडिया के लिए विश्व कप के सभी रास्ते बंद नहीं हुए हैं. अगर टीम इंडिया दम लगाए तो विश्व का ताज बचा पाना मुश्किल नहीं होगा.

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Web Title: Team India-World Cup 2015_1983 World Cup_2003 World Cup_Bowling
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