मोदी जी, केजरीवाल से निपटे बिना कैसे सपनों का ताजमहल बनेगा?

By: | Last Updated: Monday, 20 January 2014 2:57 PM

बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी रविवार को देश में विकास की इकॉनोमिक्स को समझा रहे थे लेकिन वोट की अर्थमेटिक्स और केमिस्ट्री को शायद समझ नहीं पा रहे हैं. मोदी के नेतृत्व में पार्टी आत्मविश्वास से लोतपोत है लेकिन कभी-कभी अति आत्मविश्वास खतरनाक साबित होता है.

 

2004 के लोकसभा चुनाव में अति आत्मविश्वास का तीखा स्वाद चख चुके लालकृष्ण आडवाणी ने कहा कि पार्टी 2004 में चुनाव हार गई और इसका कारण अति आत्मविश्वास था. इस लोकसभा चुनाव में पार्टी को सुनिश्चित करना है कि पार्टी केवल विश्वास के साथ लड़े. दिल्ली विधानसभा चुनाव के पहले मोदी की लोकप्रियता की गाड़ी ठीक ही चल रही थी लेकिन दिल्ली विधानसभा के नतीजों ने मोदी की जीत के रथ के सामने अड़ंगा खड़ा कर दिया है. केजरीवाल फैक्टर की वजह से दिल्ली में बीजेपी को बहुमत नहीं मिला. बहुमत ही नहीं सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद बीजेपी दिल्ली में सरकार नहीं बना पाई. दिल्ली में केजरीवाल की जीत से इस पार्टी का जनाधार दिल्ली के अलावा दूसरों राज्यों में फैल रहा है. आम आदमी पार्टी का फैलाव बीजेपी के लिए खतरे की घंटी बन रही है. कहा जा रहा है कि आम आदमी पार्टी को लोकसभा चुनाव में 20 से 25 सीटें मिल सकती हैं और इतने ही सीटों पर बीजेपी को नुकसान पहुंचा सकता है यानि केजरीवाल फैक्टर से बीजेपी को 50 सीटों का नुकसान हो सकता है. ऐसे में मोदी का सपना अधूरा रह सकता है.

 

बीजेपी केजरीवाल को क्यों कम आंक रही है?

 

आम आदमी पार्टी दिल्ली के अलावा दूसरों राज्यों में फैल रही है लेकिन ये फैलाव सिर्फ बड़े शहरों में है. अभी के माहौल में वर्तमान स्थिति में बड़े शहरों में आम आदमी पार्टी 10 से 20 फीसदी वोट ले सकती है लेकिन बीजेपी आप से दो-दो हाथ करने के मूड में नहीं दिख रही है. एक वजह ये हो सकती है कि बीजेपी के बड़े नेता आप पर इसलिए हमला नहीं कर रहे हैं क्योंकि आप पर हमला करने से आप को फायदा हो सकता है इसीलिए वो कांग्रेस पर केन्द्रित हैं.

 

बीजेपी को लगता है आम आदमी पार्टी पर सामने से नहीं बल्कि पीछे से हमला किया जाए जाए. बीजेपी की प्लालिंग जो भी हो लेकिन आम आदमी पार्टी बीजेपी को भी कुछ नुकसान पहुंचा रही है इसकी ये वजह है कि जो वोटर कांग्रेस से बिदक रहे थे उनमें से कुछ आम आदमी पार्टी के तरफ रुख कर रहें हैं ऐसे में ये माना जा जाए कि मोदी का ही वोट खा रहें हैं केजरीवाल? वैसे दिल्ली विधानसभा चुनाव में बीजेपी को सिर्फ 3 फीसदी वोटों का नुकसान उठाना पड़ा था जबकि कांग्रेस को 15 फीसदी मतों को नुकसान हुआ था. बिहार और महाराष्ट्र की यात्रा में पाया कि कांग्रेस के खिलाफ जबर्दस्त नाराजगी है लेकिन इस नाराज वोटरों में खासकर आम आदमी पार्टी सेंध लगा रही है ऐसे में बिना केजरीवाल से लड़े वो दिल्ली की गद्दी पर कैसे पहुंचेंगे.

 

केजरीवाल से मोदी कैसे निपटेंगे? 

 

आम आदमी पार्टी दिल्ली में जादुई आंकड़े तक नहीं पहुंच पाई है लेकिन इस एक साल की पुरानी पार्टी को जबर्दस्त सफलता मिली है. इसी जीत से केजरीवाल इतने उत्साहित हैं कि अब उन्होंने लोकसभा चुनाव में कूदने का फैसला कर लिया है. कांग्रेस के खिलाफ हवा है लेकिन इस हवा में अरविंद केजरीवाल कांग्रेस विरोधी वोटरों में कुछ जगहों पर सेंध लगा रहें हैं.

 

दिल्ली में उनकी लोकप्रियता सिर चढ़कर बोल रही है. आम आदमी पार्टी ने जिस तरह से कैंपेन किया है वो काबिले तारीफ है. रू़ढ़िवादी प्रचार तरीके से अलग नये प्रचार तरीकों को अपनाया है जिसे अब दूसरी पार्टी भी अपना रही है. यूं कहें केजरीवाल लोमड़ी(फॉक्स) की चाल चलते हैं जिसे समझना मुश्किल हो गया है.

 

वो लोकतंत्र की दिशा और दशा भीड़तंत्र से तय करना चाहते हैं. केजरीवाल की चाल को ना तो कांग्रेस समझ पा रही है ना ही बीजेपी लेकिन एक कहावत है लोहा ही लोहा को काटता है. ऐसा प्रतीत होता है बीजेपी ठीक से प्रचार करे तो केजरीवाल के प्रभाव को कुछ कम किया जा सकता है इसके लिए बीजेपी और आरएसएस के सारे संगठन को डोर टू डोर कैंपेन करना पड़ेगा. ये बताने की जरूरत पड़ सकती है कि केजरीवाल फैक्टर सिर्फ और सिर्फ खेल खराब करना चाहती है. अगर फिर से किसी पार्टी को बहुमत नहीं मिला तो देश को मध्यावधि चुनाव होंगे जिससे देश की आर्थिक स्थिति खराब हो सकती है. इंवेस्टेमेंट पर नुकसान हो सकता है और नौकरी भी जा सकती है. आप को हल्के में नहीं लेना चाहिए वरना बीजेपी को नुकसान झेलना पड़ सकता है.

 

देश के लिए मोदी का सपना क्या है?

 

दो-तीन महीनों से मोदी का भाषण उबाऊ हो चुका था लेकिन रविवार के भाषण में ताजापन दिखा. मोदी ने लोकसभा चुनावी घोषणापत्र के पहले रोडमैप पेश करने की कोशिश की है. मोदी ने कहा कि महंगाई से आम जनता परेशान है. 2014 में केंद्र की बीजेपी सरकार महंगाई पर नकेल कसेगी, बुलेट ट्रेन चलाने का वायदा किया, कालेधन को वापस लाने का भरोसा दिया है. मोदी ने कहा है कि पांच ‘T’ पर बल देने की जरूरत है- टैलंट, टूरिजम, ट्रेडिशन, ट्रेड और टेक्नॉलजी.’ उन्होंने देश में और IIT, IIM और AIIMS खोले जाने की वकालत की है लेकिन सवाल यही उठता है कि आम आदमी पार्टी की काट ढूढ़े बिना कैसे सत्ता मिलेगी.

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