जहां की मिट्टी लगाने से ठीक होता है गठिया रोग!

जहां की मिट्टी लगाने से ठीक होता है गठिया रोग!

By: | Updated: 01 Jan 1970 12:00 AM

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<b>बांदा:
</b>बुंदेलखंड की धरती पर कई
देवी-देवताओं के स्थान हैं और
उनसे जुड़ी लोगों की आस्थाएं
भी अलग-अलग हैं. इन्हीं में से
एक है हमीरपुर जनपद के झलोखर
गांव में भुवनेश्वरी देवी का
अनूठा स्थान जहां न मंदिर है
और न कोई मूर्ति. नीम के पेड़
के नीचे एक भारी-भरकम टीले पर
विराजमान इस देवी स्थान के
बारे में लोगों का मानना है
कि यहां की मिट्टी लगाने
मात्र से गठिया रोग ठीक हो
जाता है. <br /><br />वैसे तो
बुंदेलखंड की सूखी की धरती पर
लोकी दाई, हरसोखरी दाई, चिथरी
दाई, कथरी दाई, भुइयांरानी,
काली दाई, पचनेरे बाबा,
बरियार चौरा, कंडहा बाबा,
मदना बाबा जैसे सैकड़ों
देवी-देवताओं के देवस्थान
हैं जिनसे ग्रामीणों की ही
नहीं, शहरी लोगों की भी आस्था
जुड़ी है.<br /><br />कई ऐसे देवस्थान
हैं जिनके बारे में लोगों का
मानना है कि यहां आने से तमाम
गंभीर बीमारियां ठीक होती
हैं. झलोखर गांव के
भुवनेश्वरी देवी के टीले पर
चढ़ौना के रूप में कोई प्रसाद
नहीं चढ़ाया जाता, लेकिन यहां
रविवार को भक्तों की भीड़ जमा
होती है. ज्यादातर भक्त गठिया
रोग से पीड़ित होते हैं. <br /><br />लोगों
का मानना है कि एक नीम के
पुराने पेड़ के नीचे
विराजमान भुवनेश्वरी देवी
स्थान के टीले की मिट्टी
लगाने मात्र से गठिया बीमारी
जड़ से दूर हो जाती है. देवी का
पुजारी मिट्टी के बर्तन
बनाने वाले कुम्हार बिरादरी
से ही नियुक्त करने की
परम्परा है. <br /><br />पुजारी
कालीदीन प्रजापति ने बताया
कि गठिया से पीड़ित दूर-दूर
के लोग यहां रविवार को आते
हैं. इसी गांव के निर्भयदास
प्रजापति ने बताया, 'सालों
पहले गांव के प्रेमदास
प्रजापति को देवी मां ने
स्वप्न में कहा था कि उनका
स्थान मिट्टी का ही यानी
कच्चा रहेगा, ताकि गठिया रोग
से पीड़ित लोग अपने बदन में
इसे लगा कर चंगा हो सकें.'<br /><br />सन्
1875 के गजेटियर में कर्नल टाड
ने लिखा है, 'इस देवी स्थान के
पास के तालाब की मिट्टी में
गंधक और पारा मौजूद है जो
गठिया रोग को ठीक करने में
सहायक होता है.'<br /><br />बांदा के
अतर्रा स्थित राजकीय
आयुर्वेदिक कॉलेज एवं
चिकित्सालय के प्राचार्य डॉ.
एस.एन. सिंह का कहना है कि
मिट्टी में औषधीय तत्व हैं और
नीम में तमाम आसाध्य
बीमारियों को ठीक करने की
क्षमता होती है, यही वजह है कि
इस स्थान की मिट्टी लगाने से
गठिया रोगियों को फायदा होता
है.<br /><br />अतर्रा डिग्री कॉलेज
के संस्कृत विभाग के पूर्व
विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्ण दत्त
चतुर्वेदी बताते हैं कि
संस्कृत साहित्य के हिंदी
रूपांतरित ग्रंथ 'मां
भुवनेश्वरी महात्म्य' के
अनुसार यह स्थान उत्तर
वैदिककालीन माना गया है और
तालाब सूरज कुंड के नाम से
विख्यात था.<br /><br />पिछले रविवार
को इस स्थान पर पहुंचे गठिया
रोग से पीड़ित सुल्तानपुर की
रामश्री, प्रतापगढ़ की
रामप्यारी और शाहजहांपुर की
भगवनिया ने बताया कि वे यहां
तीसरी-चौथी बार आए हैं,
उन्हें काफी आराम मिला है.<br /><br />झलोखर
गांव के जागेश्वर ने बताया कि
यहां लगातार पांच रविवार तक
आकर टीले की मिट्टी लगाने से
गठिया बीमारी जड़ से खत्म हो
जाती है.<br />
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