व्यक्ति विशेष: नेशनल हेरल्ड का तिलिस्मी कनेक्शन!

detail information on national herald case

कहते है इतिहास खुद को कभी नहीं दोहराता. लेकिन इंदिरा गांधी की बहू सोनिया गांधी के मामले में इतिहास दोहराव की दहलीज पर खड़ा नजर आया जब सोनिया दिल्ली की पटियाला हाउस अदालत में पेश हुई. देश के सबसे ताकतवर राजनीतिक घराने गांधी परिवार के दो अहम सदस्यों सोनिया गांधी और उनके बेटे राहुल गांधी को कोर्ट में पेश होना पड़ा है.

 

चंद महीने पहले तक जिन सोनिया गांधी के पास देश की सत्ता की चाबी थी जिनका शुमार दुनिया की सबसे ताकतवर हस्तियों के बीच हो रहा था उन्हें अदालत में हाजिर होकर वित्तीय अनियमित्ता के उस मामले में सफाई पेश करनी पड़ी जिसे लेकर विरोधी उन पर लंबे वक्त से इल्जामों के तीर बरसा रहे हैं. नेशनल हेरल्ड अखबार केस में कोर्ट के सामने हाजिर होने वाली सोनिया गांधी के लिए ये मामला अब गले की फांस बन चुका है. 77 साल पहले वजूद में आने वाला नेशनल हेरल्ड अखबार अब तलवार बन कर गांधी परिवार की साख पर लटक रहा है. ये वो अखबार है जिसकी नींव जवाहर लाल नेहरु ने रखी थी लेकिन इस अखबार के चलते ही आज गांधी परिवार की नींव में कंपन पैदा हो गया है.

 

आज हम आपको बताएंगे नेशनल हेरल्ड के तिलिस्मी कनेक्शन का पूरा इतिहास और भूगोल. साथ ही आपको ये भी बताएंगे कि इस मामले में इंदिरा गांधी की बहू होने का बयान देने के पीछे क्या थी सोनिया की मंशा और क्या है इसका मूल. साथ ही पड़ताल इस बात की भी करेंगे कि हेरल्ड के फंदे में फंसने पर कितनी हो सकती है सजा और क्या सोनिया गांधी जा सकती हैं जेल.

 

नेशनल हेरल्ड केस में आज (शनिवार) दोपहर सोनिया और राहुल गांधी दिल्ली की पटिलाया हाउस अदालत में पेश हुए. अदालत ने उन्हें पचास हजार रुपये के निजी मुचलके पर जमानत भी दे दी. मनमोहन सिंह ने सोनिया गांधी की जमानत ली तो वही प्रियंका गांधी ने अपने भाई राहुल गांधी की जमानत कोर्ट में दी है. इस पूरे मामले में अब अगली सुनवाई 20 फरवरी 2016 को होगी. लेकिन नेशनल हेरल्ड को राजनीतिक जंग के तौर पर भी देखा जा रहा है.

 

सोनिया गांधी और राहुल गांधी की पटियाला हाउस कोर्ट में ये पेशी जितनी अहम है उतनी ही उलझी हुई है इस केस की कहानी भी. इस नेशनल हेरल्ड केस की गहराई से पड़ताल भी हम करेंगे आगे लेकिन पहले देखिए अदालत में क्यों पेश होने के लिए मजबूर हो गई सोनिया गांधी.

 

कोर्ट में क्यों पेश हुईं सोनिया?
सोनिया गांधी समेत दूसरे कुछ कांग्रेस नेताओं पर नेशनल हेराल्ड की 2000 करोड़ रुपए की प्रॉपर्टी हथियाने के इरादे से 90 करोड़ रुपए के पॉलिटिकल फंड के गलत इस्तेमाल का आरोप लगा है. इस केस में सोनिया गांधी, राहुल गांधी, कांग्रेस नेता मोतीलाल वोरा और ऑस्कर फर्नांडीस को भी कोर्ट में पेश होना पड़ा है क्योंकि पेशी से राहत की मांग करती इनकी पिटीशन दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज कर दी थी.

 

नेशनल हेरल्ड केस आज सोनिया गांधी ही नहीं बल्कि उनका कांग्रेस पार्टी के लिए भी मुसीबत बन चुका है. दरअसल ये पूरा मामला उस वक्त सुर्खियों में आया था जब बीजेपी नेता सुब्रहमण्यम स्वामी ने साल 2012 में कोर्ट में केस दायर कर ये आरोप लगाया था कि सोनिया गांधी और उनकी कांग्रेस पार्टी ने राजनीतिक फंड का गलत इस्तेमाल किया है. आरोप लगा कि कांग्रेस पार्टी ने नेशनल हेरल्ड की देश भर में मौजूद करीब 2000 करोड़ रुपये की संपत्ति हथियाने के मकसद से ऐसा किया है. दिल्ली की एक अदालत ने मामले में चार गवाहों के बयान दर्ज किए और 26 जून 2014 को कोर्ट ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी समेत कांग्रेस के कुछ नेताओं को अदालत में पेश होने का समन भेजा दिया था.

 

आखिर ये नेशनल हेरल्ड केस का पूरा मामला क्या है और इस मामले में सोनिया गांधी और राहुल गांधी पर क्यों और क्या आरोप रहे हैं. इस केस में कोर्ट में हाजिर होने से पहले सोनिया गांधी ने क्या दिया था रिएक्शन क्योंकि इससे जुड़ा है इतिहास का एक कनेक्शन.

इस मामले की शुरुआत 1938 में उस वक्त हुई जब जवाहरलाल नेहरु ने कांग्रेस के एक अखबार की जरुरत महसूस की और उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से नेशनल हेरल्ड नाम के अखबार की शुरुआत की थी. नेशनल हेरल्ड का मालिकाना हक असोसिएटेड जर्नल लिमिटेड यानी (ए. जे. एल.) कंपनी के पास था. लेकिन साल 2008 में घाटे के चलते एजेएल ने अपने सभी प्रकाशनों को निलंबित कर दिया था और इसी के साथ कंपनी पर 90 करोड़ रुपये का कर्ज भी चढ़ गया था. इसके बाद कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने 23 नवंबर 2010 को यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड नाम से एक नई नॉट फॉर प्रॉफिट कंपनी बनाई थी जिसमें सोनिया गांधी और राहुल गांधी समेत कांग्रेस नेता मोतीलाल बोरा, सुमन दुबे, ऑस्कर फर्नांडिस और सेम पित्रोदा को निदेशक बनाया गया था. इस यंग इंडियन कंपनी में राहुल गांधी और सोनिया गांधी के पास 38-38 फीसदी शेयर थे जबकि बाकी के 24 फीसदी शेयर बाकी के सदस्यों के पास थे. कांग्रेस पार्टी ने यंग इंडियन कंपनी को 90 करोड़ रुपये बतौर लोन दिया जिसके बाद इस कंपनी ने असोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड का अधिग्रहण कर लिया.

 

बीजेपी नेता सुब्रहमण्यम स्वामी ने 1 नवंबर 2012 को एक याचिका दायर कर सोनिया और राहुल गांधी समेत कांग्रेस पार्टी के नेताओं पर धोखाघड़ी का आरोप लगाया था. याचिका में उन्होंने कहा कि ‘यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड ने सिर्फ 50 लाख रुपये में 90.25 करोड़ रुपये वसूलने का तरीका निकाला जो कि नियमों के खिलाफ है. स्वामी ने ये आरोप भी लगाया कि इस धोखाधड़ी के जरिए इन लोगों को नेशनल हेरल्ड के प्रकाशन अधिकार भी दिल्ली और उत्तर प्रदेश में स्थित प्रापर्टी समेत मिल गए हैं. स्वामी का ये भी कहना था कि नेशनल हेरल्ड की प्रापर्टी का का उपयोग सिर्फ अखबारों के प्रकाशन के लिए किया जा सकता है जबकि इस संपत्ति का व्यवसायिक उपयोग कर करोड़ो रुपये कमाए गए. याचिक में आरोप लगाया गया कि महज 50 लाख रुपये में नई कंपनी बनाकर एजेएल की 2000 करोड़ रुपये की संपत्ति हड़पने की चाल चली गई. इस पूरे मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने सोनिया और राहुल गांधी समेत यंग इंडियन कंपनी के सभी निदेशको को अगस्त 2014 में कोर्ट में पेश होने का निर्देश दिया था. यंग इंडियन कंपनी और एजेएल के बीच आखिर ऐसा क्या कुछ हुआ जिसने सोनिया गांधी को अदालत के दरवाजे तक पहुंचा दिया ये भी आपको बताएंगे हम आगे लेकिन उससे पहले बात सोनिया गांधी के उस बयान कि जिसमें उन्होने कहा है कि ‘मैं इंदिरा गांधी की बहू हूं, मैं किसी से डरती नहीं’.

 

आखिर ऐसा बयान देने के पीछे सोनिया गांधी की क्या मंशा छिपी है. नेशनल हेरल्ड विवाद में घिरी सोनिया गांधी खुद को पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की बहू बता कर आखिर क्या इशारा देना चाहती हैं? सोनिया के इस बयान का मतलब समझने के लिए आपको इतिहास के उन पन्नों में झांकना होगा जहां दर्ज है आपातकाल का दंश.

 

वो 1975 का साल जब इंदिरा गांधी देश की प्रधानमंत्री थीं. 12 जून, 1975 को अदालत ने अपने एक फैसले में इंदिरा गांधी के चुनाव को निरस्त कर दिया था. हालांकि उन्हें सुप्रीम कोर्ट में अपील करने की मोहलत भी दी गई थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट से भी इंदिरा गांधी को पूर्ण राहत नहीं मिली. सुप्रीम कोर्ट ने इंदिरा गांधी को बतौर प्रधानमंत्री संसद में आने की इजाजत तो दे दी थी लेकिन बतौर लोकसभा सदस्य उनके वोट करने पर प्रतिबंध लगा दिया था. कोर्ट के इस फैसले के अगले ही दिन इंदिरा गांधी ने बिना कैबिनेट की औपचारिक बैठक किए देश में आपातकाल लगाने की अनुशंसा राष्ट्रपति से कर दी थी. इंदिरा की इस सिफारिश पर राष्ट्रपति ने 25 और 26 जून की मध्य रात्रि में ही अपने हस्ताक्षर कर दिए और इस तरह देश में पहली बार आपात काल लागू कर दिया गया था. आपातकाल के दौरान लोगों के मौलिक अधिकार छीन लिए गए. इंदिरा गांधी ने चुन-चुन कर अपने विरोधी नेताओं को जेल में डाल दिया था. करीब 21 महीने तक देश में आपातकाल लगा रहा और इस दौरान इंदिरा गांधी ने मनमाने तरीके से शासन चलाया. प्रेस की आजादी ले ली गई. सत्ता के खिलाफ उठने वाली हर आवाज को दबा दिया गया था. जबरन लोगों की नसबंदी कराई गई. सरकार के किसी भी फैसले का विरोध करने वालों को जेल में डाल दिया जाता था.
आखिरकार 21 मार्च 1977 को आपातकाल वापस लेने का एलान किया गया और इसके बाद देश में आम चुनाव कराने की घोषणा हुई. इन चुनावों में इंदिरा गांधी की कांग्रेस पार्टी की करारी हार हुई और देश में मोरारजी देसाई की अगुवाई में जनता पार्टी की मिली जुली सरकार बनी थी. केंद्र में जनता पार्टी की सरकार बनते ही सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जे.सी. शाह की अध्यक्षता में एक जांच आयोग का गठन किया गया जिसे आपातकाल के दौरान हुई ज्यादतियों और अनियमितताओं की जांच का जिम्मा सौंपा गया. इस शाह कमीशन की रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन गृह मंत्री चौधरी चरण सिंह ने इंदिरा गांधी के खिलाफ कार्रवाई का आदेश दिया था जिसके बाद इंदिरा गांधी और उनके बेटे संजय गांधी को जेल भेज दिया गया. उस वक्त इंदिरा गांधी को दिल्ली के तिहाड़ जेल में रखा गया था.

 

1980 के दशक के आखिर में इंदिरा गांधी के जेल जाने का पूरे देश में विरोध हुआ था. दरअसल लोगों के बीच ये धारणा बनने लगी थी कि जनता पार्टी की सरकार इंदिरा गांधी और उनके बेटे संजय गांधी के खिलाफ बदले की भावना के वजह से कार्रवाई कर रही है यही वजह है कि जब इंदिरा गांधी जेल से बाहर आई तो उन्हें अपनी खोई हुई लोकप्रियता भी वापस मिल चुकी थी. आपसी खींचतान के चलते ढाई साल में ही जनता पार्टी की सरकार गिर गई थी जिसके बाद इंदिरा गांधी की सत्ता में वापसी हुई थी. लेकिन अब 35 साल बाद नेशनल हेरल्ड केस में घिरी सोनिया गांधी ने अपने इस बयान से कि ‘मैं इंदिरा गांधी की बहू हूं, मैं किसी से डरती नहीं’. ये संकेत देने की कोशिश की कि इतिहास एक बार फिर दोहराया जा सकता है. कांग्रेस ने यहां तक कह दिया कि कांग्रेस के नेताओं पर ठीक उसी तरह कार्रवाई की जा रही है जैसे 1977 में जनता सरकार ने इंदिरा गांधी पर की थी.

 

नेशनल हेरल्ड केस आज देश और दुनिया में चर्चा का केंद्र बन चुका है. दरअसल ये मामला नेशनल हेराल्ड अखबार के कब्जे से जुड़ा हुआ है. 1938 से छप रहा ये अखबार तो अब बंद हो चुका है लेकिन अरबों रुपये की इसकी संपत्ति अब विवादों में घिर चुकी है. नेशनल हेरल्ड विवाद की शुरुआत आठ साल पहले हुई थी जब आर्थिक तंगी की वजह से साल 2008 में ये बंद हो गया था और फिर यहीं से शुरु हुआ ये पूरा विवाद. आइये आपको बताते हैं कि आखिर नेशनल हेरल्ड का ये तिलिस्म क्या है.

 

ऐसे समझिए, नेशनल हेरल्ड केस?
नेशनल हेरल्ड अखबार 1938 में शुरू हुआ था. पंडित जवाहरलाल नेहरू ने इस अखबार की शुरुआत की थी.आजादी के बाद यह अखबार कांग्रेस का मुखपत्र बना रहा लेकिन 2008 में ये अखबार छपना बंद हो गया. जब अखबार का प्रकाशन बंद हुआ तब तक इसका मालिकाना हक एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड के पास ही था.

 

अखबार बंद होने के बाद क्या हुआ?
अखबार बंद होने के बाद कांग्रेस पार्टी ने असोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड को बिना ब्याज के 90 करोड़ रुपए का लोन दिया. फिर इसके बाद साल 2010 में 50 लाख रुपए से यंग इंडियन कंपनी बनी. इस कंपनी में सोनिया-राहुल की 38-38 फीसदी हिस्सेदारी थी. कांग्रेस नेता मोतीलाल वोरा और ऑस्कर फर्नांडीस के पास 24 फीसदी हिस्सेदारी थी.

 

सोनिया-राहुल की कंपनी ने क्या किया?
एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड ने साल 2010 में अपने 10-10 रुपए के 9 करोड़ शेयर सोनिया और राहुल की कंपनी यंग इंडियन को ट्रांसफर कर दिए. इसी के साथ 90 करोड़ रुपए का कर्ज भी यंग इंडियन कंपनी के पास आ गया जो कांग्रेस से लिया गया था. यंग इंडियन को 50 लाख रुपए में ही 90 करोड़ के लोन की रिकवरी के राइट्स मिल गए.

 

किसने दायर किया केस?
इस पूरे मामले और लेन देने में बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने 2012 में कोर्ट में केस दायर किया. उनका आरोप है कि कांग्रेस ने पॉलिटिकल फंड का गलत इस्तेमाल किया और कांग्रेस ने नेशनल हेराल्ड की देश भर में 2000 करोड़ रुपए की प्रॉपर्टी हथियाने के मकसद से ऐसा किया है.

 

समन भेजते वक्त ट्रायल कोर्ट ने क्या कहा?
नेशनल हेरल्ड विवाद अदालत में पहुंचने के बाद कोर्ट ने इस पर सुनवाई की. अदालत ने सोनिया और राहुल गांधी को कोर्ट में पेश होने के लिए समन भेजते हुए ये भी कहा कि “ऐसा नजर आता है कि एसोसिएटेड जर्नल्स की 2000 करोड़ रुपए की प्रॉपर्टी का कंट्रोल हासिल करने के मकसद से यंग इंडियन बनाई गई. ऐसा लगता है कि पब्लिक मनी को पर्सनल मनी बनाने के लिए यह हुआ.”

 

सूत्रों के मुताबिक इस पूरे मामले की समीक्षा में जो तथ्य एजेएल ने दिए उससे आयकर विभाग भी संतुष्ट नही हुआ और उसने एजेएल के खिलाफ आदेश पारित कर दिया. आदेश में कहा गया कि दस्तावेजों के आकलन से पता चलता है कि कांग्रेस पार्टी ने एजेएल को कई चरणों में 90 करोड का लोन दिया ये लोन ब्याज रहित था. कांग्रेस को ये 90 करोड़ वापस मिलने के कोई कागज भी पेश नहीं किये गए, लेकिन बाद में कांग्रेस के कहने पर एजेएल ने यंग इंडियन को नौ करोड शेयर जारी कर दिए. यानी अपनी कंपनी की 90 फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी यंग इंडियन को दे दी. आय़कर विभाग के अधिकारी ने अपनी जांच के बाद 90 करोड के लोन के कांग्रेस को रिपेमेंट होने पर सवाल खडे किए और पूछा कि लोन किस तरह से चुकाया गया.

 

नेशनल हेरल्ड मामले में बीजेपी ने भी कांग्रेस पर जबरदस्त हमला बोला. बीजेपी का कहना है कि 90 करोड़ के कर्ज और उसके बदले सोनिया – राहुल की कंपनी यंग इंडियन को 90 फीसदी शेयर देने के पीछे एजेएल की 5000 करोड़ की संपत्ति है.

 

नेशनल हेरल्ड की अरबों रुपये की प्रापर्टी देश भर में फैली हुई है. भोपाल, इंदौर, मुंबई, हरियाणा और लखनऊ के अलावा दिल्ली में भी नेशनल हेरल्ड के ऑफिस हैं जिनकी कीमत करोड़ो रुपयों में हैं. आइये अब आपको सुनाते है नेशनल हेरल्ड की ये कहानी.

 

देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु ने लखनऊ से 1938 में नेशनल हेरल्ड नाम के अखबार की शुरुआत की थी. नेशनल हेरल्ड का मालिकाना हक उस वक्त असोसिएटेड जर्नल लिमिटेड यानी एजेएल के पास था. एजेएल उस वक्त हिंदी में नवजीन और उर्दू में कौमी अवाज के नाम से दो अखबार और भी छापा करती थी. इस अखबार में जवाहर लाल, फिरोज गांधी और इंदिरा गांधी शेयर धारक थे.

 

डेकेन हेरल्ड पूरी तरह से जवाहर लाल नेहरु परिवार का था लेकिन जो बात समझनी चाहिए ये पेपर कभी भी कॉमर्शली उस पर नहीं चलाया गया मतलब कंपनी तो थी रजिस्टर्ड तो होगी और अखबार निकालना एक कॉमर्शिएल एक्टिविटी है लेकिन जो कॉर्पोरेट नेचर हैं डेट वाज नेवर पार्ट ऑफ डेकेन हरेल्ड तो नेहरु के जमाने में उमाशंकर दीक्षित उसके चेयरमेन रहे समझिए कांग्रेस के अच्छे मित्र कहिए या सहयोगी कहिए उसके बाद इंदिरा गांधी जी आईं उनके जमाने में सब चलता रहा और इंदिरा गांदी के समय में जब अखबार का डिवलपमेंट रुक गया तब ये सवाल आने लगे कि पेपर को कैसे चलाया जाए उसके फाइनेशिएल कहां से आए और खर्चा भी बढ़ रहा था और सब बात हो रही थी तो पहली बार जब इसको व्यापारिक तरीके से चलाने की बात हुई तो जबकि ये दिल्ली आया हो और दिल्ली से कंपटिशन बेस किया.

 

नेशनल हेरल्ड के पहले संपादक के रामाराव बनाए गए थे. हालांकि इस अखबार का झुकाव कांग्रेस की तरफ था लेकिन ये अपने स्वतंत्र विचार के लिए भी मशहूर रहा है. खास बात ये है कि नेशनल हेरल्ड दो बार पहले भी बंद हो चुका है. एक बार 1942 से 1945 के बीच ब्रिटिश राज में इस पर ताला लगा तो वहीं दूसरी बार 1977 में इंदिरा गांधी की चुनावों में हार के बाद इसे बंद कर दिया गया था.
नेशनल हेराल्ड के पूर्व संपादक शुभव्रत भट्टाचार्य बताते हैं कि बैन लगने से पहले जब अंग्रेज नेशनल हेराल्ड को अचानक ही सस्पेंड कर दिए थे कि आज आपने ये खबर छापी और ये ठीक नहीं है तो लखनऊ की आम जनता और आवाम सड़को पर निकल गई दो आना चवन्नी और आधा पैसा कैलेक्ट करके फाइन का पूरा पैसा जुगाड़ के दोपहर तक कलैक्ट्रेट के पास पहुंच जाता था कि भईया ये पैसे गिनो और शाम को नेशनल हेराल्ड निकले.

 

(लखनऊ में नेशनल हेराल्ड नेहरु भवन से निकाला जाता था लेकिन तेज रफ्तार के जमाने में अखबार दौड़ नहीं पाया तकनीकि मामलों में कमजोर होने की वजह से इसका सर्कुलेशन भी कम होता चला गया और बंद होने की नौबत आ गई.

 

2008 तक नेशनल हेराल्ड के दिल्ली एडिशन को छोड़कर बाकि सारे एडिशन बंद किए जा चुके थे औऱ 2008 में दिल्ली एडिसन को भी बंद करने का फैसला ले लिया गया.

 

साल 2008 में नेशनल हेरल्ड अखबार का प्रकाशन पूरी तरह से बंद कर दिया गया था. लेकिन इसी के बाद शुरु हुआ नेशनल हेराल्ड का केस आज अदालत तक जा पहुंचा हैं हांलाकि सोनिया और राहुल गांधी को इस केस में जमानत मिल चुकी है लेकिन इस विवाद की फांस ना सिर्फ गांधी परिवार के गले में अटक गई है बल्कि इसने कांग्रेस पार्टी की मुश्किले भी बढ़ा दी हैं. खास बात ये भी है कि 1977 में इंदिरा गांधी के जेल जाने के बाद ये दूसरा मौका है जब गांधी परिवार आरोपी की हैसियत से अदालत में हाजिर होने के लिए मजबूर हुआ है.

Vyakti Vishesh News से जुड़े हर समाचार के लिए हमे फेसबुक, ट्विटर, गूगल प्लस पर फॉलो करें साथ ही हमारा Hindi News App डाउनलोड करें
Web Title: detail information on national herald case
Explore Hindi News from politics, Bollywood, sports, education, trending, crime, business, साथ ही साथ और भी दिलचस्प हिंदी समाचार
First Published:

Related Stories

व्यक्ति विशेष: ‘वन मैन आर्मी’ या विवादों के ‘स्वामी’
व्यक्ति विशेष: ‘वन मैन आर्मी’ या विवादों के ‘स्वामी’

सुब्रमण्यम स्वामी  भारतीय राजनीति का एक बेहद दिलचस्प किरदार हैं. कोई इन्हें विवादों का स्वामी...

व्यक्ति विशेष: हेलिकॉप्टर घूसकांड से कांग्रेस के पांच कनेक्शन?
व्यक्ति विशेष: हेलिकॉप्टर घूसकांड से कांग्रेस के पांच कनेक्शन?

दुनिया के सबसे बेहतरीन हेलिकॉप्टरों में से इसे एक माना जाता है. इसकी गिनती विश्व के 10...

मेरा घर मेरा हक: इन वजहों से नहीं मिल रहा है आपको अपना घर!
मेरा घर मेरा हक: इन वजहों से नहीं मिल रहा है आपको अपना घर!

नई दिल्ली: एक आम आदमी की जिंदगी में उसके घर खरीदने का फैसला सबसे बड़ा और सबसे अहम होता है. घर...

व्यक्ति विशेष: जानिए, सिर्फ 60 रूपये रोज पर मजदूरी करते थे कपिल शर्मा!
व्यक्ति विशेष: जानिए, सिर्फ 60 रूपये रोज पर मजदूरी करते थे कपिल शर्मा!

नई दिल्ली: वो वापस आ रहा है. एक बार फिर हंसाने की गारंटी लेकर वो लौट रहा है. देश का एक बड़ा चैनल...

व्यक्ति विशेष: कैप्टन कूल से कहां हुई भूल, क्या रही चूक?
व्यक्ति विशेष: कैप्टन कूल से कहां हुई भूल, क्या रही चूक?

नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट टीम का वो नायक है. उसे हिन्दुस्तान का अब तक का सर्वश्रेष्ठ कप्तान...

व्यक्ति विशेष: ISIS की वो कहानी जिसे जानकर आपकी रूह कांप जाएगी
व्यक्ति विशेष: ISIS की वो कहानी जिसे जानकर आपकी रूह कांप जाएगी

नकाब ओढ़ कर वो सभ्य समाज को चुनौती देता है. धर्म के नाम पर वो अधर्म का पूरी दुनिया में साम्राज्य...

 1 पैसा खोने पर पिता ने डायरी में लिख लिया था विजय माल्या का नाम!
1 पैसा खोने पर पिता ने डायरी में लिख लिया था विजय माल्या का नाम!

नई दिल्ली: मायालोक का वो जादूगर है. रंगीन दुनिया के उसके अनगिनत फसाने हैं. हसीनाओं का वो दीवाना...

व्यक्ति विशेष: 'मिनी मॉस्को' के कन्हैया की असली कहानी?
व्यक्ति विशेष: 'मिनी मॉस्को' के कन्हैया की असली कहानी?

इन दिनों पूरे देश में कन्हैया चर्चा में है. जोश, जुनून और कुछ कर गुजरने के जज्बे से लबरेज होकर...

व्यक्ति विशेष: यहां चॉकलेट भी हथौड़े से तोड़ा जाता है!
व्यक्ति विशेष: यहां चॉकलेट भी हथौड़े से तोड़ा जाता है!

नई दिल्ली: यहां आम इंसान नहीं सैनिक रहते हैं, क्योंकि इंसान के रहने की सीमाएं यहां खत्म हो जाती...

व्यक्ति विशेष: अनुपम ने अपनी मां के मंदिर से पैसे चुराकर किया था एक्टिंग का कोर्स!
व्यक्ति विशेष: अनुपम ने अपनी मां के मंदिर से पैसे चुराकर किया था एक्टिंग का...

अनुपम खेर टेलीविजन पर एक मशहूर शो को होस्ट करते हैं जिसका नाम है ‘कुछ भी हो सकता है’. अनुपम कुछ...

Get the Latest Coupons and Promo codes for 2017