four thousand years old remnants found in Bhadohi at Uttar Pradesh

भदोही: खुदाई के दौरान मिले कारीगरी के बेहतरीन नमूने, 4 हजार साल पुराना है इनका इतिहास

भदोही जिला मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर दूर गंगा के किनारे द्वारिकापुर और अगियाबीर गांव में एक बड़े टीले पर प्राचीन सभ्यता की तलाश में काशी हिंदू विश्वविद्यालय के प्राचीन भारतीय इतिहास संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग की टीम 1999 से इस इलाके में खुदाई का कार्य कर रही है. यहां साढ़े तीन हजार वर्ष पुरानी ताम्रयुग सभ्यता के साक्ष्य मिले हैं.

By: | Updated: 10 Apr 2018 11:48 AM
four thousand years old remnants found in Bhadohi at Uttar Pradesh
भदोही: उत्तर प्रदेश के भदोही जिले में गंगा तट पर बसे द्वारिकापुर और अगियाबीर गांव में काशी हिंदू विश्वविद्यायल के पुरातत्व विभाग की तरफ से चल रहे उत्खनन में ताम्रयुग की साढ़े तीन से चार हजार वर्ष पुरानी सबसे प्राचीन बस्ती मिली है. काशी और प्रयाग के बीच यह जगह पुरातात्विक खोज के लिए अहम है. खुदाई के दौरान हड्डियों के बने औजार, मनके, मिट्टी के कलाकृत बर्तन सहित अन्य महत्वपूर्ण चीजे यहां से मिली हैं.

भदोही जिला मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर दूर गंगा के किनारे द्वारिकापुर और अगियाबीर गांव में एक बड़े टीले पर प्राचीन सभ्यता की तलाश में काशी हिंदू विश्वविद्यालय के प्राचीन भारतीय इतिहास संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग की टीम 1999 से इस इलाके में खुदाई का कार्य कर रही है. यहां साढ़े तीन हजार वर्ष पुरानी ताम्रयुग सभ्यता के साक्ष्य मिले हैं.

शोध में यहां मछुआरों की सबसे पुरानी बस्ती मिलने के साक्ष्य मिले हैं.बस्ती के लोग पशुपालन, खेती सहित आखेट का भी कार्य करते थे. खुदाई में मिट्टी के बर्तन, हड्डियों से बने शिकार करने के औजार, बर्तन बनाने की कारीगरी सहित दूसरी वस्तुएं मिली हैं.

निदेशक डॉ. अशोक कुमार सिंह ने बताया कि पुरातत्व विभाग की टीम जिस टीले पर खुदाई कर रही है, वह दो संस्कृतियों पर काम कर रही है. एक, लौहकालीन उत्तरी काली मृदभांड संस्कृति और दूसरे इसके पहले की ताम्र-पाषाण कालीन संस्कृति है. ताम्र-पाषाण काल में लोग अपने विकास के प्रारम्भ में थे लोग बांस और घास के घरों में रहते थे. उस समय के मछली मारने के काटे, हड्डी के उपकरण, अर्ध मूल्यवान पत्थरों के बेहत ही खुबसूरत मनके जो महिलाएं गहनों के रूप में प्रयोग करती थीं.

इंद्रगोप, सुलेमानी पत्थर के ढोलाकार, अंडाकार, गोल, चपटे कई रंगों के मनके और पत्थरों की एक कुल्हाड़ी टूटे स्वरूप में मिली है. चूल्हे और घरों के फर्श के अवशेष भी खुदाई में मिले हैं. उसके बाद जब सभ्यता अपने और विकसित रूप में आई तो लौहकालीन संस्कृति का प्रारंभ हुआ उससे जुड़ी भी कई चीजे यहां मिली है, क्योंकि इस काल में सभ्यता और विकसित हो गई थी तो इस काल के मनके और भी खूबसूरत मिले हैं.

इस काल के मनको को आईने की तरह चिकना निर्मित किया गया था. इसी काल में लोहे का प्रयोग बढ़ा था तो खुदाई में लोहे के कई उपकरण मिले हैं, जिसमे भाले, तलवार के अंश और एक पिटवा लोहे की कुल्हाड़ी मिली है जिसको पारंपरिक तरीके से लोहे से बेहत ही खूबसूरत तरीके से निर्मित किया गया था. अब इस कुल्हाड़ी को जांच के लिए भेजा जा रहा है. उसके बाद इससे जुड़ी कई और जानकारी मिल सकती है.

जानकारों का मानना है कि अगर इस इलाके में और बड़े पैमाने पर उत्खनन का कार्य किया जाए, तो कई और इस तरह की जानकारी मिल सकती है जो अभी तक छिपी हुई है.

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Web Title: four thousand years old remnants found in Bhadohi at Uttar Pradesh
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