प्रधानमंत्री-18

Sunday, 10 November 2013 3:30 AM

बफोर्स घोटाले के शोर के बीच साल 1989 में आम चुनाव हुए. देश में वीपी
सिंह की लहर थी, वे उस समय एक नायक के तौर पर शुमार किए जा रहे थे. चुनाव
में उनकी पार्टी जनता दल को जीत मिली और बड़े ही नाटकीय ढ़ंग से वे संसदीय
दल के नेता चुने गए यानी प्रधानमंत्री चुने गए. हालांकि, चंद्रशेखर ने उनकी
उम्मीदवारी का खुला विरोध किया था. बीजेपी के समर्थन से उनके नेतृत्व में
एक गठबंधन सरकार बनी. जब प्रधानमंत्री बने तो उनके समाने चुनौतियां अनेक
थी. पार्टी के भीतर और बाहर दोनों तरह की चुनौतियां हर पल उन्हें परेशान कर
रही थीं. उसी दौरान कमंडल की राजनीति ज़ोरों पर थी तो उन्होंने उसे मात
देने के लिए मंडल की राजनीति का दांव चला. पिछड़ी जातियों को सरकारी
नौकरियों में आरक्षण देकर वीपी सिंह इतिहास में दर्ज हो गए… लेकिन देश को
इसके खिलाफ काफी गुस्सा देखना पड़ा. अगड़ी जाति के युवा सड़कों पर आ गए.
वीपी सिंह के कार्यकाल में रथ यात्रा पर निकले बीेजपी के नेता लाल कृष्ण
आडवाणी को लालू प्रसाद ने बिहार में गिरफ्तार कर लिया.. जिसके बाद वीपी
सिंह की सरकार चली गई. प्रधानमंत्री के इस शो में जानें कैसे वीपी
सिंह प्रधानमंत्री बने… मंडल कमिश्न की सिफारिशों के लागू होने का देश की
राजनीति पर क्या असर पड़ा और आडवाणी की गिरफ्तारी के बाद कैसे वीपी सिंह
की सियासत हमेशा के लिए रुक गई. …और वीपी सिंह, चंद्रशेखर के बीच तल्खी
क्या थी और उस समय देवी लाल भी थे पीएम उम्मीदवार. 

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