यूपी में मोदी लहर?

By: | Last Updated: Thursday, 23 January 2014 5:24 PM

उत्तर प्रदेश में लोकसभा की 80 सीटें हैं और इसलिए देश के प्रधानमंत्री को तय करने में यूपी अहम रोल अदा करता आया है. क्या इस बार उत्तर प्रदेश मोदी को भी प्रधानमंत्री बनाने जा रहा है?

 

इस बारे में साफ कुछ कहना मुश्किल है लेकिन एबीपी न्यूज नीलसन के जो अनुमान नजर आ रहे हैं उसकी कुछ बातें एकदम साफ हैं एक तो नरेंद्र मोदी अभी तो यूपी की दौड़ में सबसे आगे चल रहे हैं. बीजेपी नेताओं के दिलों को इस बात से बहुत सकून मिला होगा.

 

1991 के दशक में यूपी बीजेपी का हुआ करता था बल्कि कहना चाहिए बीजेपी को बड़ा बनाया उत्तर प्रदेश ने ही.

 

# 1991 में 51 सीट दी थीं. ये वो दौर था जब मंदिर-मस्जिद का मुद्दा यूपी में गरम था. 

 

# 1996 में यूपी से मिली 52 सीटों के दम पर ही वाजपेयी 13 दिन के पीएम बने थे. 

 

# 1998 में जब वाजपेयी 13 महीने के पीएम बने थे तब बीजेपी ने यूपी में 57 सीट जीती थीं

 

# 1999 में वाजपेयी पीएम बने तो बीजेपी ने यूपी में 29 सीट जीती थीं.

 

# इसके बाद उत्तर प्रदेश में अलग तरह की राजनीति शुरू हुई और बीजेपी किनारे पर पहुंच गई.

 

# 2004 में बीजेपी उत्तर प्रदेश में सिर्फ 10 सीट जीतीं

 

# 2009 में भी बीजेपी का ऐसा ही हाल था.

 

लेकिन सर्वे बता रहे हैं कि यूपी के वोटरों की पसंद इस लोकसभा चुनावों में बदली नजर आ रही है. बीजेपी को 35 सीटों का अनुमान इसी तरफ इशारा कर रहा है. सिर्फ सर्वे ही नहीं मोदी की रैलियों में जुट रही जबरदस्त भीड़ भी इसी तरफ इशारा कर रही है. मोदी भी लोगों के प्यार के बदले विकास को सूद समेत लौटाने की बात कर रहे हैं. इस बात को राज्य में सत्तारूढ समाजवादी पार्टी अच्छे से समझ रही है. वाराणसी की रैली में मुलायन के निशाने पर मोदी रहे. उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश को गुजरात नहीं बनने देंगे ये अलग बात हैं कि मोदी ने फिर ललकार दिया कि नेताजी यूपी को गुजरात बना ही नहीं सकते.

 

आप नहीं रोक पाई मोदी को

 

दिल्ली में आम आदमी पार्टी की जीत के बाद अनुमान लगाया जा रहा था कि आप देश में मोदी के खिलाफ बड़ी फोर्स बन सकती है. एक तो उत्तर प्रदेश दिल्ली के साथ सटा है. यूपी की बड़ी आबादी का दिल्ली से सीधा ताल्लुक है. किसी के रिश्तेदार दिल्ली में बसे हैं तो किसी का दिल्ली आना जाना लगा रहता है. लेकिन सर्वे के अनुमान बता रहे हैं कि आम आदमी पार्टी को दो सीट मिलेंगी वो भी पश्चिमी यूपी में. इसमें ये भी खास है कि आम आदमी पार्टी की सदस्यता का अभियान 10 जनवरी से शुरू हुआ और उसे ग्राउंड खड़ा करने में वक्त लगेगा. एक दूसरी वजह ये भी हो सकती है कि आप के सारे बड़े नेता दिल्ली में भिड़े हुए हैं और उन्हें फोक्स दिल्ली से हटाने में मुश्किल आ रही है. सिर्फ कुमार विश्वास यूपी में काम करते नजर आ रहे हैं.

 

चुनाव सिर्फ कुछ महीने दूर है और ऐसे में लगता है कि अभी तक आप यूपी में मोदी की लहर रोक पाने में नाकाम है.

 

अपने ही घर में घिरी एसपी

 

एसपी अपने ही घर में घिरी नजर आ रही है. समाजवादी पार्टी पर लगातार हमले हो रहे हैं. ये अलग बात है कि समाजवादी पार्टी वाराणसी में हुई रैली में जुटी भीड़ के बाद उत्साहित है. समाजवादी पार्टी ने पिछली बार 23 सीट जीती थीं. विधानसभा चुनावों में मिले जबरदस्त बहुमत के बाद मुलायम सिंह यादव को यूपी से बड़ी उम्मीदें हैं. समाजवादी पार्टी देश की उन पहली पार्टियों में से है जिसने लोकसभा के लिए उम्मीदवार तय कर दिए थे. मुलायम सिंह यादव को उम्मीद है कि अगर यूपी में चालीस से ऊपर सीटें आ गईं तो किंगमेकर से लेकर किंग तक बन सकते हैं. लेकिन मुजफ्फरनगर दंगों के बाद से मुलायम का माई यानी मुस्लिम यादव समीकरण टूटा है. इसका नतीजा एबीपी न्यूज नील्सन के सर्वे से सामने आता है जहां एसपी की ताकत घटकर सिर्फ 14 रह जाने की आशंका है. यानी अभी के अनुमानों के मुताबिक एसपी की ताकत यूपी में घटी है. 

 

रसातल में कांग्रेस

 

अनुमान लगाए जा रहे थे कि कांग्रेस को इस बार देश में जबरदस्त झटका लगेगा. ऐसा कि उसके आंकड़े सौ के नीचे सिमट जाएं. लेकिन इसके बाद भी कांग्रेस को लोकसभा से बड़ी उम्मीदें हैं. साल 2009 में हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को यहां से सीट मिली थीं 21. उम्मीद दो वजहों से है- पहला कांग्रेस ने राष्ट्रीय लोकदल से गठबंधन किया है. आरएलडी ने 2009 लोकसभा चुनाव में 5 लोकसभा सीटें जीती थीं. दूसरा मुस्लिम वोटर इस बार एसपी से छिटका नजर आ रहा है. एबीपी न्यूज नीलसन के सर्वे के मुताबिक यूपी में कांग्रेस की उम्मीद टूटने जा रही है. कांग्रेस को गठबंधन के बावजूद पिछली बार से कम सीट मिल रही हैं. कांग्रेस आरएलडी को मिलाकर यूपीए के पास इस वक्त 27 सीट हैं. जबकि चुनाव के बाद ये सीटें घटकर रह जाएंगी 12 सीट.

 

बीएसपी की जमीन हिली

 

बीएसपी के लिए उत्तर प्रदेश सबसे अहम है. बीएसपी उत्तर प्रदेश को छोड़कर किसी और राज्य में सरकार नहीं बना सकी है. बीएसपी ने पिछले लोकसभा चुनावों में यूपी से 20 सीट हासिल की थीं और यही वजह है केंद्र में सरकार से बाहर रहने के बाद भी वो अपनी ताकत का एहसास कराने में कामयाब रही थी. मायावती की रैली से जो ताजा संकेत मिले हैं उससे लगता है कि वो उन मुस्लिम वोटरों पर डोरे डाल रही है जो अब तक एसपी के साथ थे. एबीपी न्यूज नील्सन के सर्वे के मुताबिक बीएसपी यूपी में 15 सीट जीत सकती है. बीएसपी की ये सीटें पिछली बार से 5 कम हैं. 

 

कुछ चौंकाने वाला हो सकता है

 

28 दिसंबर से 12 जनवरी के बीच कराए गए सर्वे में यूपी की दो बड़ी पार्टियां पस्त नजर आ रही हैं देश की सबसे बड़ी राष्ट्रीय पार्टी कांग्रेस की हालत बेहद खस्ता है. लेकिन अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी. वजह है चुनाव प्रचार का अहम दौर आने वाला है और सभी राजनीतिक पार्टियों ने अपने हथियार मांझने शुरू कर दिए हैं. आने वाले दिनों में कुछ चौंकाने और चुनाव में असर डालने वाली बातें भी सामने आएं तो हैरानी नहीं होंगी और हो सकता है यही बातें चुनाव का रुख तय करें.

 

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