क्या बीस हजार करोड़ जमा करा पाएगा सहारा?

By: | Last Updated: Tuesday, 4 March 2014 6:02 PM

सहारा प्रमुख सुब्रत रॉय तिहाड़ पहुंच गए हैं. जेल के पीआरओ सुनील गुप्ता बता रहे हैं कि अगले हफ्ते तक सुबह 5.30 पर उठने से लेकर रात को सोने तक डेढ़ लाख करोड़ के मालिक वही करेंगे तो बाकी कैदी करेंगे. ‘सहारा श्री’ को जमीन पर सोना होगा और जेल मैनुअल के मुताबिक ही दाल रोटी खानी होगी. कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी भी कि ये ऐसा करने पर सहारा ने मजबूर किया है. सुप्रीम कोर्ट ने सीधे कहा है कि सहारा वो ठोस फॉर्मूला बताए जिसके सहारे वो 20 हजार करोड़ चुका पाएगा. अब तक कोर्ट ने वो कोई तर्क मंजूर नहीं किया है जो सहारा की तरफ से दिए जा रहे थे. अब सवाल ये है कि सहारा ये रकम चुकाएगा कैसे? 

 

 

मुंबई से करीब 120 किलोमीटर दूर है एम्बे वैली. कोई छोटी मोटी बस्ती नहीं है बल्कि पूरा शहर है. करीब दस हजार एकड़ में फैला हुआ. जिसमें अपनी हवाई पट्टी भी है. एम्बे वैली को सहारा इंडिया परिवार ने ही बनाया है. सहारा इसे अपनी शान मानता आया है. लेकिन कोर्ट के आदेश के बाद उसने ऑफर किया कि इस एम्बै वैली के तीन प्लॉट के जरिए ही वो 11 हजार करोड़ तो चुका ही देगा. दिलचस्प ये है कि सेबी को ये ऑफर पसंद ही नहीं आया. सेबी के मुताबिक सहारा ने सिर्फ बंजर प्लॉट की कीमत को बढ़ा चढ़ा कर बता दिया. साथ ही जिस एम्बे वैली का प्रोजेक्ट कई मुकदमो में फंसा है और यहां तक की पॉल्युशन कंट्रोल बोर्ड से ग्रीन क्लीयरेंस भी नहीं मिला है.

 

 

दिसम्बर 2013 में सहारा ने सुप्रीम कोर्ट को भरोसा दिलाने के लिए 71 प्रॉपर्टी का ब्यौरा सेबी को दिया था. सहारा का कहना था कि वो इन प्रॉपर्टी के टाइटल डीड सेबी के पास रखने को तैयार हैं पर सेबी ने इन तमाम जमीन के टुकड़ों की कीमत पर आपत्ति उठाई. वर्सोवा के एक प्लॉट की कीमत करीब 20 हजार करोड़ बताई थी जिसे सेबी ने सिर्फ 118 करोड़ माना. 67 दूसरे प्लॉट्स को भी सहारा ने पेश किया, जबकि सेबी ने कहा कि कीमत को 16 गुणा बढ़ाकर बताया गया.

 

 

अब तक बीस हजार करोड़ चुकाने का कोई तरीका जो भी फॉर्मूला सहारा की तरफ से पेश किए गए हैं उन्हें ना तो सेबी ने माना है और ना ही सुप्रीम कोर्ट में वो ठहर पाए हैं.

 

क्या सहारा इन 71 प्रॉपर्टी को छोड़कर पैसे जुटा पाएगा? सहारा इंडिया रियल इस्टेट, इंफ्रास्ट्रक्चर, मीडिया, होटल, जैसे धंधों में उतरा हुआ है. लेकिन सहारा की पहचान होती है जमीनी स्तर पर पैसे जुटाने की ताकत के कारण. इस ताकत का कैसे इस्तेमाल करता है इसको बताते हैं ये आंकड़े.

 

बिजनेस स्टैंडर्ड अखबार के मुताबिक अप्रैल 2011 से सितम्बर 2012 के महीनों में सहारा इंडिया परिवार की संपत्ति 14286 करोड़ बढ़ गई. ये वो दौर है जब सहारा इंडिया परिवार सेबी के साथ 24000 करोड़ के झगड़ों में उलझा हुआ था. इन 17 महीनों में सहारा ग्रुप ने 60,091 करोड़ रूपये निवेशकों से इकट्ठा किए जबकि निवेशकों को लौटाए 45805 हजार करोड़ रुपये. इसकी सबसे बड़ी वजह थी पूरे देश में दस लाख एजेंट और कर्मचारियों की फौज जिसने 4618 सेंटरों के जरिए हर महीने औसतन साढे तीन हजार करोड रूपये की रकम इकट्ठा की.

 

2011 के विज्ञापन में ही सहारा ने अपनी एसेट 2 लाख 82 हजार 652 करो़ड बताई थी. 

 

इकॉनोमिक्स टाइम्स की खबर के मुताबिक अमेरिका में गैस स्टेशन, सेटेलाइट को किराए पर लेना, निर्यात के धंधे में जुटना जैसे कामों में सहारा नाकाम हो चुका है. मीड़िया, एयरलाइंस के धंधे में हाथ आजमाना, रिटेल में उतरने में भी नाकामयाबी ही मिली.

 

सहारा जिस काम को कामयाबी से कर रहा है वो है जमीन खरीदना और एंजेटों के जाल से पैसा जुटाना. लेकिन क्या इन ताकतों के जरिए वो अब बीस हजार करोड़ चुका पाएगा.

 

सहारा ग्रुप की सबसे बड़ी ताकत और पहचान है उसका लैंड बैंक. 2012 में विज्ञापन के जरिए सहारा ग्रुप ने दावा किया है कि उसके पास करीब 36631 एकड़ की जमीन हैं जिसकी कीमत बताई गई करीब 36 हजार करोड़ रुपये.

 

 

इकॉनोमिक्स टाइम्स की खबर के मुताबिक एक तरफ दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट में मामला चल रहा था वहीं मुंबई में सहारा ग्रुप के अधिकारी ऐसी प्रॉपर्टी की लिस्ट बनाने मे जुटे थे जिन पर कोई विवाद ना हो और जिन्हें बेच कर सहारा ग्रुप बीस हजार करोड़ की रकम चुका सके. लेकिन इसके लिए सहारा को अपने जमीनों के बैंक का बड़ा हिस्सा बाजार में बेचना पड़ सकता है.

 

इकॉनोमिक्स टाइम्स की खबर में आकलन किया गया है कि सहारा की संपत्ति का एक हिस्सा लंदन और न्यूयॉर्क में पहुंच चुका है. लंदन में ग्रासवेनर हाउस और प्लाजा एंड ड्रीम्स डाउनटाउन न्यूयॉर्क में खरीदा गया.

 

पहुंचने के बाद इन पर लोन भी लिया गया है. विदेशों में खरीदी गई प्रॉपर्टी से पैसा वापिस भारत लाना आसान नहीं होगा.  

 

इसी तरह सहारा की साख दांव पर लगी है. एंजेटों के अपने नेटवर्क के जरिए और पैसा जुटाना भी सहारा के लिए अब आसान नहीं होगा.

 

दिलचस्प ये है कि सहारा मुश्किल में फंसा होगा लेकिन सुब्रत रॉय इसमें मदद नहीं कर पाएंगे.

 

सुब्रत रॉय के पास

 

आभूषण व अन्य – 1.07 करोड़ रुपये

कैश व बैंक बैलेंस – 34 लाख रुपये

फिक्स्ड डिपॉजिट – 1.59 करोड़ रुपये

अचल संपत्ति – कुछ नहीं

बदौली में चीनी मिलें खरीदने के लिए कर्ज 11 करोड़ रुपये

 

अब ये पूरा मामला अदालत में है. सुप्रीम कोर्ट में 21 फरवरी को सहारा के वकीलों ने स्वीकार किया था कि जो संपत्तियां सेबी को दी गई हैं उन्हें बेचा नहीं जा सकता क्योंकि वो दूसरे लोगों से भी ताल्लुक रखती हैं. इसके बाद ही कोर्ट ने सुब्रत रॉय को कोर्ट में हाजिर होने को कहा था. हाजिर नहीं होने पर गिरफ्तारी हुई और अब सुब्रत रॉय 11 मार्च तक तक जेल में हैं.

 

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