व्यक्ति विशेष: “आप” का विश्वास! एक कवि की कहानी!

By: | Last Updated: Sunday, 5 April 2015 9:35 AM

किसी जमाने में दीवानगी और पागलपन की बातें करने वाला एक कवि आज खुद को गंभीर राजनेता के तौर पर पेश करने की कोशिश में जुटा है. पेशे से प्रोफेसर, स्वभाव से कवि और अब राजनेता के नए अवतार में कुमार विश्वास ने कामयाबी की एक लंबी छलांग लगाई है. अरविंद केजरीवाल के बाद आम आदमी पार्टी का सबसे चमकदार चेहरा बनकर उभरे कुमार विश्वास की कहानी में यूं तो कामयाबी के कई सूरज चमकते नजर आते हैं लेकिन उनकी इस कहानी में विवादों के कुछ दाग भी शामिल रहे हैं.

 

आम आदमी पार्टी की तरह ही उसके नेता कुमार विश्वास की राजनीतिक पारी भी अभी नई है लेकिन कुमार विश्वास की ऑनलाइन टिप्पणियां उनके और उनकी पार्टी के लिए मुफ्त की मुसीबत साबित होती रही है. लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोप में कुमार विश्वास के खिलाफ जहां मुकदमे दर्ज होते रहे हैं वहीं नरेंद्र मोदी की तारीफ के चलते उनकी राजनीतिक निष्ठा पर भी सवाल खड़े हो चुके हैं. एक कवि के तौर पर कुमार विश्वास के अतीत ने राजनेता के तौर पर उनके वर्तमान को लगातार सवालों के कटघरे में खड़ा रखा है और यही वजह है कि वो आम आदमी पार्टी के दूसरे सबसे विवादित नेता बन चुके हैं.

 

दरअसल एक अंग्रेजी अखबार के मुताबिक लोकसभा चुनाव के दौरान अमेठी में कुमार विश्वास के रहते हुए उनको लेकर शिकायत की गई थी. व्यक्ति विशेष में आज हम आपको बताएंगे क्यों एक ईमेल के चलते एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं कुमार विश्वास. साथ ही पड़ताल इस बात की भी करेंगे कि कैसे 15 बरस की उम्र से कविता पाठ करने वाले कुमार विश्वास ने सीख लिया राजनीति का मुश्किल पाठ. 

यूं तो आम आदमी पार्टी में पिछले एक महीने से सत्ता की जंग भड़की रही है. पार्टी का झगड़ा खुलकर सड़क पर आ चुका है और केजरवाल के स्टिंग भी. लेकिन इन सब के बाद अब एक ईमेल को लेकर आम आदमी पार्टी में विवाद छिड़ा है और इस बार पार्टी की अंदरुनी जंग की जद मे आ गए है कुमार विश्वास. आखिर क्यों आम आदमी पार्टी के बागी नेताओं के निशाने पर केजरीवाल के बाद अब आ गए है कुमार विश्वास बताएंगे आपको आगे लेकिन उससे पहले सुनिए कहानी ईमेल की.

 

कुमार विश्वास को लेकर अंग्रेजी अखबार में एक खबर छपी है जिसकी चर्चा ट्विटर पर भी हुई. खबर के मुताबिक लोकसभा चुनाव के दौरान अमेठी में कुमार विश्वास के रहते हुए उनको लेकर शिकायत की गई थी. ये शिकायत अजय वोहरा नाम के एक शख्स ने अरविंद केजरीवाल से 23 दिसंबर 2014 को सुबह 11.28 बजे ईमेल के जरिये की थी.

 

इस ईमेल का ब्योरा हम आपको नहीं दिखा रहे हैं क्योंकि शिकायतकर्ता सामने नहीं आया है लेकिन इस ईमेल पर अरविंद केजरीवाल समेत आम आदमी पार्टी के तमाम बड़े नेताओँ ने अपनी राय और जांच की बात लिखी है. शिकायतकर्ता अजय वोहरा के उस ई-मेल पर अरविंद केजरीवाल ने 23 दिसंबर 2014 को दोपहर 3 बजकर 4 मिनट पर कुमार विश्वास से पूछा है कि-  इस पर आपका क्या कहना है.

 

इस पर कुमार विश्वास ने भी उसी दिन शाम 5 बजे अपना जवाब भेजा जिसमें उन्होंने लिखा कि –

 

प्रिय अरविंद,

“श्री वोरा कौन हैं और इस प्रकार के मेल से उनका क्या आशय है मैं नहीं जानता ? किंतु अरविंद के प्रशान उठाने का निराकरण होना जरूरी है. क्योंकि इसमें लगाए गए आरोपों में कोई ऐसा नहीं है जिसका उत्तर या तो मेरे पीएसी के साथियों सूचित हो या उन्हें ज्ञात न हो.“ 

 

इस पूरे ईमेल मामले में शिकायतकर्ता अजय वोहरा सामने नहीं आए हैं. इसीलिए पार्टी जांच के लिए तैयार नहीं है.

 

आम आदमी पार्टी में छिड़ी आर-पार की जंग के बीच विरोधी खेमा अब ईमेल मामले को हवा देकर कुमार विश्वास के जरिए केजरीवाल पर निशाना साधने की कोशिश में है. क्योकि कुमार विश्वास आम आदमी पार्टी का चर्चित चेहरा हैं औऱ पार्टी के स्टार प्रचारक भी है. उन्हें केजरीवाल का संकटमोचक और करीबी सहयोगी भी माना जाता है. और केजरीवाल के साथ कुमार विश्वास के ऐसे संबंधों की नींव उस वक्त पड़ी थी जो वो अन्ना हजारे के आंदोलन में शरीक हुए थे.  

 

कुमार विश्वास की ये तस्वीरें साल 2011 की हैं जब अन्ना हजारे का भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन अपने पूरे चरम पर था. हांलाकि इस वक्त तक कुमार विश्वास गीत और कविता की दुनिया में अपना नाम कमा चुके थे लेकिन देश ने अन्ना के आंदोलन के दौरान पहली बार एक ऐसा चेहरा देखा जो मंच से आंदोलन के गीत गाकर युवाओं को आंदोलित कर रहा था. 

 

अन्ना हजारे के मंच से लोगों के दिलो दिमाग में आंदोलन की अलख जगाने की जिम्मेदारी कुमार विश्वास को सौंपी गई थी और एक कवि के तौर पर जब कुमार बोलने के लिए खड़े होते थे तो मैदान तालियों की आवाज से गूंज उठता था. अन्ना आंदोलन के दौरान ही केजरीवाल, किरन बेदी, प्रशांत भूषण और मनीष सिसौदिया जैसे लोगों के बीच टीम अन्ना के एक अहम सदस्य के तौर पर कुमार विश्वास भी अपनी जगह बना चुके थे. यही वजह थी की जहां कही भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना हजारे का मंच सजता उस मंच पर कुमार विश्वास भी नजर आते थे. 

कुमार विश्वास की देशप्रेम से भरी कविताओं ने उन्हें अन्ना के मंच पर अहम जगह दिलाई थी लेकिन इसी दौरान कई विवाद भी उनके पीछे पड़े रहे. अन्ना आदोंलन के दौरान अक्टूबर 2011 में कुमार विश्वास ने चिट्टी लिख कर टीम अन्ना को भंग करने की मांग की थी. इसके बाद जब अरविंद केजरीवाल ने राजनैतिक पार्टी बनाने का ऐलान किया तो इससे से किनारा करने वालों में कुमार विश्वास भी सबसे आगे थे हांलाकि बाद में वो अपनी बात से पलट गए थे.

 

कुमार विश्वास ने कहा. ‘मैंने कहा राजीनि के लिए जिस मस्तिष्क चाहिए मैं उस मस्तिष्क का व्यक्ति नही हूं. मैं कवि हूं दिल का आदमी हूं दिल से सोचता हूं भावनाओं का आदमी हूं जो मुंह मां आता है वो बोल देता हू.’

 

अरविंद केजरीवाल के साथ कुमार विश्वास पहली बार अन्ना के मंच पर नजर आए थे लेकिन वो इससे काफी पहले 2006 में ही केजरीवाल के संपर्क में आ गए थे. कुमार विश्वास को केजरीवाल के नजदीक लानें में उस वक्त उनके बचपन के दोस्त मनीष सिसौदिया ने अहम भूमिका निभाई थी. दरअसल मनीष सिसोदिया और कुमार विश्वास बचपन के दोस्त है और उन्होनें गाजियाबाद के पिलखुवां में एक ही स्कूल में पढ़ाई की थी. 44 साल के कुमार विश्वास का जन्म भी पिलखुवा के इसी घर में हुआ था.

 

कुमार विश्वास के पिता डॉ चंद्रपाल शर्मा बताते हैं, ‘सबसे प्यारा 5 भाई बहनों में सबसे छोटा 3 बड़े भाई है एक बहन है इसलिए उसे खूब प्यार मिला खेल कूद में अपना रहा मस्ती काटी पढ़ने में बहुत तेज रहा थ्रो आफट फर्स्ट क्लास रहा है.’

 

कुमार विश्वास ने स्कूल की पढ़ाई भी गाजियाबाद के पिलखुवा में ही पूरी की थी. पिलुखुवा के सर्वोदय इंटर कॉलेज में जब कुमार विश्वास पढाई कर रहे थे इसी दौरान उनकी दोस्ती दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया से हुई थी. कुमार विश्वास के स्कूल टीचरआज भी उन्हें एक ऐसे स्टूडेंट के तौर पर याद करते हैं जो वाद- विवाद प्रतियोगिता में अपनी तर्कशक्ति से सुनने वालों को मंत्रमुग्ध कर दिया करता था.

 

कुमार विश्वास के स्कूल टीचर मदन पाल सिंह सिसोदिया बताते हैं, ‘सांस्कृति कार्यक्रम में बढ़ चढ कर हिस्सा लेता था और खास कर डिबेट में तो ये किसी भी टापिक पर इसे बोलने के लिए दे दे तो ये फर्स्ट आता था. ऐसी डिबेट में भी जिसमें टापिक तुरंत दिया जाता है. जिसमें तुरंत बोलना होता है ऐसी भी कई प्रतियोगिताएं हमारे यहां आयोजित हुई उसमें भी इसने पहला स्थान प्राप्त किया.’

कुमार विश्वास के स्कूल टीचर का कहना है, ‘कुमार विश्वास हमारे विद्यायल के प्रथम बैच के छात्र रहे हैं और बहुत ही तेज तर्रार कुशाग्र बुद्धि मेहनती छात्र रहे. 15 अगस्त 26 जनवरी या और ऐसे समय पर. अन्य गतिविधियों में वो हिस्सा लेते थे. विशेषकर जो देशभक्ति के प्रोग्राम होते थे. उन प्रोग्राम में उनकी विशेष रुचि रहती थी. …और उनकी जो क्लास टीचर होती थी उनसे इस तरह के सवाल वो करते रहते थे. जो आम तौर पर उस उम्र का बच्चा नहीं कर पाता था. ये भी क्या कम है कि आज भी इतने सारे बच्चों के बीच कुमार विश्वास की छवि मेरी आखों के सामने है.’

 

स्कूल की डिबेट में नंबर वन आने वाले कुमार विश्वास गाने बजाने में भी अव्व्ल रहते थे. कम उम्र में ही अपनी बातों और तर्कों से लोगों को लाजवाब कर देने वाले कुमार विश्वास को लड़ाई-झगड़े से बेहद डर लगता था. उनके पिता चंद्रपाल शर्मा शहर के कॉलेज में पढ़ाते थे लिहाजा घर का माहौल भी बेहद संयमित और साहित्यिक था. घर में फिल्मी बातों के लिए कोई जगह नहीं थी लेकिन परिवार के ये सारे बंधन कभी कुमार विश्वास के पांव बांध नहीं सके. 

 

कुमार विश्वास के भाई विकास शर्मा बताते हैं, ‘कुमार बचपन से हिंदी मूवी देखने का बड़ा शौकीन था. हमारे घर में पढाई का माहौल था हमारे पिताजी कॉलेज में प्रोफेसर थे. एचओडी थे हम सब लोग पढ़ने में रुचि रखते थे. पर वो अक्सर पढाई के समय क्लास बंक करके पिक्चर देखने चले जाया करता था. मैं और हमारी सिस्टर जो आजकल मोदीनगर में हिंदी विभाग में प्रोफेसर है हम दोनों बढे परेशान रहते थे कि ये पिक्चर देखकर आएगा पापा की डांट लगेगी. ये जब घर में घुस रहा होता था तो गाने गा रहा होता था फिल्म के. उससे हम आइडिया लगा लिया करते थे कि ये वाली फिल्म देखी उसने. इस तरह उसकी बचपन की आदत थी मूवी देखना कविताएं पढना हरिवंश राय बच्चन की मधुशाला. कामायनी और आसूं इस तरह की चीजों में उसकी ज्यादा रुचि थी.’

 

घर के साहित्यिक माहौल ने कुमार विश्वास के सीने में कविता के बीज कब बो दिए खुद उनको भी इस बात का पता नहीं चला. लेकिन उनके बड़े भाई विकास शर्मा बताते है कि जब वो दसवीं क्लास मे पढ़ रहे थे तब से उन्होनें मंच पर कविता पाठ करना शुरु कर दिया था. श्रंगार रस के कवि माने जाने वाले कुमार विश्वास के पहली बार सार्वजनिक मंच पर कविता पाठ करने की कहानी भी बेहद दिलचस्प है.

 

कुमार विश्वास के भाई विकास शर्मा बताते हैं, ‘1988-89 की बात है. मैं अनूप शहर के डिग्री कॉलेज में लेक्चरर था. वहां एक कार्यक्रम था. वहां के जो आयोजक थे मेरी एक विर्धार्थी थी उसके पिता थे. उसने मुझसे कहा कि हिरओम पवार वहां का संचालन कर रहे हैं. मुझे वहां बोलने का मौका दे दीजिए. मैंने उन्हें पत्र लिखा कि मेरा छोटा भाई है श्रगार रस का बहुत अच्छा कवि है आप उसको बोलने का मौका दे. ये वहां गया इसे कविता पाठ का मौका मिला. उसे वहां 101 रुपये ईनाम मिला 89-90 में. और वहां से ये हरिओम पवार की नजर में एक कवि के रुप में स्थापित हुआ. फिर हरिओम पवार इसे अन्य कार्यक्रम में आमंत्रित करने लगे और फिर धीरे धीरे लोग इसे आमंत्रित करने लगे और इसी रुचि बढी और ये कविता करने लगा.’

 

बचपन से ही तेज दिमाग रहे कुमार विश्वास की याददाश्त भी उतनी ही जबरदस्त रही है. यहीं वजह है कि उनके पिता चाहते थे कि वो भी अपने बड़े भाई की तरह इंजीनियरिंग की पढ़ाई करे और इंजीनियर बने. गाजियाबाद के पिलखुवा कस्बे के एक मामूली से शर्मा परिवार की पांचवी संतान हैं कुमार विश्वास. कुमार विश्वास ने जब इंजीनियरिंग की पढ़ाई अधूरी छोड़ने का फैसला किया था तब डिग्री कॉलेज में प्रोफेसर उनके पिता को बेहद निराशा हुई थी. कविताओं के पीछे भागने वाले कुमार ने इंजीनियरिंग की छोड़कर जब बीए करने की इच्छा जाहिर की तो नाराज पिता ने इसकी फीस उन्हें खुद ही जुटाने का फरमान सुना दिया था.

 

बीए पास करने के बाद भी जब अंग्रेजी और हिंदी में से किसी एक को चुनने का विकल्प कुमार विश्वास के सामने आया तो उन्होंने हिंदी को गले लगा लिया और फिर वो देखते ही देखते हिंदी के एक मशहूर कवि बन गए.

 

विकास शर्मा, कुमार विश्वास के भाई बताते हैं, ‘मैंने इसका प्रवेश सागर विश्व्सविद्य़ाल में करा दिया था एम ए अंग्रेजी में. मैं उस समय एम फिल कर रहा था लेकिन इसका मन हिंदी साहित्य में था. फीस मैने जमा करा दी थी. उसके बाद भी उसने कहा कि मैं अंग्रेजी में नहीं करुंगा. मेरी रुचि हिंदी में है और फिर वो गाजियाबाद में एम ए हिंदी करने आया. एम ए हिंदी में टाप किया. और नेट पास करने के बाद ये राजस्थान के एक कॉलेज में प्रोफेसर हो गया. इसकी रुचि साहित्य में ज्यादा थी.’

 

विकास शर्मा बताते हैं कि बचपन से ही कुमार विश्वास का परंपराओं को तोड़ने में यकीन था. वो बने बनाए ढर्रे पर चलने की बजाए अपनी अलग राह बनाने में भरोसा रखते थे और उनकी इसी सोच का एक नतीजा ये भी था कि उन्होंने अरेंज मैरिज करने की बजाए लव मैरिज की थी. कुमार विश्वास का कवि मन भी उनकी इसी सोच का नतीजा है.

 

कोई दीवाना कहता है कोई पागल समझता है. जैसी कविता से युवाओं के दिलों में जगह बनाने वाले कुमार विश्वास आज देश के सबसे महंगे मंचीय कवि बन चुके हैं. हिंदी और ऊर्दू या किसी भी भाषा का कवि तीन घंटे के कवि सम्मेलन के लिए चार लाख रुपये मांगने के बारे में शायद सोच भी नहीं सकता है लेकिन कुमार विश्वास जहां कवि सम्मेलन में अपनी टोयोटा इनोवा कार से जाते हैं और वो एपल मैकबुक का इस्तेमाल भी करते हैं.

 

साल 2010 में जब अन्ना हजारे के आंदोलन की नींव तैयार हो रही थी तब इस आंदोलन से युवाओं को जोड़ने का जिम्मा कुमार विश्वास को सौंपा गया था लेकिन आंदोलन के साथ – साथ कुमार विश्वास का कद भी बढ़ता चला गया. अन्ना आंदोलन ने कुमार विश्वास को एक साधारण कवि से सेलेब्रेटी बना दिया. 2010 तक वो एक कवि सम्मेलन में भाग लेने के लिए 40 से 50 हजार रुपये लिया करते थे. लेकिन अन्ना आंदोलन के बाद उनके भाव आसमान पर जा पहुंचे अन्ना आंदोलन के महत्व को अपने करियर में कुमार विश्वास ने भी कुबूल किया है. उनका कहना है कि अन्ना आंदोलन से पहले मुझे केवल युवा ही कवि के रुप में पहचाना करते थे आंदोलन से जुड़ने के बाद मुझे और ज्यादा लोग पहचानने लगे.

 

अन्ना आंदोलन से पहले ही कुमार विश्वास हिंदी के एक कवि के तौर पर स्थापित हो चुके थे. युवाओं के बीच कविता प्रेम जगाने के लिए उन्होने कॉलेजों में जा जाकर कवि सम्मेलन करना शुरु कर दिया था. उनका पहला आयोजन साल 2002 में एनआईटी दिल्ली में हुआ था जहां उन्होने अपनी कविता कोई दीवाना कहता है कोई पागल समझता है सुनाई थी.   

 

युवाओं के साथ उन्हीं की भाषा में बात करना उनके जैसे ही कपड़े पहनना, उन्हीं की तरह बोलने जैसी खासियतों ने कुमार विश्वास को युवाओं के बीच लोकप्रिय बना दिया. कुमार विश्वास युवाओं की तरह ही तकनीक का भी भरपूर इस्तेमाल करते हैं. वो ट्विटर औऱ यू ट्यूब पर भी मौजूद रहते हैं. गूगल पर उनके नाम का सर्च करने पर 11 लाख तीस हजार रिजल्ट सामने आते हैं. वो शायद हिंदी के पहले कवि हैं जिन्होंने अपना बिजनेस मैनेजर और ब्रांड मैनेजर भी रखा. कुमार विश्वास के प्रशंसकों में फिल्मकार अनुराग कश्यप, क्रिकेटर सुरेश रैना और अभिनेता शेखर सुमन जैसे बडे नाम शामिल हैं. कुमार विश्वास इकलौते कवि हैं जो कारपोरेट शो में बुलाए जाते हैं और जापान, वियतनाम, न्यूजर्सी समेत दुनिया के कई देशों में वो शो भी करते हैं.

 

कुमार विश्वास प्रेम रस के कवि माने जाते हैं लेकिन अन्ना हजारे के आंदोलन ने उन्हें निडर और बेबाक भी बनाया है. इसी तरह जहां कुमार विश्वास को उनके कविता पाठ ने शोहरत दिलाई वहीं विवादों से भी उनका नाता जुड़ता रहा है. अन्ना आंदोलन के दौरान भी उन पर मंच से भड़काने वाले बयान देने के आरोप लग चुके है.  

 

कवि के तौर पर कुमार विश्वास की ऑनलाइन टिप्पणियां से उपजे विवाद भी लंबे समय से उनका पीछा करते रहे हैं. चाहे इमाम हुसैन पर दिया उनका बयान हो या फिर दक्षिण भारत की नर्सों पर उनकी टिप्पणी. सोशल वेबसाइट पर भी कुमार विश्वास के बयानों को लेकर खूब हंगामा मचता रहा है.

 

कुमार विश्वास ने कहा था, ‘पहले नर्सें जो हैं वो केरल से आती थीं… तो मुंह से सिस्टर निकलता था अंदर से आवाज आ जाती थी कि हाय अल्लाह सिस्टर ही हो. बहुत सारी लड़कियां इसलिए प्रोफाइल पर फोटो लगाती ही नहीं है.’

साल 2009 में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के कवि सम्मेलन में पहुंचे कुमार विश्वास का वीडियों भी सोशल साइट पर वाइरल हो चुका है. इस कवि सम्मेलन में वो नरेंद्र मोदी की तारीफों के पुल बांधते नजर आए हैं यही वजह है कि इस वीडियो के सामने आने के बाद से उनकी राजनीतिक निष्ठा को लेकर भी तमाम सवाल खड़े होते रहे हैं.

 

कुमार विश्वास ने कहा था, ‘निगाह उट्ठे तो सुबह हो झुके तो शाम हो जाए. अगर तु मुस्कुरा भर दे तो कत्लेआम हो जाए. देखो इन्होंने कत्लेआम पर तालियां बजा दी मीडिया वाले काट के कह सकते हैं कि कत्लेआम की बात हुई तो मोदी मुस्कुराए…. निगाह उठे तो सुबह हो . वो तो जुगाड़ में ही बैठे हैं कि ऐसा कुछ हो तो हम काटें बाइठ. अरे वो दीपक मेरा दोस्त कहता है कि यार वो कुछ बोलते नहीं हैं. बोलते नहीं हैं तब तो इतने दस्त हैं तुम्हें बोलें तो पता नहीं क्या करोगे तुम. मैं बता रहा हूं आपको मोदी जी आपका भविष्य उज्जवल है. आप दिल्ली में तो बैठोगे ही. वो तो मुझे पता है. लेकिन ऐसा कहा जाता है कि कवि की जिव्हा पर 24 घंटे में एक बार सरस्वती बैठती है. शायद ईश्वर करे मां करे. इस क्षण मेरी जिव्हा पर सरस्वती बैठी हो.’

 

कुमार विश्वास इस बारे में सफाई देते हुए बाद में कहा, ‘2009 में नरेंद्र मोदी के कवि सम्मेलन में उनकी तारीफ की और वो एक शुभ अवसर था तो वो एक सामान्य बात है. तब तक राजनीति में कोई बैटरमैंट था नहीं. मुझसे आप कहिए मैं स्वीकर कर रहा हूं कि हमारे भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह. को सासंद बनाने में एक वोट मेरी भी है.’

 

कुमार विश्वास की कविताओं ने जहां उन्हें शोहरत दिलाई है वहीं उनके सामनें मुश्किलें भी खड़ी करती रही है. कुमार विश्वास ने कौरवी लोक गीतों लोकचेतना विषय पर पीएचडी की औऱ उन्होंने राजस्थान में लेक्चरर  की पोस्ट पर 1994 में काम करना शुरू किया. उसके बाद वो कई कालेजों में पढा़ते रहें . लेकिन कुमार विश्वास की पहचान प्रोपफेसर से ज्यादा एक कवि के तौर पर ही रही है . खासतौर पर उनकी कविताएं युवाओं में काफी लोकप्रिय हैं लेकिन अन्ना हजारे के मंच पर जव वो एक कवि के तौर पर प्रकट हुए थे तो उसके बाद उनके लिए राजनीति के दरवाजे भी खुल गए थे. लेकिन आम आदमी पार्टी  के स्ंथापक सदस्य कुमार विश्वास को एक राजनेता के तौर पर शोहरत उस वक्त मिली जब वो 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के खिलाफ अमेठी से चुनाव मैदान में कूद खड़े हुए.

 

वीओ 22-आम आदमी पार्टी के मंच के मास्टर कुमार विश्वास नें जब कांग्रेस के दूसरे सबसे बड़े नेता और प्रधानमंत्री पद के दावेदार को चुनाव में चुनौती दी तो उनके इस राजनीतिक प्रोत्साहस को देखकर हर कोई हैरान रह गया था.

 

सादगी की दुहाई देने वाले आम आदमी पार्टी के नेता कुमार विश्वास जब लखनऊ से 25 लाख  की एसयुवी में सवार होकर अमेठी के लिए रवाना हुए थे तो उनके साथ दूसरी पार्टियों की तरह दर्जन भर गाड़ियों का काफिला शामिल था. लेकिन अमेठी के रास्ते में जगदीशपुर पहुंचते ही उन्हें काले झंडे दिखाए गए. जब वो और आगे बढे तो उनपर स्याही और अंडे फेंके गए कुमार विश्वास का काफिला जब अमेठी पहुंचा तो उस पर पत्थरबाजी शुरू हो गई थी. लेकिन इन हालात से जूझने के बाद भी वो अमेठी के मंच पर हाजिर हो गए थे.

 

इधर दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार कांग्रेस की मदद से चल रही थी और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल अपने लोकलुभावन वादों को दनादन लागू करने में जुटे थे. और उधर अमेठी में कुमार विश्वास राहुल गांधी के खिलाफ चुनाव मैदान में ताल ठोक रहे थे. दरअसल आम आदमी पार्टी ने विश्वास को राहुल के खिलाफ इसलिए अमेठी सीट से मैदान में उतारा था क्योंकि केजरीवाल पर बीजेपी कांग्रेस की बी टीम होने का आरोप लगा रही थी.

 

2013 दिल्ली में केजरीवाल के सरकार बनने से पहले ही कुमार विश्वास इशारों इशारों में कह चुके थे कि वो अमेठी से चुनाव लड़ना पंसद करेंगे लेकिन केजरीवाल के मुख्यमंत्री पद के शपथ लेने के बाद से ही उनके गांधी परिवार के खिलाफ हमले और तेज हो गए थे.

 

कुमार विश्वास का अमेठी से कोई सीधा नाता नहीं था लेकिन अमेठी पर निशाना इसलिए क्योंकि अमेठी से गांधी परिवार का लगातार नाता बना था संजय गांधी औऱ राजीव गांधी इसी सीट से चुनाव जीते और सोनिया गांधी के बाद राहुल गांधी भी इसी सीट से दो बार चुनाव जीत चुके थे. राहुल अक्सर अमेठी का दौरा करते हैं उनकी बहन प्रियंका भी इस इलाके में आती रहीं हैं ऐसे में कुमार विश्वास ने अमेठी से चैलेंज देकर कांग्रेस और राहुल गांधी को भौचक्का कर दिया.

 

दरअसल आम आदमी पार्टी राजनीति में बड़े प्रतीकों की अहमयित को खूब समझती है वो राजनीति में प्रतीकों को बनाती औऱ ध्वस्त करती रही है. 2013 के दिल्ली चुनाव में केजरीवाल ने शीला दीक्षित को करपेशन का प्रतीक बनाकर न सिर्फ प्रचार किया बल्कि खुद भी शीला दीक्षित के खिलाफ चुनाव मैदान में उतर गए थे और उन्होंने शीला दीक्षित को हराया भी था. लेकिन आम आदमी पार्टी ने जीत की इस कहानी को जब कुमार विश्वास 2014 में लोकसभा चुनाव में दोहराने के लिए अमेठी पहुंचे थे तो उनके नसीब में हार आई थी,

 

राहुल गांधी के खिलाफ अमेठी में लोकसभा का चुनाव कुमार विश्वास बुरी तरह हार गए थे लेकिन इसके बावजूद भी उनके हौसले पस्त नहीं हुए. वो पार्टी के स्टार प्रचारक भी बने रहे और साथ में आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल के संकटमोटक भी.

 

साल 2015 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में अरविंद केजरीवाल के बाद आम आदमी पार्टी के दूसरे स्टार प्रचारक कुमार विश्वास ही थे . दिल्ली विधान सभा चुनाव के जंग में वो केजरीवाल के साथ कंधे से कंधा मिलाए खड़े नजर आए और जब आम आदमी पार्टी  पार्टी ने योगेद्र यादव और प्रशांत भूषण जैसे वरिष्ठ नेताओं ने बगावत का बिगुल फूंका तो वो विरोधी गुट के सामने केजरीवाल की ढाल बनकर खड़े हो गए.

 

एक कवि से राजनेता तक कुमार विश्वास ने लंबा सफर तय किया है. कभी कवियों के साथ नजर आने वाले कुमार अन्ना के मंच पर भी दिखे. अरविंद केजरीवाल ने जब आम आदमी पार्टी बनाई तो उन्होंने भी राजनीति की दुनिया में कदम रख दिया. 2014 के लोकसभा चुनाव में जब आम आदमी पार्टी ने उन्हें अमेठी से राहुल गांधी के मुकाबले में उतारा तो उनकी शोहरत मानों रातो रात आसमान चूमने लगी थी लेकिन उसी अमेठी में उनके खिलाफ शिकायत का जो ईमेल सामने आया है उसने उन्हें एक बार फिर विवादों में ला खड़ा किया है. एक कवि के तौर पर कुमार का विश्वास कभी डिगा नहीं है लेकिन जो बातें अब सामने आ रही है क्या उसकी आंधी में कुमार विश्वास का विश्वास कायम रह सकेगा.

 

व्यक्ति विशेष: कुमार विश्वास- एक कवि की कहानी 

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Web Title: Vyakti Vishesh: Kumar Vishwas
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