गिरफ्तारी के आदेश के बाद अदालत से भागे मुशर्रफ

गिरफ्तारी के आदेश के बाद अदालत से भागे मुशर्रफ

By: | Updated: 01 Jan 1970 12:00 AM

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<b><b></b>इस्लामाबाद:</b>
पाकिस्तान के पूर्व
राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ
गुरुवार को उस वक्त
इस्लामाबाद उच्च न्यायालय
से भाग खड़े हुए, जब न्यायालय
ने वर्ष 2007 में न्यायाधीशों
को बंधक बनाने के मामले में
मुशर्रफ की जमानत अवधि
बढ़ाने की उनकी याचिका खारिज
करते हुए उन्हें गिरफ्तार
करने के आदेश दे दिए.<br /><br />जियो
न्यूज के अनुसार, मुशर्रफ (69)
अपने सुरक्षाकर्मियों के
साथ जमानत अवधि में विस्तार
का अनुरोध लेकर अदालत में पेश
हुए थे. लेकिन अदालत का आदेश
आते ही वह अपने
सुरक्षाकर्मियों के साथ
वहां से निकल गए.<br /><br />पुलिस के
अनुसार, मुशर्रफ अदालत परिसर
से निकलने के बाद इस्लामाबाद
के बाहरी इलाके चाक शाहजाद
स्थित अपने फार्महाउस गए,
जहां उन्हें गिरफ्तार किया
जा सकता है.<br /><br />इस बीच,
मुशर्रफ के प्रवक्ता रेजा
बुखारी ने संवाददाताओं से
कहा कि वह अदालत से भागे नहीं
हैं और कानून का सामना
करेंगे. उन्हें पाकिस्तान
सरकार से सुरक्षा प्राप्त है.
उन्होंने यह भी कहा कि अदालत
ने विवेक से निर्णय नहीं
लिया.<br /><br />बुखारी ने कहा,
"मुशर्रफ के अदालत परिसर से
लौटने के बाद मैंने उनसे बात
की. वह कानूनी उपाय अपनाएंगे.
अपील की प्रक्रिया है."<br /><br />इससे
पहले की सुनवाई में अदालत ने
मुशर्रफ की अंतरिम जमानत
अवधि 18 अप्रैल तक के लिए बढ़ा
दी थी.<br /><br />समाचार पत्र 'डॉन' के
अनुसार, यह मामला अधिवक्ता
चौधरी मोहम्मद असलम गुमान की
11 अगस्त, 2009 की शिकायत पर
आधारित है. उन्होंने
पाकिस्तान के सर्वोच्च
न्यायालय के मुख्य
न्यायाधीश न्यायमूर्ति
इफ्तिखार मोहम्मद चौधरी
सहित 60 न्यायाधीशों को
हिरासत में लेने तथा तीन
नवंबर, 2007 को देश में आपातकाल
लागू करने के लिए मुशर्रफ के
खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने
की मांग पुलिस से की थी.<br /><br />मुशर्रफ
कई मामलों में कानूनी
प्रक्रिया का सामना कर रहे
हैं, जिनमें आपातकाल लागू
करने के लिए देशद्रोह, वर्ष 2007
में पूर्व प्रधानमंत्री
बेनजीर भुट्टो की हत्या तथा
वर्ष 2006 में बलूच नेता नवाब
अकबर बुग्ती की संदेहास्पद
परिस्थितियों में मौत का
मामला शामिल है.<br /><br />मुर्शरफ
ने हालांकि उक्त मामलों में
खुद पर लगे आरोपों से इंकार
किया है. वह चार साल के
आत्म-निर्वासन के बाद हाल ही
में पाकिस्तान लौटे हैं, ताकि
देश में 11 मई को होने वाले
संसदीय चुनाव में अपनी
पार्टी ऑल पाकिस्तान
मुस्लिम लीग का नेतृत्व कर
सकें. लेकिन निर्वाचन आयोग ने
उनके चुनाव लड़ने पर रोक लगा
दी है. आयोग ने इस संबंध में
उनके चार आवेदन खारिज कर दिए
हैं.
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