अब लैब में विकसित होंगी मांसपेशियां

अब लैब में विकसित होंगी मांसपेशियां

By: | Updated: 01 Jan 1970 12:00 AM
न्यूयॉर्क: क्या आप ऐसी कल्पना कर सकते हैं कि प्रयोगाशला में ऐसी मांसपेशिया विकसित की जा सकती हैं, जो प्रयोगशाला और जानवर के शरीर, दोनों जगह जिंदा रहने की क्षमता रखती हैं. वैज्ञानिकों ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है. शोधकर्ताओं ने पहली बार ऐसी मांसपेशियां विकसित की हैं जो पशुओं में प्रत्यारोपित होने के बाद भी खुद को स्वस्थ कर सकती हैं.

 

ड्यूक युनिवर्सिटी में हुए इस शोध में बायोइंजीनिरिंग के जरिए विकसित हुईं मांसपेशियों का परीक्षण जीवित चूहे पर किया गया.

 

ड्यूक युनिवर्सिटी में बयोमेडिकल इंजीनियरिंग के सहायक प्रोफेसर नेनड बरसेक ने बताया, "रोगों के अध्ययन और चोटों के उपचार के लिए व्यवहार्य मांसपेशियों के लिए प्रयोगशाला में विकसित मांसपेशियां और प्रायोगिक तकनीक दोनों ही महत्वपूर्ण हैं."

 

बरसेक और स्नातक विद्यार्थी मार्क जुहास के नेतृत्व में शोध दल ने पया कि बेहतर मांसपेशियां बनाने के लिए दो चीजों की जरूरत होती है- विकसित संकुचनशील मांसपेशी रेशे और मांसपेशी मूल कोशिकाओं या सैटेलाइट कोशिकाओं का पूल.

 

हर मांसपेशी में सैटेलाइट कोशिका रिजर्व में होती है जो चोट लगने पर सक्रिय होने और पुर्ननिर्माण प्रक्रिया के लिए तैयार रहती है.

 

माइक्रोइनवाइरमेंट बनाना दल की सफलता का मुख्य कारण था.

 

जुहास ने बताया, "हमने जो विकसित मांसपेशियां बनाई हैं वे सैटेलाइट कोशिकाओं को जीवित रखने के लिए वातावरण उपलब्ध कराती हैं."

 

टीम ने मांसपेशियां जीवित चुहे के पीछे लगाई और उसे शीशे से ढक दिया.

 

जुहास ने बताया, "हमने देखा कि प्रत्यारोपित मांसपेशियों में किस तरह रक्तवाहिकाएं विकसित हुईं."

 

'प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज' जर्नल में प्रकाशित परिणामों में बताया गया कि इंजीनियर अब ऐसी मांसपेशियां बनाने के बारे में सोच रहे हैं जिनका उपयोग मांसपेशीय चोटों और बीमारियों के उपचार में हो सके.

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