इराक में कैसे बिगड़े हालात? क्या चाहता है आतंकवादी संगठन ISIL?

By: | Last Updated: Wednesday, 18 June 2014 3:33 AM
इराक में कैसे बिगड़े हालात? क्या चाहता है आतंकवादी संगठन ISIL?

नई दिल्ली: इराक इस वक्त बेहद गम्भीर संकट का सामना कर रहा है. हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि अगर विद्रोहियों को जल्द नहीं रोका गया, तो इराक बिखर जाएगा, टूट जाएगा या फिर बर्बाद हो जाएगा. मगर सवाल ये कि आखिर हालात इतने खराब क्यों हो गए? इस सवाल का जवाब पाने के लिए आपको एक साल पहले चलना पड़ेगा.

 

इराक के मौजूदा हालात की कहानी दिसम्बर 2013 से शुरू होती है, जब सुन्नी आतंकी संगठनों ने फलूजा औऱ रमादी शहर के कुछ हिस्सों पर कब्जा कर लिया. आतंकी गुटों को स्थानीय सुन्नी कबालियों का समर्थन मिला जो इराकी शिया प्रधानमंत्री नूरी मलीकी से बेहद नाराज थे. उनका मानना था कि न सिर्फ उऩके खिलाफ पक्षपात किया गया बल्कि ताकत पूरी तरह शियाओं तक सीमित रखी गई.

 

6 महीने बाद ISIL (इस्लामिक स्टेट इन इराक एंड लेवांत) को जो सफलता फलूजा औऱ रमादी मे मिली उससे उत्साहित होकर उन्होंने मोसुल पर धावा बोला. हैरत की बात ये है कि 30,000 सैनिकों ने 800 आतंकियो के सामने हथियार डाल दिए. इसी से उत्साहित होकर चरमपंथियों के गुट लेवांत के विद्रोहियों ने दक्षिण की तरफ कूच कर किया. दक्षिण की तरफ तो बगदाद था जाहिर है खलबली तो मचनी थी.

 

चिंता की बात ये है कि पांच साल पहले अमरीका मे दावा किया था कि ISIL जो एक जमाने मे अल कायदा के साथ जुडा था, खात्मे की कगार पर है लेकिन आज वो बगदाद मे रोज धमाके कर रहा है. उसका बगदाद के आसपास 100 मील के इलाकों पर कब्जा है. पश्चिम और उत्तरी इराक पर उसका परचम लहरा रहा है और वो सीरिया से लेकर ईराक तक एक इस्लामी राष्ठ्र कायम करना चाहता है.

 

ISIL को ताकत उन सैनिको से भी मिल रही है जिन्होंने सरकार को त्याग दिया है और उन्हें बल उन जंगबाजो से भी मिल रहा है जो किसी जमाने मे सद्दाम हुसैन के साथ थे.

 

कहने को लेवांत मे कुल 15,000 जंगबाज हैं और ईराक के पास 9,30,000 सैनिक. लेकिन ऐसा लग रहा है कि ISIL के जज्बे के सामने इराकी सैनिक बिखर रहे हैं और मोसूल समेत कई इराकी शहरों पर कब्जा इसी की मिसाल है.