ओबामा ने ताज़ा बयान में कहा- यूक्रेन में कोई सैन्य कार्रवाई नहीं, कूटनीतिक समाधान का है प्रयास

By: | Last Updated: Thursday, 20 March 2014 6:57 AM
ओबामा ने ताज़ा बयान में कहा- यूक्रेन में कोई सैन्य कार्रवाई नहीं, कूटनीतिक समाधान का है प्रयास

वाशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने यूक्रेन में किसी सैन्य कार्रवाई की संभावना से इनकार किया है और कहा है कि अमेरिका एवं उसके सहयोगी, संकट के समाधान के लिए अब भी कूटनीति को प्राथमिकता देते हैं. ओबामा ने कल सैन डिएगो स्थित एनबीसी चैनल के सहयोगी केएनएसडी को दिए गए एक इंटरव्यू में कहा, ‘‘हम यूक्रेन में किसी सैन्य कार्रवाई में शामिल नहीं होने जा रहे हैं.’’

 

उन्होंने कहा, ‘‘हम यह सुनिश्चित करने के लिए अपने सभी कूटनीतिक संसाधनों का इस्तेमाल करने जा रहे हैं कि हमारा एक मजबूत अंतरराष्ट्रीय संगठन है जो एक स्पष्ट संदेश भेजता है कि यूक्रेन को अपने भाग्य का फैसला खुद करना चाहिए.’’ ओबामा ने कहा, ‘‘वहां एक बेहतर रास्ता है, लेकिन मेरा मानना है और यहां तक कि यूक्रेन के लोग भी इसे मानेंगे कि हमारे लिए रूस से सैन्य तरीके से निपटना उचित नहीं होगा और यह यहां तक कि यूक्रेन के लिए भी अच्छा नहीं होगा.’’

 

एक दूसरे स्थानीय चैनल केएसडीके को दिए एक इंटरवूयू में ओबामा ने कहा कि फिलहाल यूक्रेन में सैन्य कार्रवाई करने के किसी विकल्प पर विचार नहीं किया जा रहा है. उन्होंने कहा, ‘‘हमें रूस के साथ वास्तविक युद्ध करने की आवश्यकता नहीं है. यूक्रेन के लोग यह नहीं चाहते, कोई भी यह नहीं चाहता. लेकिन हम सैद्धांतिक रूप से यूक्रेन के लोगों के साथ खड़े हैं.’’ ओबामा की यह टिप्पणी तब आई है जब व्हाइट हाउस के प्रेस सचिव जे कार्नी ने कहा कि संकट के समाधान के लिए अमेरिका का ध्यान अब भी कूटनीति पर केंद्रित है.

 

जर्मनी ने कहा कि वह रूस के साथ हथियारों का एक बड़ा सौदा सस्पेंड कर रहा है. इससे ये संकेत मिल रहे हैं कि अमेरिका के यूरोपीय सहयोगी अपनी उर्जा जरूरतों के लिए रूस पर बहुत अधिक निर्भर होने के बावजूद उसके खिलाफ अधिक गंभीर दंडात्मक कदम उठाना चाहते हैं. लेकिन रूस इन कार्रवाइयों के लिए तैयार दिख रहा है. रूस ने अमेरिका को चेतावनी भी दी कि अगर अमेरिका उसके खिलाफ व्यापक आर्थिक प्रतिबंध लगाता है तो रूस भी ‘बहुत सारे’ जवाबी उपाय करेगा.

 

इससे पहले रूस ने क्रीमिया पर अपनी पकड़ तेज करने के साथ ही रूस समर्थक बलों को क्रीमिया के दो नेवी कैंपों पर कब्जा कर लिया और यूक्रेन के नौसेना अध्यक्ष को बंदी बना लिया.

 

#युद्ध की धमकियों के बाद अब क्रीमिया से सेना बुलाने की तैयारी कर रहा यूक्रेन

 

कीव: यूक्रेन, क्रीमिया में रह रहे अपने सैनिकों और उनके परिवारों को वहां से वापस बुलाने की योजना बना रहा है. ‘बीबीसी’ के अनुसार, यूक्रेन के रक्षा प्रमुख एंड्री पारुबी ने कहा कि यूक्रेन अपने सैनिकों और उनके परिवारों को जल्द से जल्द क्रीमिया से वापस बुला लेना चाहता है. एंड्री ने कहा, “हम इसके लिए योजना बना रहे हैं कि क्रीमिया में रह रहे न केवल अपनी सेना के जवानों को वापस बुला सकें, बल्कि उनके परिवार के सदस्यों को भी जल्द से जल्द यूक्रेन ला सकें.”

 

उन्होंने बताया कि यूक्रेन आने वाले रूसी नागरिकों के लिए वीजा जारी करने की तैयारी भी की जा रही है. उन्होंने यह भी कहा कि यूक्रेन, रूस के नेतृत्व वाले कॉमनवेल्थ इंडिपेंडेंट स्टेट्स गठबंधन से अलग हो रहा है और वह अमेरिका और ब्रिटेन के साथ सैन्य अभ्यास की तैयारी कर रहा है.

 

#अमेरिकी रक्षा मंत्री चक हेगल ने यूक्रेन के रक्षा मंत्री से बात की, कहा अमेरिका यूक्रेन के साथ है

 

वाशिंगटन: यूक्रेन द्वारा क्रीमिया से अपनी सेना वापसी की घोषणा के बीच अमेरिकी रक्षा मंत्री चक हेगल ने अपने यूक्रेनी समकक्ष इहोर तेनयूख से बात कर उन्हें अमेरिका के पूर्ण समर्थन का भरोसा दिलाया. पेंटागन के प्रेस सचिव रियर एडमिरल जॉन किर्बी ने कल दोनों नेताओं के बीच बातचीत के बाद संवाददाताओं से कहा, ‘‘हेगल ने यूक्रेनी सशस्त्र बलों द्वारा दिखाए गए संयम की सराहना की और एक यूक्रेनी सैनिक की मौत पर संवेदना प्रकट की.’’

 

हेगल ने यूक्रेनी रक्षा मंत्री से कहा कि अमेरिका यूक्रेन के लोगों के साथ है और वह ताकत के इस्तेमाल के लिए रूसी संघ की निंदा करता है और रूसी बलों को हटाने की मांग पर अडिग है. किर्बी ने कहा, ‘‘हेगल ने तेनयूख को भरोसा दिलाया कि वह स्थिति पर करीब से नजर रखे हुए हैं और यह जरूरी है कि दोनों नेता एक दूसरे के संपर्क में बने रहें.’’ इस बीच, अमेरिकी विदेश विभाग ने राजनीतिक मामलों की उप विदेश मंत्री वेंडी आर शरमन को यूक्रेन भेजने की घोषणा की. वेंडी इसके बाद बेल्जियम के दौरे पर भी जाएंगी.

 

#रूस को नाटो की नई चेतावनी, यूक्रेन में अपने कदमों के परिणाम भुगतेगा रूस

 

वाशिंगटन,: नाटो ने चेतावनी दी है कि रूस को यूक्रेन में सैन्य कार्रवाई के लिए परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं. साथ ही नाटो ने जोर देकर कहा कि क्रीमिया को रूस में मिलाने के लिए ‘‘बंदूक की नोक पर कराया गया तथाकथित जनमत संग्रह अवैध और अनुचित है.’’ नाटो महासचिव एंडर्स फोग रासमुसैन ने कल कहा, ‘‘रूस को अपने व्यवहार के लिए निश्चित तौर पर परिणाम भुगतने होंगे. मेरा मतलब है कि जब मैं रूस के साथ अपनी साझेदारी वाले मूल दस्तावेजों का अध्ययन करता हूं तो मुझे दिखाई देता है कि रूस ने सभी मूल सिद्धांतों का घोर उल्लंघन किया है.’’

 

रासमुसैन ने एक बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि यूक्रेन में रूसी कार्रवाई को देखते हुए नाटो ने अपनी तैयारी मजबूत करने के कदम उठाए हैं. उन्होंने कहा, ‘‘बाल्टिक हवाई नीति अभियान, पोलैंड और रोमानिया के उपर निगरानी और जागरूकता बढ़ाने के लिए ज्यादा चीजें शामिल की गई हैं. सहयोगी देशों ने कूटनीतिक और आर्थिक प्रतिबंध लगाने की दिशा में कदम आगे बढ़ाए हैं.

 

ये हमारी प्राथमिकताएं नहीं हैं. ये रूस द्वारा चुने गए विकल्पों के जरूरी और सटीक परिणाम हैं.’’ उन्होंने कहा, ‘‘यूक्रेन में रूस का सैन्य हस्तक्षेप उसकी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं का खुला उल्लंघन है. यह यूक्रेन की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन है.’’

 

#दबाव की कूटनीति में जी-8 समूह से रूस को बाहर निकालने पर हो सकती है चर्चा

 

लंदन: ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने कहा है कि यदि रूस, यूक्रेन को अस्थिर करने की और कोशिश करता है तो अगले सप्ताह जी-7 देशों की होने वाली बैठक में रूस को जी-8 समूह से स्थाई रूप से निकाल दिए जाने पर चर्चा की जानी चाहिए. अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने सोमवार और मंगलवार को हेग में होने वाले परमाणु सुरक्षा सम्मेलन से अलग जी-7 देशों की बैठक बुलाई है. इन सात देशों में जी-8 के वर्तमान अध्यक्ष रूस को नहीं बुलाया गया है. जी-7 देशों की इस बैठक में रूस द्वारा क्रीमिया को रूसी हिस्सा बनाने के मुद्दे पर चर्चा होनी है.

 

कैमरन ने कल संसद को बताया, ‘‘मुझे लगता है कि हमारा अपने सहयोगियों और साझेदारों के साथ मिलकर आगे बढ़ना महत्वपूर्ण है. हमें इस बात पर चर्चा करनी चाहिए कि यदि रूस इसी दिशा में और कदम बढ़ाता है तो उसे जी-8 समूह से स्थाई रूप से निष्कासित किया जाना चाहिए या नहीं.’’ उन्होंने कहा, ‘‘यह बैठक सोमवार को होगी और मुझे लगता है कि आगे बढ़ने का यही सही तरीका है.’’

 

#क्रीमिया को पूरज़ोर तरीके से खुद में मिलाने के प्रयास में एक और कदम, रूस ने क्रीमियाई नागरिकों को सौंपा पासपोर्ट

 

मास्को: क्रीमिया के यूक्रेन से अलग होकर रूस में शामिल होने के लिए हुई संधि के बाद रूस ने क्रीमिया के नागरिकों को अपना पासपोर्ट सौंपना शुरू कर दिया है. रूस की संघीय आव्रजन सेवा (एफएमएस) के प्रमुख कोन्सटैन्टिन रोमोदानोवस्की ने बुधवार को कहा, “संधि पर मंगलवार को हस्ताक्षर हुए. पासपोर्ट के लिए आवेदन की शुरुआत मंगलवार से ही हुई. क्रीमिया के उन सभी लोगों को रूसी पासपोर्ट मिलेगा, जिन्होंने एफएमएस में इसके लिए आवेदन किया है.”

 

उन्होंने कहा, “पासपोर्ट सौंपने की प्रक्रिया शुरू हो गई है. कुछ लोगों को बुधवार को पासपोर्ट सौंपा गया.” रोमोदानोवस्की ने हालांकि यह नहीं बताया कि कितने लोगों ने रूसी पासपोर्ट के लिए आवेदन किया है, लेकिन उन्होंने यकीन जताया कि आने वाले दिनों में यूक्रेन के लोगों को सौंपे जाने वाले पासपोर्ट की संख्या बढ़ेगी. उन्होंने हालांकि यहां बड़ी संख्या में आ रहे शरणार्थियों को लेकर चिंता जताई. एफएमएस के प्रमुख ने कहा, “रूस आने वाले बच्चों और बुजुर्गो की संख्या दोगुनी हो गई है. यूक्रेन से बड़ी संख्या में लोग बिना किसी उद्देश्य के रूसी सीमा में प्रवेश कर रहे हैं.”

 

उन्होंने इस बारे में अपनी चिंता से संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त को भी अवगत कराने की बात कही.

 

#उल्टा दबाव बनाने के लिए रूस की पश्चिम को चेतावनी, ईरान के मुद्दे पर बदल सकता है रूख

 

मॉस्को: यूक्रेन मुद्दे पर पश्चिम के साथ तनाव के बीच रूस ने चेतावनी दी है कि वह ईरानी परमाणु वार्ता पर अपना रूख बदल सकता है. इंटरफैक्स समाचार एजेंसी के अनुसार रूस के उपविदेश मंत्री सर्गेई रियाबकोव ने कल कहा कि रूस मुद्दे को लेकर ईरानी परमाणु वार्ता का इस्तेमाल नहीं करना चाहता, लेकिन अमेरिका और यूरोपीय देशों की कार्रवाई के जवाब में उसे ऐसा करना पड़ सकता है.

 

यूक्रेन के क्रीमिया क्षेत्र को रूस द्वारा अपना हिस्सा बनाए जाने पर अमेरिका और यूरोपीय संघ द्वारा प्रतिबंधों की घोषणा किए जाने के बाद मॉस्को की ओर से जवाबी कार्रवाई से जुड़ा यह सबसे गंभीर बयान है. ईरानी वार्ता के लिए रूस के दूत रियाबकोव ने कहा कि मॉस्को का मानना है कि उसके लिए ईरानी परमाणु कार्यक्रम से संबंधित घटनाक्रमों के मुकाबले क्रीमिया का फिर से रूस में विलय ज्यादा महत्वपूर्ण है.

 

रूस ने ईरानी परमाणु वार्ता में अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों का साथ दिया है, लेकिन रियाबकोव ने आगाह किया कि अब यह रूख बदल सकता है.

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