घर वापस नहीं लौटना चाहते हैं दुबई की जेलों में बंद ज्यादातर भारतीय

By: | Last Updated: Friday, 24 January 2014 5:24 AM
घर वापस नहीं लौटना चाहते हैं दुबई की जेलों में बंद ज्यादातर भारतीय

दुबई: संयुक्त अरब अमीरात की जेलों में बंद करीब 80 प्रतिशत भारतीय स्वदेश लौटने के पात्र हैं लेकिन उनमें से महज 10 प्रतिशत ही वापस घर लौटना चाहते हैं. भारत वापस लौट कर अपनी बाकि की सजा काटने के प्रति इस अनिच्छा के कई कारण हैं जिनमें दुबई की जेलों में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होना भी शामिल है.

 

संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में भारतीय राजदूत टी. पी. सीथराम ने बताया कि नवंबर 2011 में भारत और यूएई के बीच ‘सजा भुगत रहे कैदियों के स्थानांतरण’ के समझौते पर हस्ताक्षर हुआ था . इसके तहत यहां के जेलों में बंद 80 प्रतिशत भारतीय कैदी देश वापस लौट कर अपनी सजा पूरा करने का आवेदन करने के पात्र हैं.

 

अबु धाबी स्थित केन्द्रीय कारा का कल दौरा करने के बाद राजदूत ने कहा, ‘‘हमें करीब 120 कैदियों के आवेदन मिले हैं जो अपनी सजा भारतीय जेलों में काटना चाहते हैं .’’ उन्होंने ‘खलीज टाइम्स’ को बताया कि यह संख्या यूएई के जेलों में बंद भारतीय कैदियों का महज 10 प्रतिशत है .

 

ज्यादातर कैदी यहीं अपनी सजा पूरी करना चाहते हैं क्योंकि.. जेलों में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हैं और कई लोगों ने अपने घर वालों को सजा के बारे में जानकारी ही नहीं दी है . कुछ कैदियों का कहना है कि उनके पास अपने परिवार को सूचित करने के लिए धन नहीं है जबकि अन्य लोगों को क्षमा याचना करने के लिए कानूनी सहायता की आवश्यकता है .

 

राजदूत ने कहा कि उन्होंने जिन जेलों का दौरा किया वहां की स्थिति काफी सामान्य थी . उन्होंने कहा, ‘‘मैंने वहां दो घंटे से ज्यादा समय गिताया और करीब 60 भारतीय कैदियों से बातचीत की . मुझे जेलों की स्थिति से संबंधित कोई शिकायत नहीं मिली .’’ उन्होंने कहा कि कैदियों से प्राप्त आवेदनों को दूतावास ने यूएई अधिकारियों को भेज दिया है .

 

उन्होंने कहा, ‘‘अब हमें यूएई के अधिकारियों से मंजूरी लेने की जरूरत है . इसके बाद हम भारत में विदेश मंत्रालय से संपर्क करेंगे, जो संबंधित राज्य सरकारों से बातचीत करेगी .’’

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