गठबंधन धर्म की खातिर भारत ने 'दोस्त' खोया!

गठबंधन धर्म की खातिर भारत ने 'दोस्त' खोया!

By: | Updated: 01 Jan 1970 12:00 AM

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<b>नई दिल्ली:</b> करुणानिधि की
डीएमके के दवाब में भारत ने
अपने पड़ोसी देश श्रीलंका का
साथ नहीं दिया.
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मानवाधिकार उल्लंघन के
मामले में संयुक्त राष्ट्र
मानवाधिकार आयोग में हुई
वोटिंग में भारत ने श्रीलंका
के खिलाफ वोट किया.
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47 सदस्यीय आयोग में श्रीलंका
के खिलाफ 24 वोट पड़े जिसमें
भारत भी शामिल है जबकि चीन ने
श्रीलंका का साथ दिया.
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संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार
आयोग में जो प्रस्ताव पास हुआ
उसमें श्रीलंका से कहा गया है
कि वो एलटीटीई के खिलाफ की गई
कार्रवाई के आखिरी दिनों में
मानवाधिकार हनन की शिकायतों
की जांच कराए.
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करुणानिधि की पार्टी डीएमके
केंद्र सरकार पर लगातार
श्रीलंका के खिलाफ वोट डालने
का दवाब बना रही थी. उसके
मुताबिक एलटीटीई के खिलाफ
कार्रवाई के दौरान श्रीलंका
की सेना ने बड़ी संख्या में
तमिलों की हत्या की और लाखों
लोगों का घर बार उजाड़ दिया.
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हालांकि डीएमके के दवाब में
भारत ने श्रीलंका के खिलाफ
वोटिंग तो की लेकिन इसका बड़ा
कूटनीति और रणनीतिक नुकसान
ये है कि अब चीन को श्रीलंका
से दोस्ती बढ़ाने का अच्छा
मौका मिल गया है जो भारत के
लिए बड़ी चिंता की वजह होगी.
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प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह
ने इस मुद्दे पर कहा है कि वे
श्रीलंका के मामलों में दखल
नहीं देना चाहते और उनकी
चिंता बस इतनी है कि तमिलों
को इंसाफ मिले.<br />
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