‘मांकडिंग’ की मदद से वेस्टइंडीज अंडर-19 क्वार्टर फाइनल में

West Indies beat Zimbabwe in controversial fashion

चटगांव: अंडर 19 विश्व कप में खेले गए बेहद तनावपूर्ण मैच में वेस्टइंडीज ने आज जिम्बाब्वे को दो रनों से हरा दिया. लेकिन इस जीत से ज्यादा वेस्टइंडीज टीम की जम कर आलोचना हो रही है. वेस्टइंडीज ने तनावपूर्ण परिस्थितियों में विवादास्पद ‘मांकड़िंग’ का सहारा लेकर जिम्बाब्वे पर दो रन से जीत दर्ज करके क्वार्टर फाइनल में जगह बना ली.

जिम्बाब्वे के सामने 227 रन का लक्ष्य था और आखिरी ओवर में उसे केवल तीन रन की दरकार थी और उसका केवल एक विकेट बचा था. ऐसे में वेस्टइंडीज के मध्यम गति के गेंदबाज कीमो पाल ने 50वें ओवर की पहली गेंद पर रिचर्ड नगरावा को गेंद पड़ने से पहले रन लेने के लिये आगे बढ़ने की सजा रन आउट (मांकड़िंग) के रूप में दे दी. नगरावा का बल्ला लाइन पर था लेकिन वह खुद आगे बढ़ चुके थे. दोनों मैदानी अंपायरों ने वेस्टइंडीज से पूछा कि क्या वे अपील को कायम रखना चाहते हैं और जब यह पुष्टि हो गयी कि वह अपील जारी रखेंगे तो उन्होंने तीसरे अंपायर से यह जानना चाहा कि क्या बल्लेबाज का बल्ला केवल लाइन पर था. तीसरे अंपायर ने बल्लेबाज को आउट दे दिया क्योंकि यह नियमों के अनुरूप था. इससे जिम्बाब्वे का अभियान भी थम गया. दोनों टीमों को क्वार्टर फाइनल में पहुंचने के लिये इस मैच में हर हाल में जीत दर्ज करनी थी.

इससे पहले वेस्टइंडीज ने पहले बल्लेबाजी का न्यौता मिलने पर नौ विकेट पर 226 रन बनाए थे. उसकी तरफ से शैमर स्प्रिंगर ने सर्वाधिक 61 रन बनाये जबकि सलामी बल्लेबाज गिडरोन पोप (30) और टेविन इमलाच (31) ने पहले विकेट के लिये 42 रन जोड़कर टीम को अच्छी शुरूआत दिलायी थी. जिम्बाब्वे की तरफ से रूगारे मागरिरा ने 48 रन देकर तीन और वेस्ले मेडेवर ने 48 रन देकर तीन विकेट लिए. जिम्बाब्वे ने नियमित अंतराल में विकेट गंवाये लेकिन शॉन सिंडर (51) के अर्धशतक तथा एडम कीफ (43) और जेरेमी इवेस (37) की उपयोगी पारियों से वह लक्ष्य के करीब पहुंच गया था.

वेस्टइंडीज के लिए तेज गेंदबाज अलजारी जोसेफ ने 30 रन देकर चार विकेट लिए. उन्हें मैन ऑफ द मैच चुना गया.

क्या है मांकड़िंग –

जब कोई बोलर अपने रन-अप के दौरान गेंद फेंकेने से पहले नॉन स्ट्राइकर बल्लेबाज को आउट करने की कोशिश करता है तो उसे मांकड़िंग कहते हैं.

भारतीय खिलाड़ी के नाम पर पड़ा नाम – 

यह नाम भारत के महान लेफ्ट आर्म स्पिनर वीनू मांकड़ के नाम पर दिया गया है. मांकड़ ने 1947 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एक मैच में पहली बार किसी बल्लेबाज को इस तरह आउट करने की कोशिश की थी.  मांकड़ के इस कदम की काफी आलोचना हुई थी और इसे खेल भावना के खिलाफ बताया गया था.

 

आईसीसी ने दी है मंजूरी – 

मांकड़ से जुड़ी उस घटना के 70 साल बाद आईसीसी ने इसकी पुष्टि की .  इस संसोधन के मुताबिक, ‘बोलर गेंद फेंकने से पहले, नॉन स्ट्राइकर बल्लेबाज को आउट करने की कोशिश सकता है.’ आईसीसी की यह अनुमति 8 जुलाई से लागू हुई थी.

क्या कह रहे हैं लोग –

 

 

 

 

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