बिहार चुनाव में 'विजय फैक्टर': 'अभी यूं ही गाड़ी पर कपड़ा मार कर भीख मांगनी पड़ेगी बच्चे'

By: | Last Updated: Wednesday, 16 September 2015 12:10 PM
Vijay Factor: Bihar election reporting and analysis series by Vijay Vidrohi

पटना शहर पोस्टरों से पटा है. हर सड़क पर दोनों तरफ कतार में कभी मोदी तो कभी नीतीश कुमार के वायदे करते या एक दूसरे को गलियाते हुए देख जाते हैं. कहीं लाल बत्ती पर गाड़ी रुके और आप आसपास नजर दौड़ाएं तो आंखे दर्द करने लगती है बड़े बड़े पोस्टर देख कर. दोनों दलों के कुछ ऐसे पोस्टर भी हैं जिसमें मोदी और नीतीश आसमान की तरफ अंगुली किए हुए हैं.

 

एक चौराहे पर ट्रैफिक जाम के समय ऐसे दो पोस्टरों पर नजर पड़ी तो पोस्टरों का पोस्टमार्टम करने का मन लगा. अब दोनों नेता आसमान की तरफ क्या इशारा कर रहे हैं. क्या दोनों हवा हवाई बाते कर रहे हैं…क्या दोनों आसमान से तारे तोड़ लाने की बात कर रहे हैं या फिर दोनों नेता आम जनता को फर्श से उठाकर अर्श पर ले जाने के प्रति वास्तव में गंभीर हैं. अंतिम फैसला तो उस जनता को करना है जो रोजमर्रा की तकलीफों से ही दोचार हो रही है. बीजेपी जीती तो बिहार की जनता को सवा लाख करोड़ रुपये के साथ साथ चालीस हजार करोड़ की पुरानी योजनाओं का लाभ मिलेगा. अगर नीतीश जीते तो पांच सालों में बिहार की जनता पर दो लाख 70 हजार करोड़ रुपये खर्च करेंगे.

 

मान लीजिए कि नीतीश जीत गये तो बिहार की जनता को चार लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का विकास काम देखने को मिलेगा. भारत सरकार की सालाना आय 15 लाख करोड़ रुपये है यानि एक चौथाई बिहार पर खर्च होगा.

 

इस सुखद कल्पना को चौंका दिया एक बच्चे ने जो गाड़ी की खिड़की के शीशे के बाहर से निरीह नजरों से निहार रहा था. अभी चुनाव चल रहा है बच्चे , अभी घोषणाओं के लडडू खाओ , अभी नीतीश अंकल और मोदी अकंल के पास तुम्हारे लिए सोचने के लिए वक्त नहीं है , अभी तुम्हे इंतजार करना पड़ेगा बच्चे. यूं ही गाड़ी पर कपड़ा मार कर भीख मांगनी पड़ेगी बच्चे. श्रीकांत वर्मा की मगध सीरीज पर लिखी कविताओं में से एक याद आ गयी.

मगध में शोर है कि

मगध में शासक नहीं रहे

जो थे

इस लायक नहीं रहे कि उन्हे हम

मगध का शासक कह सकें……..

यही शोर है

अवन्ति में

कोसल में

कि शासक नहीं रहे ,

जो थे

इस लायक नहीं रहे कि उन्हे हम

शासक कह सकें.  

तो क्या करें….

मित्रों

दो ही रास्ते हैं

दुर्नीति पर चले

नीति पर बहस

बनाए रखें .

दुराचरण करें

सदाचार की चर्चा चलाए रखें

असत्य कहें

असत्य करें

असत्य जिएं

सत्य के लिए

मर मिटने की आन नहीं छोड़े.

मित्रों ,

एक तीसरा रास्ता भी है

मगर वह

मगध , अवन्ती कोसल होकर नहीं जाता.

 

तीसरा रास्ता का वास्ता हर दल देता है , तीसरे रास्ते की तरफ इशारा भी करता है लेकिन नीति दुर्नीति के फेर में ही पड़ जाता है चुनाव जीतने के बाद भी , चुनाव हारने के बाद भी. तीसरे रास्ते की तलाश में चला आया हूं पटना के मौर्य चौक पर. इस चौक पर मेला लगता है रोज शाम. लोग आते हैं , खाते पीते हैं , घूमते हैं , फिरते हैं , कुछ आते है खाते पीतों को देखने के लिए. यहीं एक चाय की दुकान है. दुकान क्या थड़ी जैसी है. वहां की चाय पीना जरुरी है अगर आप मोर्य चौक जाते हैं. हमने भी पी. वहीं दो नवयुवक मिल गये. दोनों बैंक में काम करते हैं. दोनों बिहार के ही हैं. दोनों कहने लगे कि पोस्टरों के जरिए , पैकेज के जरिए राजनीति कर रहे हैं मोदी और नीतीश. दोनों को लगता है कि युवा वर्ग को नौकरी चाहिए जिसे न तो नीतीश दे पा रहे हैं और न ही मोदी.

 

राजेश पढ़ते हैं और दिल्ली जाकर आईएएस की तैयारी करना चाहते हैं. राजेश कहते हैं कि मोदी को आर्थिक सुधार पर जोर देना चाहिए था , बिहार जीतने पर नहीं. लेकिन उनके साथ आए युवक का मानना है कि मोदी ही बिहार को बदल सकते हैं लिहाजा इस बार बीजेपी की सरकार बनना बिहार के लिए जरुरी है.

 

चौक के पास ही एक युवा दंपत्ति मिले. पति से पूछा कि किसका पैकेज कितना अच्छा है तो वह बोले कि कन्फयूज हूं , तय नहीं कर पा रहा हूं. लेकिन पत्नी मानस बना चुकी थी. कहने लगी कि नीतीश कुमार ने उतना नहीं किया जितना वह गाना गा रहे हैं. एक अन्य जोड़ा मिला जो नीतीश के काम से खुश तो था लेकिन वोट देगा मोदी को. कारण पूछा तो जवाब मिला कि दिल मांगे मोर. दिल्ली में मोदी , पटना में मोदी होंगे तो डबल मिलेगा. विकास की लत जो नीतीश कुमार ने डाली वह लत अब जी का जंलाल तो नहीं बनने जा रही.

मौर्य़ चौक पर जूतों के शो रुम के मालिक मिले. खुद को मोदी का समर्थक बताते हैं लेकिन बिहार में त्रिशंकु सरकार की आशंका उन्हे सता रही है. कहने लगे कि मोदी का पैकेज देने का अंदाज पसंद नहीं आया. आगे बताते हैं कि नीतीश कुमार के लिए लालू की लालटेन थामना जरुरी था नहीं तो वोट बैंक के अंधेरे में खो जाते. दो बार पूछने पर भी नहीं बताया कि इस बार वोट किसे देंगे.

 

एक से पूछा कि मोदी के नाम पर वोट देंगे या नीतीश के नाम पर…जवाब मिला कि इस बार लोग उम्मीदवार को भी देखेंगे , सिर्फ मोदी या नीतीश के नाम पर वोट नहीं गिरेगा. और क्या जाति भी देखी जाएगी…..इस पर जवाब माइक हटाने के बाद मिला. अब अपनी ही जाति का नेता विकास करे तो ज्यादा बेहतर होगा.

Sports News से जुड़े हर समाचार के लिए हमे फेसबुक, ट्विटर, गूगल प्लस पर फॉलो करें साथ ही हमारा Hindi News App डाउनलोड करें
Web Title: Vijay Factor: Bihar election reporting and analysis series by Vijay Vidrohi
Explore Hindi News from politics, Bollywood, sports, education, trending, crime, business, साथ ही साथ और भी दिलचस्प हिंदी समाचार
First Published:

Related Stories

टेनिस: सिनसिनाटी ओपन के क्वार्टर फाइनल में कोंटा
टेनिस: सिनसिनाटी ओपन के क्वार्टर फाइनल में कोंटा

बासिल: ब्रिटेन की स्टार महिला टेनिस खिलाड़ी योहाना कोंटा ने सिनसिनाटी ओपन टेनिस टूर्नामेंट के...

ENGvsWI: कुक और रूट के शतकों से पहले दिन इंग्लैंड मजूबत
ENGvsWI: कुक और रूट के शतकों से पहले दिन इंग्लैंड मजूबत

बर्मिंघम: पूर्व कप्तान एलिस्टेयर कुक और मौजूदा कप्तान जो रूट की शानदार शतकों की मदद से...

श्रीलंका के खिलाफ वनडे सीरीज से पहले धोनी ने नेट्स में दिखाया दम
श्रीलंका के खिलाफ वनडे सीरीज से पहले धोनी ने नेट्स में दिखाया दम

दाम्बुला: 20 अगस्त को श्रीलंका के खिलाफ शुरु...

'यो-यो' से हारे टीम इंडिया के युवराज
'यो-यो' से हारे टीम इंडिया के युवराज

नई दिल्ली: कैंसर को मात देकर क्रिकेट के मैदान पर वापसी करने वाले टीम इंडिया के सिक्सर किंग...

Get the Latest Coupons and Promo codes for 2017