फसल बीमा योजना से कृषि में आधुनिक तकनीकी से बदलाव लाने की तैयारी

By: | Last Updated: Tuesday, 2 February 2016 11:21 AM
pmfby will change the agricultural sector by technology for better

नई दिल्ली: देश के किसानों के जीवन में बदलाव लाने के प्रयास में कैबिनेट ने गुरुवार को केन्द्र सरकार की नई फसल बीमा योजना को पारित किया. देश के कई हिस्सों में फसल कटाई समारोह की पूर्व संध्या पर प्रधानमंत्री के द्वारा ट्वीट के साथ शुरू की गई इस योजना को खास तौर पर किसानों की वित्तीय अस्थिरता को समाप्त करने के लिए पेश किया गया है, जिसके चलते कृषि क्षेत्र को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है.

डब्लयूआरएमएस के सोनू अग्रवाल अपने एक लेख में बताते हैं कि 1999 एवं 2004 में क्रमशः एनडीए और यूपीए द्वारा पेश की गई योजनाओं में सुधार करते हुए नए फसल बीमा में न्यूनतम यूनिफार्म प्रीमियम रबी के लिए 1.5 फीसदी और खरीफ़ के लिए 2 फीसदी तय किया गया है और इसी दिशा में एक कदम आगे बढ़ाते हुए सरकार के द्वारा सब्सिडी की ऊपरी सीमा को हटा दिया गया है. ये तथ्य निश्चित रूप से इन योजनाओं को किसानों के लिए आकर्षक बनाएंगे, जो अब सरकार द्वारा प्रोत्साहित दृष्टिकोण के साथ मुक्त कारोबार के लिए ज़्यादा जोखिम उठा सकते हैं.

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना को भी प्रतिस्थापित करेगी और इसके द्वारा राज्य असीमित दायित्वों के लिए प्रावधान बनाने के बजाए बीमा प्रीमियम सब्सिडी का बजट तैयार कर सकेंगे. कई विश्लेषक इस तथ्य को लेकर हैरानी में हैं कि कैसे राज्य प्रीमियम सब्सिडी के अपने हिस्से के लिए वित्तपोषण जुटा सकेंगे. कृषि क्षेत्र में अनिश्चितता को समाप्त करना सबसे महत्वपूर्ण है और इस तथ्य के मद्देनज़र यह योजना पेश की गई है. क्योंकि इससे फसलों के नुकसान सम्बन्धी टेक्नॉलजी आंकड़े आसानी से जुटाए जा सकेंगे.

सबसे पहले सरकार मौसम जोखिम प्रबन्धन के बारे में किसानों को जागरुक करने की योजना बना रही है और कृषि एवं मौसम विज्ञान के आंकड़ों के आधार पर बीमा एवं क्षतिपूर्ति प्रणाली की स्थापना की जाएगी. दूसरा, योजना के तहत मौसम सम्बन्धी प्राकृतिक आपदाओं जैसे बेमौसम बरसात या कटाई के बाद बरसात के कारण फसलों को पहुंचने वाले नुकसान की परिभाषा को बदला जाएगा. हालांकि, नीति में अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि राज्य मौजूदा योजना के तहत दावों के निपटारे के लिए आंकड़े कैसे जुटाएंगे, ऐसे में फसल कटाई के प्रयोगों के लिए उनका हिस्सा तय करना मुश्किल होगा.

उम्मीद की जा रही है यह आकर्षक योजना देश के 50 फीसदी से ज़्यादा किसानों को कवर करेगी. इसका सीधा लाभ बैंकों और वित्तीय संस्थानों को पहुंचेगा जो पहले से अपनी प्रणाली के जोखिमों को कवर करने के लिए किसानों को कवरेज देने के पक्ष में हैं. इसलिए बैंकों से ऋण लेने वाले किसानों का कवरेज बढ़ जाएगा. किंतु बीमा योजना का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह होगा कि यह देश के कम जागरुक एवं गरीब किसानों तक पहुंचेगी, जिनके पास किसी बैंकिंग प्रणाली से ऋण लेने की सुविधा अब तक उपलब्ध नहीं है.

मौसम एवं प्राकृतिक आपदाओं के कारण होने वाले जोखिम के खिलाफ़ सुरक्षा एवं जागरुकता को बढ़ाने के लिए निजी कृषि कम्पनियां, एनजीओ इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है. हालांकि यह योजना बेहतर पैकेज लेने वाले किसानों को किसी तरह का प्रोत्साहन प्रदान नहीं करती है, न ही यह खेतों के स्तर के निपटारे पर ध्यान केन्द्रित करती है. इस प्रकार किसानों में इस योजना को बढ़ावा देने के लिए यह निजी कम्पनियों और एनजीओ को कम प्रोत्साहन प्रदान करती है. हालांकि ग्रामीण वित्तीय कम्पनियां गैर-ऋणी किसानों को ये पॉलिसियां बेचने के लिए प्रोत्साहित होंगी.

बैंकों से दावों का कवरेज मौसमी स्टेशनों एवं मानव रहित हवाई वाहनों (ड्रोन) से मिलने वाले आंकड़ों पर आधारित होगा. भारतीय मौसम विभाग इस तरह के उपकरणों को इंस्टाल करने का काम करेगा और डीजीसीए केवल सरकारी संस्थानों को ही इन वाहनों को उड़ाने की अनुमति देगा. चूंकि बड़ी मात्रा में भूमि को कवर किया जाएगा, ऐसे में निजी एजेन्सियों को बड़े पैमाने पर मौसम स्टेशनों के इन्सटालेशन एवं हवाई वाहनों के द्वारा सर्वेक्षण का काम करना होगा. हालांकि ऐसे स्टेशनों के लिए अब तक कोई व्यवहारिक दिशानिर्देश तय नहीं किए गए हैं.

कम प्रीमियम एवं सरकारी सहायता पर ऊपरी सीमा में छूट जैसे मुद्दों की बात करें तो सरकार भारतीय किसान को किसी भी प्रकार की वित्तीय असुरक्षा से बचाते हुए सुरक्षित करना चाहती है. उम्मीद है कि सरकार का यह कदम किसान समुदाय के कल्याण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा और हाल ही में किसानों की बढ़ती आत्महत्याओं के चिंताजनक मुद्दे को हल करेगा. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की सफलता विभिन्न स्तरों के द्वारा किए जाने वाले कार्यों एवं सहयोग पर निर्भर करेगी.

योजना का वास्तविक प्रभाव केवल समय के साथ ही सामने आएगा. लेकिन एक बात तय है कि प्रोद्यौगिकी इस क्षेत्र पर सकारात्मक बदलाव पैदा करने जा रही है. वित्तीय पहलुओं को एक तरफ रख दिया जाए, तो भी प्रकृति एवं मौसमी आपदाओं के नियन्त्रण के लिए बनाई गई योजनाएं भारत में कृषि क्षेत्र तथा किसान समुदाय के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएंगी.

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