क्या भारत के ‘ओबामा’ बन पाएंगे मोदी?

By: | Last Updated: Monday, 20 January 2014 10:46 AM

नरेंद्र मोदी के भाषण से पहले हैदराबाद में चर्चा पांच रुपये के टिकट की थी लेकिन रैली खत्म होने के बाद मोदी का नया नारा देश ही नहीं विदेशों में भी चर्चा का विषय बन जाएगा. 

मोदी ने YES WE CAN का नारा दिया और YES WE CAN के साथ जोड़ा YES WE WILL DO. ‘यस वी कैन’ का नारा अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने 2008 के राष्ट्रपति चुनाव में दिया था. इस नारे के जनक ओबामा नहीं है लेकिन YES WE CAN मशहूर तब हुआ जब ओबामा ने इसे अपने चुनाव प्रचार का हिस्सा बनाया था. नतीजा सामने आया ओबामा को मिली जीत के तौर पर. अब ओबामा दूसरी बार चुनाव जीतकर अमेरिका में राष्ट्रपति की कुर्सी पर कब्जा जमा चुके हैं लेकिन बड़ा सवाल यही है कि क्या भारत के लिए ओबामा बन पाएंगे मोदी.

 

ओबामा YES WE CAN नारे के सहारे पहली बार सत्ता में आए थे और अमेरिका को पहला अश्वेत राष्ट्रपति मिला था. अब ये कहना मुश्किल है कि मोदी ने ये नारा ओबामा को मिली जीत का नतीजा देखकर उधार लिया है या फिर ये देश के राजनितिक, आर्थिक और सामाजिक हालात पर एकदम सटीक बैठता है. देश के इतिहास में शायद ही ऐसा कभी हुआ हो कि किसी नेता ने दूसरे देश के नेता से नारा उधार लिया हो लेकिन मोदी ने ऐसा करके एक नया अध्याय जोड़ दिया है.

 

अब सवाल उठता है कि मोदी को ऐसा करने की जरूरत क्यों पड़ी. अमेरिका में जब बराक ओबामा ने ये नारा दिया था तब अमेरिका के आर्थिक हालात बहुत खराब थे. बेरोजगारी बढ़ रही थी, बैंक दिवालिया हो रहे थे, कर्ज बहुत ज्यादा था और उसे चुकाने का रास्ता बन सके ऐसा भी नहीं हो पा रहा था. अमेरिका से शुरू हुई मंदी का असर पूरी दुनिया ने देखा था.

 

इराक में तैनात अमेरिकी सेना से लेकर आर्थिक मोर्चे पर देश बहुत बुरे दौर से गुजर रहा था. ऐसे में बराक ओबामा ने लोगों को हिम्मत बंधाई. उन्होंने लोगों में हौसला जताया कि हम कर सकते हैं.

 

हम मिलकर अमेरिका को इन सारी मुसीबतों से निकाल लेंगे और देश दोबारा उठ खड़ा होगा.अमेरिका की जनता ने ओबामा की आंखों से सपने देखे और एक ऐसे नेता को अमेरिका की कमान सौंपने का फैसला किया जो उन्हें मुसीबतों से निकालने का ना सिर्फ वादा कर रहा था बल्कि भरोसे के साथ लड़ने की हिम्मत भी दे रहा था.

 

मौजूदा वक्त भारत की अर्थव्यवस्था का बुरा हाल है. डॉलर के मुकाबले लगातार गिरता रुपया. चालू खाते में घाटे के साथ-साथ विदेशी निवेश में भी हाथ खाली हैं. महंगाई ने जनता की कमर तोड़ रखी है. देश की विकास दर 5 फीसदी के नीचे तक जा पहुंची है जो पिछले कई सालों के सबसे निचले स्तर पर है. देश में भ्रष्टाचार और सरकार के फैसलों को लेकर जनता गुस्से में है. पाकिस्तान और चीन के आगे भारत की कमजोर देश की छवि बनने की घटनाएं लोगों का गुस्सा और बढ़ा रही हैं.

 

मोदी शायद इसी गुस्से को भुनाना चाहते हैं. वो ओबामा के YES WE CAN के सहारे ये बताना चाहते हैं कि देश के हालात बदल सकते हैं. और ऐसा तभी होगा जब देश को कांग्रेस मुक्त किया जाए.

 

हैदराबाद की रैली से पहले हाल फिलहाल में मोदी ने जितने भी भाषण दिए उनमें गुजरात की उपलब्धियों को आधार बनाते हुए देश की मौजूदा तस्वीर से तुलना की. उनके भाषण में कुछ आंकड़े होते थे और अहमदाबाद की जस्सुबेन जैसे कुछ किरदार. फिर चाहे वो SRCC कॉलेज में दिया उनका भाषण हो या फिर फिक्की के मंच पर. लेकिन हैदराबाद में मोदी के भाषण में भावनाएं हावी थीं. आंकड़ों की बजाय भावनाओं को तरजीह देते हुए एलओसी पर पाक हमले में शहीद हुए सैनिकों का जिक्र करते हुए मोदी गुस्से में थे. किश्तवाड़ में हो रही हिंसा को लेकर वो चिंता में थे और अलग तेलंगाना के मामले में कांग्रेस पर दरार पैदा करने का आरोप लगाते हुए वो दुखी नजर आ रहे थे. लेकिन जब मोदी ने अपना भाषण खत्म किया तब वो जनता की आंखों में उम्मीद दिखाना चाहते थे और इसलिए उन्होंने इस जाने-पहचाने जुमले का इस्तेमाल किया. मोदी ने भाषण के वक्त कई पर्चे भी साथ रखे थे.. बहुत मुमकिन है कि वो ओबामा की नकल करने का इरादा पहले से लेकर आए हों!

 

ये भी कम दिलचस्प नहीं है कि जिस ओबामा के अमेरिका से मोदी को वीजा मिलने को लेकर इतना बवाल मचा है उसी ओबामा का जुमला अपनी जीत के लिए मोदी उधार ले रहे हैं.

 

बीजेपी की चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष के तौर पर मोदी की ये पहली बड़ी जनसभा थी, हो सकता है कि मोदी ने ओबामा की रणनीति को अपनी चुनावी मुहिम का हिस्सा बना लिया हो.

 

मोदी सपने दिखाने में ओबामा से कतई कम नहीं हैं. ओबामा जब 2012 में दूसरी बार चुनाव मैदान में उतरे थे तो उनके इस नारे पर काफी कुछ कहा गया था. ओबामा के दिखाए सपनों की पड़ताल भी हुई लेकिन अमेरिका ने ओबामा को एक और मौका दे दिया.

 

मोदी भी देश से एक मौका चाह रहे हैं, लेकिन बड़ी बात ये है कि क्या देश को मोदी में ओबामा जैसी छवि दिखेगी?

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