महाकुंभ में एक लाख तंबूओं का अलग शहर

By: | Last Updated: Tuesday, 29 January 2013 10:23 PM
महाकुंभ में एक लाख तंबूओं का अलग शहर

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<b>इलाहाबाद:</b>
कुंभ मेले के लिए इलाहाबाद
में तंबुओं का अलग शहर बस गया
है. यहां तंबूओं के करीब एक
लाख घर सजाए गए हैं.  <br /><br />इतनी
बड़ी संख्या में तंबू और
इसमें इस्तेमाल होने वाले
रोजमर्रा के सारे सामान मेला
प्रशासन को ठेकेदार लल्लू जी
मुहैया कराते हैं.<br /><br />इलाहाबाद
में संगम की रेती पर लगने
वाले आस्था के सबसे बड़े मेले
के लिए तंबुओं का अलग शहर
बसाया गया है. करीब 58 वर्ग
किलोमीटर के दायरे में फैली
इस अनूठी नगरी में तंबूओं के
करीब एक लाख घर सजाए गए हैं.<br /><br />इन
तंबुओं में सोने के लिए
चारपाई, उनके बिस्तर, कुर्सी-
मेज समेत रोजमर्रा के सारे
सामान मौजूद होते हैं. मेला
प्रशासन को ये सारे चीजें और
तंबू सामानों के ठेकेदार
लल्लू जी मुहैया कराते हैं<br /><br />हालांकि
मेला-प्रशासन ठेके पर सप्लाई
के लिए हर मेले में टेंडर
निकालता है, लेकिन देश में
दूसरा ऐसा कोई ठेकेदार नहीं
है जो पूरा का पूरा शहर बसाने
का सामान सप्लाई कर सके इसलिए
हर मेले का कॉन्ट्रेक्ट
हमेशा लल्लू जी को ही मिलता
है.<br /><br />मेले में 90 फीसदी से
ज्यादा तंबुओं,
बांस-बल्लियों, पंडाल को
घेरने के लिए टिन, चारपाई,
बिस्तर, कुर्सी- मेज, दरवाजे,
दरी, कालीन समेत तमाम दूसरे
सामानों की सप्लाई लल्लूजी
ही करते हैं.<br /> <br />मेले से जुड़े
अफसरों के मुताबिक लल्लूजी
के बिना मेला बसाने की कल्पना
ही नहीं की जा सकती है. कुंभ
में सरकारी शिविरों में लगने
वाले सामानों के किराए के तौर
पर प्रशासन कम से कम 12 करोड़
लल्लू जी को देगा.<br /><br />कुंभ
मेले में करीब पांच हज़ार
सरकारी शिविर लगते हैं.
सरकारी विभागों के अलावा
लल्लू जी दूसरी संस्थाओं को
भी तंबू और दूसरे सामान किराए
पर मुहैया कराते हैं.<br /><br /><br />
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