इराक मुद्दे पर ओबामा ने अपने राष्ट्रीय सुरक्षा दल से किया विचार विमर्श

By: | Last Updated: Friday, 13 June 2014 3:11 AM

नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने इराक में वर्तमान हालात को लेकर अपने राष्ट्रीय सुरक्षा दल के साथ विचार विमर्श किया.

 

इराक में इस्लामिक उग्रवादियों ने देश के दूसरे सबसे बड़े शहर मोसुल पर कब्जा कर लिया है.

 

राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की प्रवक्ता कैटलिन हेडन ने बताया ‘‘राष्ट्रपति ने कल इराक के हालात पर अपने राष्ट्रीय सुरक्षा दल के साथ विचार विमर्श किया.’’ इस बैठक से पहले ओबामा ने संवाददाताओं से कहा था कि वह इराक में सभी विकल्पों पर विचार कर रहे हैं क्योंकि यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि जिहादी इराक और सीरिया में अपनी स्थायी पकड़ न बना लें.

 

ओबामा ने ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री टोनी एबोट के साथ संयुक्त संवाददाता सम्मेलन के दौरान कहा ‘‘हमारी ओर से और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की ओर से मदद किए जाने की जरूरत है.’’ राष्ट्रपति ने कहा ‘‘इसीलिए मेरी टीम यह पता लगाने के लिए प्रयासरत है कि हम उनको (इराक को) ज्यादा कारगर तरीके से सहायता कैसे मुहैया करा सकते हैं. मैं किसी बात से इंकार नहीं कर रहा हूं क्योंकि हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि जिहादी इराक और सीरिया में अपनी स्थायी पकड़ न बना लें.’’

 

इसके बाद, व्हाइट हाउस के प्रेस सचिव जे कार्नी ने स्पष्ट किया कि सहायता में सैनिक भेजना शामिल नहीं है.

 

 

कार्नी ने एक सवाल के जवाब में संवाददाताओं को बताया ‘‘हम वहां सैनिक भेजने पर विचार नहीं कर रहे हैं . राष्ट्रपति हवाई हमलों के बारे में पूछे गए सवाल का जवाब दे रहे थे और उन्होंने स्पष्ट कर दिया था कि हम इराक को वह सहयोग और सहायता देने के तहत अपने विकल्पों पर विचार कर रहे हैं जो हम इस लड़ाई में इराक को दे सकते हैं.’’ पूर्व में व्हाइट हाउस ने बताया कि अमेरिकी उप राष्ट्रपति जोए बाइडेन ने इराक के प्रधानमंत्री नूरी अल मलिकी से बात की और ‘इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड द लेवेन्ट’ (आईएसआईएल) के खिलाफ उनकी लड़ाई में इराक के साथ एकजुटता जताई.

 

व्हाइट हाउस ने कहा ‘‘प्रधानमंत्री ने इराक के वर्तमान सुरक्षा हालात पर चर्चा की और उप राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि अमेरिका ‘रणनीतिक रूपरेखा करार’ (स्ट्रैटेजिक फ्रेमवर्क एग्रीमेंट) के तहत इराक के लिए सुरक्षा सहयोग तथा समन्वय बढ़ाने के लिए तैयार है ताकि आईएसआईएल की ओर से बढ़ रहे खतरे से मुकाबला किया जा सके.’’ उत्तरी और उत्तर मध्य इराक में आईएसआईएल के जिहादी अंदर तक प्रवेश कर गए हैं और सुन्नी अरब बहुल भूभाग के बड़े हिस्से पर कब्जा कर चुके हैं.

 

इस बीच, इराक के स्वायत्तशासी कुर्दिश इलाके के बलों ने किरकुक पर नियंत्रण कर लिया है.

 

अमेरिका ने यह भी कहा कि सुरक्षा संबंधी चिंता के चलते वह कुछ हिस्सों से अपने नागरिकों को अस्थायी तौर पर अन्यत्र भेज रहा है.

 

विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता जेन साकी ने कहा ‘‘हम पुष्टि कर सकते हैं कि इराक में ‘यूएस फॉरेन मिल्रिटी सेल्स’ :एफएमएस: कार्यक्रम के लिए वहां की सरकार के साथ हुए करार के तहत अमेरिकी नागरिकों को सुरक्षा संबंधी चिंता के चलते उनकी कंपनियां अस्थायी तौर पर अन्यत्र भेज रही हैं.’’ बहरहाल, उन्होंने बताया कि अमेरिकी दूतावास और वाणिज्य दूतावास में कर्मचारियों की संख्या में बदलाव नहीं किया गया है.

 

अमेरिका ने इराक में आंतरिक तौर पर विस्थापित लोगों और संघर्ष पीड़ितों की जरूरतें पूरी करने के लिए 1.28 करोड़ डालर की अतिरिक्त सहायता देने का आज ऐलान भी किया.

 

साकी ने बताया कि नयी सहायता के तहत खाद्य आपूर्ति, आश्रय, दवाएं आदि की तत्काल राहत दी जाएगी.

 

इस बीच, ओबामा प्रशासन को अपनी इराक नीति को लेकर रिपब्लिकन सांसदों से झटका भी लगा है क्योंकि सीनेटर जॉन मैक्केन और लिंडसे ग्राहम ने कहा है कि इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक और सीरिया :आईएसआईएस: में हो रहे घटनाक्रम के मद्देनजर अमेरिका को सतर्क हो जाना चाहिए.

 

सीनेटरों ने आरोप लगाया ‘‘आईएसआईएस ने पश्चिम और उत्तरी इराक में बड़े शहरों पर कब्जा कर लिया है. उसने इराकी जेलों से हजारों चरमपंथियों को रिहा कर दिया और मोसुल में बैंकों से करोड़ों डॉलर लूट लिये. उसने सेना के ठिकानों और पुलिस थानों से अमेरिका द्वारा मुहैया कराए गए उपकरणों सहित टनों सैन्य उपकरणों पर कब्जा कर लिया है. अब आईएसआईएस के लड़ाके बगदाद के बेहद करीब हैं.’’

 

कांग्रेस सदस्य एड रॉयस ने कहा ‘‘पूर्व में अमेरिका के बलिदानों को देखते हुए यह बात अत्यंत पीड़ादायक है कि आतंकवादी समूह इराक में बड़े शहरों पर कब्जा कर रहे हैं और बगदाद की ओर बढ़ रहे हैं लेकिन यह आश्चर्यजनक नहीं है.’’ रॉयस प्रतिनिधि सभा में विदेश मामलों की समिति के अध्यक्ष हैं.

 

उन्होंने कहा ‘‘महीनों से हम देख रहे हैं कि अलकायदा से जुड़ा यह गुट सीरिया और इराक में इलाकों को कब्जे में ले रहा है, वह अपने लड़ाकों की संख्या बढ़ा रहा है और धन तथा हथियारों में भी वृद्धि कर रहा है. इराक में आतंकवादी शिविर खुलेआम चल रहे हैं. यह बात विस्मयकारी है कि इराक अलकायदा के इन शिविरों को ड्रोन से निशाना बनाने के लिए महीनों से आग्रह कर रहा है और ओबामा प्रशासन आग्रह को ठुकराता रहा है.’’

 

रॉयस ने कहा ‘‘आज पूरा क्षेत्र जल रहा है. आतंकवादी गुट मजबूत हो रहे हैं और विश्व बाजार के लिए महत्वपूर्ण इराक का ‘एनर्जी आउटपुट’ संकट में है.’’ उन्होंने ओबामा प्रशासन पर इस बात की अनदेखी करने का आरोप लगाया और कहा कि इसका अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा हितों पर असर पड़ा है.

 

उन्होंने कहा ‘‘इस साल के शुरू में जब आईएसआईएस ने फजलुल्ला पर कब्जा किया था तब ही ओबामा प्रशासन को सतर्क हो जाना चाहिए था.”

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