क्या 1993 और 2001 की तरह एक बार फिर 'स्पिनर' दिलाएगा भारत को सीरीज़!

By: | Last Updated: Thursday, 27 August 2015 5:33 AM

नई दिल्ली/कोलंबो: पहला टेस्ट 63 रनों से हारने के बाद भारतीय टीम ने दूसरा टेस्ट जीतकर जिस तरह से कमबैक किया है उसमें बल्लेबाज़ों के साथ भारतीय गेंदबाज़ों का भी अहम योगदान है खासकर स्पिन गेंदबाज़ों का. भारतीय टीम ने पहले दो टेस्ट मैचों में श्रीलंकाई टीम के पूरे 40 विकेट चटकाए हैं. जिसमें से स्पिन गेंदबाज़ों ने 30 विकेट झटके हैं.

 

खासकर आर अश्विन, अश्विन ने इस पूरी सीरीज़ में बेहतरीन गेंदबाज़ी करते हुए 16.35 के बेहद शानदार औसत से 17 विकेट झटके हैं. अश्विन इस दौरे पर ज्यादा प्रभावी नज़र आ रहे हैं. अगर कल से एसएससी कोलंबो में शुरू होने वाले तीसरे और फाइनल टेस्ट में अश्विन अपनी छाप छोड़ने में सफल हो जाते हैं तो वो भी भारतीय क्रिकेट के इतिहास में अनिल कुंबले और हरभजन सिंह की तरह जीवंत हो जाएंगे.

 

भारत के महान स्पिनर अनिल कुंबले और हरभजन सिंह के जीवन में भी एक-एक ऐसा मौका ज़रूर आया है जब उन्होनें अपनी असली शक्ति को पहचाना और अपनी गेंदबाज़ी के दम पर भारतीय टीम को सीरीज़ जीत दिलाई. ऐसा ही कुछ मौका इस बार आर अश्विन के हाथ लगा है. 

 

याद रहे कि सन 1993 में इंग्लैंड क्रिकेट टीम भारत के दौरे पर आयी थी. यह सीरिज भारत के लिए खास मायने रखती थी क्योंकि भारत, दक्षिण अफ्रीका दौरे पर बहुत निराशाजनक प्रदर्शन करके लौटा था. लेकिन उस सीरिज में भारत की तरफ से कई खिलाड़ी स्टार प्लेयर बन उभरे थे. जिनमें अनिल कुंबले के बेहद खास थे. ऐसा पहला मौका था जब किसी भारतीय स्पिनर ने अपनी गेंदों की तेजीं से बल्लेबाजों को इतना परेशान कर दिया कि वर्ल्ड क्रिकेट में इसकी चर्चा हुई.

अनिल कुंबले उस सीरीज के तीन मैचों में बेहतरीन गेंदबाज़ी करते हुए 21 विकेट झटक लिए थे. जिसकी वजह से भारत ने इंग्लैंड को घरेलू ज़मीं पर धूल चटाई. इस खास कमाल के लिए कुंबले को ‘मैन ऑफ द सीरीज’ घोषित किया गया.

 

अपने पूरे करियर में कुंबले ने 132 टेस्ट मैच खेलते हुए लगभग 30 की औसत से 619 विकेट लिए थे जिसमें पारी में 5 विकेट 35 बार और पारी में 10 विकेट 8 बार लिए थे.

 

इस तरह का ही एक स्पेल भारतीय टीम के साथ इस समय भी मौजूद स्पिनर हरभजन सिंह के नाम रहा. भारत के दूसरे सबसे सफल स्पिनर हरभजन ने साल 2001 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ घरेलू मैदान पर कुछ ऐसा ही प्रदर्शन किया था. जिसमनें उन्होनें अपनी गेंदबाज़ी के दम पर ऑस्ट्रेलिया का सूपड़ा साफ कर दिया था. महज़ 3 मुकाबलों में भज्जी ने 17 के औसत से 32 विकेट झटक ऑस्ट्रेलिया को धराशायी कर दिया था.

 

इस सीरीज़ के लिए हरभजन सिंह को भी मैन ऑफ द सीरीज़ का अवार्ड दिया.

 

अगर आर अश्विन भी इस सीरीज़ के आखिरी बचे मुकाबले में बेहतरीन गेंदबाज़ी का अपना सिलसिला ज़ारी रखते हैं तो भारतीय टीम इस गेंदबाज़ के दम पर 22 साल बाद श्रीलंका में इतिहास रखेगी और एक बार फिर 1993 और 2001 के बाद भारतीय टीम किसी स्पिनर के दम पर विरोधी को धूल चटाएगी.

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Web Title: Team India_R Ashwin_Harbhajan Singh_Anil Kumble_
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