जरदारी को लगा झटका, कोर्ट ने लगाई पत्र पर मुहर

जरदारी को लगा झटका, कोर्ट ने लगाई पत्र पर मुहर

By: | Updated: 01 Jan 1970 12:00 AM

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<b>इस्लामाबाद:</b>
पाकिस्तान के सर्वोच्च
न्यायालय ने राष्ट्रपति
आसिफ अली जरदारी के खिलाफ
भ्रष्टाचार के मामले फिर से
खोलने के लिए स्विस प्रशासन
को भेजे जाने वाले सरकार के
नए पत्र के मसौदे पर बुधवार
को मुहर लगा दी. <br /><br />जियो
न्यूज द्वारा जारी रपट के
अनुसार, स्विस प्रशासन को
भेजे जाने वाले पत्र का मसौदा
बुधवार को न्यायालय के आदेश
का एक हिस्सा बन गया.
न्यायमूर्ति नासिर-उल-मुल्क,
न्यायमूर्ति आसिफ सईद खोसा,
और न्यायमूर्ति अजमत सईद शेख
ने राष्ट्रीय सुलह अध्यादेश
(एनआरओ) क्रियान्वयन मामले की
सुनवाई की. <br /><br />संघीय कानून
मंत्री फारुख एच. नाइक ने
पत्र का नया मसौदा न्यायालय
में पेश किया। न्यायमूर्ति
खोसा ने कहा कि पत्र के मसौदे
में सुधार हुआ है. <br /><br />पत्र का
मसौदा पढ़ा गया, जिसमें लिखा
गया है कि पूर्व अटार्नी जनरल
मलिक कयूम का पत्र वापस लिया
जा रहा है और यह माना जाना
चाहिए कि इस तरह का पत्र कभी
नहीं लिखा गया था. पत्र के
मसौदे में राष्ट्राध्यों,
देश के राष्ट्रपति को मामलों
से छूट का भी जिक्र है. मामले
की सुनवाई 14 नवम्बर तक के लिए
स्थगित कर दी गई. <br /><br />प्रधानमंत्री
राजा परवेज अशरफ ने मंगलवार
को सर्वोच्च न्यायालय में
कहा था कि सरकार ने तत्कालीन
राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ
के कार्यकाल के दौरान आसिफ
अली जरदारी के खिलाफ
भ्रष्टाचार के मामले बंद
करने के लिए भेजे गए पत्र को
वापस लेने का निर्णय लिया है.
<br /><br />तत्कालीन राष्ट्रपति
मुशर्रफ ने भ्रष्टाचार के
आरोपी जरदारी और उनकी पत्नी
बेनजीर भुट्टो की स्वदेश
वापसी सुनिश्चित कराने के
लिए एनआरओ के तहत 2007 में
उन्हें छूट प्रदान की थी. <br /><br />जरदारी
और भुट्टो पर आरोप है कि
उन्होंने 1990 के दशक में सीमा
शुल्क निरीक्षण के ठेके
प्राप्त करने की इच्छुक
कम्पनियों से रिश्वत के रूप
में कथितरूप से प्राप्त 1.20
करोड़ डॉलर की राशि को ठिकाने
लगाने के लिए स्विस खातों का
इस्तेमाल किया था. <br /><br />राजनीतिज्ञों
और नौकरशाहों को भ्रष्टाचार
के मामलों में छूट प्रदान
करने वाले एनआरओ को सर्वोच्च
न्यायालय ने 2009 में निरस्त कर
दिया था. <br />
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