जानें: ट्रैवेल एजेंट, वेटर और फिर ज्वैलरी बेचते-बेचते कैसे बॉलीवुड सुपरस्टार बन गए अक्षय कुमार

By: | Last Updated: Monday, 22 September 2014 8:53 AM
How Middle class man Akshay Kumar became a Bollywood superstar!

नई दिल्ली: एक कहावत है कि समय बदलते देर नहीं लगती. सच ही तो है तभी तो एक आम इंसान जिसने कभी ट्रेवेल एजेंसी में काम किया, ज्वैलरी बेची, लाइट ब्वॉ का काम किया वो आज बॉलीवड का खिलाड़ी और सुपरस्टार है. जी हां, हम बात  कर रहे हैं अभिनेता अक्षय कुमार की. जिंदगी किसी को कहां से कहां ले जा सकती है इसका अच्छा उदाहरण देखना है तो आप अक्षय कुमार की लाइफ को देख सकते हैं. आपको बता दें कि अक्षय अब तक करीब 120 फिल्मों में काम कर चुके हैं.

 

अनुपम खेर शो कुछ भी हो  सकता है में अनुपम खेर से बात करते हुए अक्षय ने अनपी जिंदगी के कई मजेदार और कई गमगीन बातें शेयर कीं. साथ ही अक्षय ने यह भी बताया कि दिल्ली के एक मीडिल क्लास फैमिली में एक साधारण जीवन जीते हुए अक्षय कुमार कैसे बॉलीवुड के सुपरस्टार बन गए.

 

पढाई में जीरो थे अक्षय-

बात अगर एजुकेशन से शुरू की जाए तो जैसे ही पढ़ाई के बारे में अक्षय से पूछा गया उनका मुंह ही बंद हो गया. उनका कहना था, “मैं लोगों को गलत उदाहरण नहीं देना चाहता. लोगों को इतना पढ़ लेना चाहिए कि वे अंग्रेजी में बात कर सकें,  इतिहास की थोड़ी बहुत जानकारी हो जाए, हिंदी आती हो, दो दुनी चार आती हो. मैंने इतनी पढाई कर ली थी. उससे आगे नहीं पढ़ पाया. क्योंकि मुझे पढ़ने का शौक नहीं था. किताबों को देखते ही नींद आ जाती थी.”

 

ऐसा होता है कि अगर बच्चे का मन पढाई लिखाई में ना लगे तो पैरेंट्स उन्हें मारपीट कर या फिर जबरदस्ती पढाने की कोशिश करते हैं लेकिन अक्षय के साथ ऐसा कुछ नहीं हुआ. अक्षय के फादर उनसे कहते थे कि बस इतना पढ़ लो कि किसी के सामने खड़े होकर बात कर सको. अक्षय बताते हैं, “ मेरे फादर स्पोर्ट्स में मेरा सपोर्ट करते थे. वे बॉलीबॉल खेलते समय आते थे. वे मुझे समझते थे. किसी के पिता जी खेलते समय नहीं आते थे. लेकिन मेरे पिता जी ‘वॉटर ब्वॉय’ का काम करते थे. अपोजिट टीम वालों को भी पानी पिलाते थे. उन्होंने मुझे किसी काम में रोका टोका नहीं. हर किसी को मेरे जैसा पिता जी मिलें.”

 

बैंकॉक जाकर की वेटर की नौकरी-

अक्षय ने 12वीं की पढाई करने के बाद बैंकॉक चले गए. वहां पर वे मार्शल आर्ट सीखने के लिए गए थे. हालांकि बैंकॉक के लिए 22 हजार की टिकट के लिए भी उनके पिता जी ने लोन लिया था.

 

अक्षय ने बैंकॉक में अपने काम के बारे में बात करते हुए बताया, “मेट्रो गेस्ट हाउस में वेटर की नौकरी मिल गई थी. वहां पर एक छोटा सा घर था जिस पर पांच-छ: लोग रहते थे. सुबह सारा दिन काम करते थे और शाम को बॉक्सिंग सीखते थें.” अक्षय यहां पर चार पांच साल रहे.

 

ट्रैवेल एजेंसी में भी काम किया-

शुरूआत में अक्षय कुमार ने कोलकाता में ट्रेवेल एजेंसी में भी काम किया था. वहां पर अक्षय का काम पी फार्म भरना, वीजा लेकर आना, टिकट लाना था. उसके बाद अक्षय ने दिल्ली से कुंदन की ज्वैलरी लाकर मुंबई में बेचने का काम किया था. उनको लगता था कि कुछ भी काम मिल जाए वो ठीक है. उनका कहना है कि कोई भी कहता था कि यह काम कर लो पांच-छ: हजार का फायदा हो जाए तो वही कर लेता था. उस समय अक्षय की सबसे बड़ी चुनौती सर्वाइव करना था.

 

…जब चंबल के डाकुओं ने लूट लिया अक्षय का सामान-

एक बार की घटना का जिक्र करते हुए अक्षय ने बताया कि वे ‘फ्रंटीयर मेल’ से शॉपिंक करके मुंबई से निकले. अक्षय फैशन स्ट्रीट से चार पांच हजार का सामान लेकर निकले. चंबल में उनके डिब्बे में डाकू आ गए. अक्षय उस समय सोते हुए सब देख रहे थे उन्होंने बताया, “वे सबका सामान उठा रहे हैं. कुछ देर में वे मेरे पास भी आए और मेरा सामान भी उठा लिया. मैं सोए-सोए रो रहा हूं. लेकिन अगर उठ जाता तो वे मुझे भी गोली मार देते. वे सामान के साथ-साथ चप्पल भी ले गए.” इसके बाद अक्षय की हालत ऐसी थी कि वे बिना चप्पलों के दिल्ली रेलवे स्टेशन पर उतरे.  

 

पहला असाइमेंट-

पहली बार अक्षय को एक असाइमेंट मिला. उस समय अक्षय 6 हजार कमाते थे. इस असाइमेंट के बाद उन्हें 21 हजार रूपये मिल गए फिर उन्हें लगा कि ये बेस्ट काम है. फोटो खिचाओं, अच्छी-अच्छी लड़कियां मिल जाएंगी और साथ में ज्यादा पैसे भी. बस इनको अपनी सेहत बना के रखनी थी.

 

लाइट ब्वॉय की तरह काम किया-

उसके बाद अक्षय ने फोटोग्राफर जय सेठ के साथ लाइट ब्वॉय की तरह काम किया. इस दौरान गोबिंदा, जैकी श्रॉफ, संगीत बिजलानी और रेखा जैसे सितारों के लिए काम किया. उस समय अक्षय कुमार के मन में यह बात आ गया था कि छोटे मोटे, सपोर्टिंग रोल मिल जाए. लेकिन कभी यह नहीं सोचा था कि लीड रोल मिल जाए. जैसा कि अनुपम खेर से बात करते हुए अक्षय कहते हैं, “ अब थोड़ा बहुत आ गया था कि मैं कोशिश कर सकता हूं, कोशिश मतलब हीरो नहीं..कुछ छोटा मोटा मिल जाए..खड़ा कर दो पीछे..”

 

हालांकि इस काम के दौरान गोबिंदा ने एक बार अक्षय को कहा था, “बड़ा चिकना है तू हीरो क्यों नहीं बनता.”

 

जहां पर फोटो नहीं खिचा सके आज वहीं पर है अक्षय का घर

उसके बाद जय सेठ ने अक्षय का पोर्टफोलियो बनाया था. अक्षय ने बताया कि यह पोर्टफोलियो फ्री में जय सेठ बना रहे थे. अक्षय कहते हैं, “जिस दीवार पर चढ़कर मैं पोर्टफोलियों के लिए फोटो खिंचवा रहा था उसी समय चौकीदार आकर बोला, “नीचे उतरो, यहां नहीं, यह प्राइवेट जगह है.” यह इत्तेफाक की बात है कि आज मेरा घर उसी जमीन पर उसी दीवार के पास है. ये नहीं कि बदले की भावना के साथ, लेकिन ये इत्तेफाक ही है.”

 

कैसे चमकी किस्मत-

एक मॉडलिंग असाइमेंट के लिए अक्षय को बैंगलोर जाना था और उन्होंने समय को समझने में गलती हो गई. अक्षय को सुबह 6 बजे जाना था और उन्होंने शाम 6 बजे समझ लिया था इस वजह से उनकी फ्लाइट छूट गई. शाम को अक्षय टहलते हुए करीब पांच बजे मद्रास स्टुडियो पहुंचे. वहां पर मेकअप मैंन हरेंद्र दादा ने पूछा, “हीरो बनना है?” और कहां कि दादा को दिखाकर आता हूं. दादा ने अंदर बुलाया. हीरो बनने के लिए पूछा और तुरंत ही एक 5001 रूपये का चेक साइन किया. दादा ने कहा कि आपके साथ तीन फिल्में बनाऊंगा. और ये भी इत्तेफाक ही था कि 6 बजे थे. इसके बाद मैंने कभी पीछे मुड़ के नहीं देखा.”

 

लोगों ने बी एक्टर भी कहा-

एक्टर्स की लाइफ भले ही देखने मे अच्छी लगे लेकिन इन्हें कई सारे कठिन हालात का सामना भी करना पड़ता है. एक समय ऐसा भी था कि लोग अक्षय को सी ग्रेड और बी ग्रेड एक्टर कहते थे. इसके बारे में बताते हुए अक्षय कहते हैं,  “लोग मुझे बी ग्रेड एक्टर कहते थे लेकिन मेरे लिए फिल्म करना ही बुहत बड़ी बात थी. कहीं ना कहीं कुछ ना कुछ होता गया और मैं ए प्लस एक्टर बन गया. आज मैं  प्रोड्यूसर भी बन गया.”

 

यहां पर क्लिक करके देखें अक्षय कुमार के साथ बातचीत का पूरा अंश-