भगवान परशुराम ने चलाई थी कांवड़ की परंपरा

भगवान परशुराम ने चलाई थी कांवड़ की परंपरा

By: | Updated: 01 Jan 1970 12:00 AM

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<b>मुजफरनगर:</b>
भगवान परशुराम ने अपने
आराध्य देव शिव के नियमित
पूजन के लिए पुरा महादेव में
मंदिर की स्थापना कर कांवड़
में गंगाजल से पूजन कर कांवड़
परंपरा की शुरुआत की जो आज भी
देशभर में काफी प्रचलित है.
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यहां के पंडित विनोद पाराशर
ने कहा कि कांवड़ की परंपरा
चलाने वाले भगवान परशुराम की
पूजा भी श्रावण मास में की
जानी चाहिए.<br /><br />उन्होंने
बताया कि भगवान परशुराम
श्रावण मास के प्रत्येक
सोमवार को कांवड़ में जल ले
जाकर शिव की पूजा-अर्चना करते
थे.
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शिव को श्रावण का सोमवार
विशेष रूप से प्रिय है.
श्रावण में भगवान आशुतोष का
गंगाजल व पंचामृत से अभिषेक
करने से शीतलता मिलती है. <br /><br />पंडित
विनोद पाराशर ने बताया कि
भगवान शिव की हरियाली से पूजा
करने से विशेष पुण्य मिलता
है. खासतौर से श्रावण मास के
सोमवार को शिव का पूजन
बेलपत्र, भांग, धतूरे,
दूर्वाकुर आक्खे के पुष्प और
लाल कनेर के पुष्पों से पूजन
करने का प्रावधान है. इसके
अलावा पांच तरह के जो अमृत
बताए गए हैं उनमें दूध, दही,
शहद, घी, शर्करा को मिलाकर
बनाए गए पंचामृत से भगवान
आशुतोष की पूजा कल्याणकारी
होती है.<br /><br />भगवान शिव को
बेलपत्र चढ़ाने के लिए एक दिन
पूर्व सायंकाल से पहले
तोड़कर रखना चाहिए. पंडित
पाराशर ने सोमवार को बेलपत्र
तोड़कर भगवान पर चढ़ाने को
गलत बताया. उन्होंने भगवान
आशुतोष के साथ शिव परिवार,
नंदी व भगवान परशुराम की पूजा
को भी श्रावण मास में लाभकारी
बताया. <br /><br />शिव की पूजा से
पहले नंदी व परशुराम के पूजन
की महत्ता पर प्रकाश डालते
हुए उन्होंने कहा कि शिव का
जलाभिषेक नियमित रूप से करने
से वैभव और सुख समृद्धि की
प्राप्ति होती है.<br />
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