गोल्ड मेडल की हैट्रिक पर है योगेश्वर की निगाह

By: | Last Updated: Monday, 13 October 2014 10:11 AM
yogeshwar dutt

नई दिल्ली: एशियाई खेलों में 28 साल बाद गोल्ड मेडल जीतने वाले पहले भारतीय पहलवान योगेश्वर दत्त खुद पर से एक बड़ा दबाव समाप्त करने के बाद अब रियो ओलंपिक तक गोल्ड मेडल की हैट्रिक पूरी करने के लक्ष्य के साथ अभ्यास कर रहे हैं. योगेश्वर ने इंचियोन एशियाई खेलों के 65 किग्रा भार वर्ग में गोल्ड मेडल जीता जो 1986 के बाद किसी भारतीय पहलवान का इन महाद्वीपीय खेलों में पहला सोने का तमगा है. उनसे पहले सोल एशियाई खेलों में करतार सिंह ने गोल्ड मेडल जीता था. उनका लक्ष्य अब अगले साल विश्व चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर ओलंपिक खेलों के लिये क्वालीफाई करना और फिर रियो में भी सोने का तमगा जीतना है.

 

लंदन ओलंपिक में ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाले योगेश्वर ने कहा, ‘‘मैं अब केवल रियो ओलंपिक के लिये ही अभ्यास कर रहा हूं. मुझे अगले साल विश्व चैंपियनशिप में भाग लेना हैं और मैं वहां गोल्ड मेडल जीतने की कोशिश करूंगा. इसके बाद रियो ओलंपिक में भी मैं अपने पदक का रंग बदलने की कोशिश करूंगा. ’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैंने इन तीन गोल्ड मेडलों को अपना लक्ष्य बनाया था. इसमें मैं अपने पहले लक्ष्य में सफल रहा हूं. अब मैं अपनी कमजोरियों को दूर करने पर ध्यान दे रहा हूं. मेरी दोनों पिंडलियों में समस्या थी. मैं नहीं चाहता कि वह मुझे आगे परेशान करे. इसके अलावा मैं अपने रक्षण और आक्रमण दोनों को थोड़ा धीमा करना चाहता हूं. ’’

 

इंचियोन से पहले ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में भी गोल्ड मेडल जीतने वाले योगेश्वर ने स्वीकार किया कि ओलंपिक में दो बार पदक जीतने वाले सुशील कुमार की अनुपस्थिति के कारण एशियाई खेलों में उन पर काफी दबाव था. उन्होंने कहा, ‘‘मैंने अच्छी मेहनत की थी. खुद की मेहनत काफी मायने रखती है और इसलिए मुझे विश्वास था लेकिन सुशील की अनुपस्थिति के कारण मुझसे काफी अपेक्षाएं थी और इसलिए मुझ पर दबाव भी था. हमने 86 के बाद गोल्ड मेडल नहीं जीता था, यह बात भी दिमाग में थी लेकिन इन सब चीजों ने मेरे लिये सकारात्मक काम किया. ’’

 

योगेश्वर ने माना कि वजन वर्ग में बदलाव से उन्हें फायदा मिला. वह पहले 60 किग्रा वर्ग में लड़ते थे लेकिन अब वह 65 किग्रा में उतरते हैं. उन्होंने कहा, ‘‘मुझे यह वजन वर्ग भा रहा है. पहले मुझे काफी वजन कम करना पड़ता था लेकिन अब ऐसा नहीं है. ’’ इस स्टार पहलवान ने इसके साथ ही कहा आगे कभी ऐसी नौबत नहीं आनी चाहिए जबकि एशियाई खेलों में भारतीय पहलवानों को गोल्ड मेडल के लिये 28 साल का इंतजार करना पड़े. योगेश्वर ने कहा, ‘‘हमारे पास अच्छे युवा पहलवान हैं. मैं चाहता हूं कि अब प्रत्येक एशियाई खेल में भारत कम से कम एक गोल्ड मेडल जरूर जीते. हमें अभी से ऐसे प्रयास करने चाहिए कि भविष्य में हमें इतना लंबा इंतजार नहीं करना पड़े.’’

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