जानें: इराक पर हमला करने वाले ISIL क्या है?

By: | Last Updated: Wednesday, 18 June 2014 3:22 AM

नई दिल्ली: इराक के कई अहम इलाकों पर कब्जा करने वाले चरमपंथी संगठन ISIL में करीब पंद्रह हज़ार लड़ाके हैं. लेकिन वो इराकी सेना के नौ लाख से ज्यादा सैनिकों पर भारी पड़ रहा है. आइए जानते हैं कि आखिर क्या है ISIL की ताकत?

 

इराक के कई अहम शहरों पर कब्जे के बाद बग़दाद की तरफ बढ़ते ये चरमपंथी लड़ाके ISIL यानी ‘Islamic State in Iraq and the Levant’ (इस्लामिक स्टेट इन इराक एंड लेवांत) से ताल्लुक रखते हैं. सुन्नी चरमपंथियों के इस संगठन को ISIS (लेवांत गुट) के नाम से भी जाना जाता है.

 

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लेवांत का मतलब है वो भौगोलिक क्षेत्र, जिसमें साइप्रस, इज़रायल, जॉर्डन, लेबनान, सीरिया और फिलिस्तीन जैसे देश आते हैं. लेकिन इराक के मौजूदा संदर्भ में इसका मतलब मुख्य तौर पर सीरिया से है.

 

करीब पंद्रह हज़ार लड़ाकों का ये गुट इराकी सेना के नौ लाख तीस हज़ार सैनिकों पर भारी पड़ता नज़र आ रहा है. आखिर क्या वजह है कि  ISIL इराक और आसपास के इलाके में अल कायदा से ज्यादा खतरनाक आतंकी संगठन बन गया है ? आखिर क्यों इस गुट ने दुनिया के सबसे ताक़तवर मुल्क अमेरिका की नींद हराम कर दी है?

 

पहले जानते हैं ISIL का इतिहास-

ISIL की शुरुआत अप्रैल 2013 में हुई और अल कायदा से अलग होने के बाद इसका असर तेज़ी से बढ़ रहा है. ISIL का मुखिया है 1971 में जन्मा अबू बकर अल बगदादी जो 2003 से लगातार अमेरिकी सेना के खिलाफ जंग छेड़े हुए है. बगदादी एक बेहद चालाक कमांडर और रणनीतिकार है.

 

सूत्रों के मुताबिक ISIL के 15 हज़ार लड़ाकों में बड़ी तादाद पश्चिमी मूल से आए लड़ाकों की है. ISIL के इन लड़ाकों में फिलहाल ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और अमेरिका जैसे मुल्कों से आए चरमपंथी भी शामिल हैं.

 

मार्च 2013 में सीरिया के रक्का शहर पर कब्ज़े के बाद पश्चिमी देशों से आये 80 फीसदी लड़ाके इसमें शामिल हो गए. सीरिया में मिली कामयाबी से अबू बकर अल बगदादी के हौसले इतने बुलंद हो गए कि उसने इराक की तरफ बढ़ना शुरू कर दिया.

 

इराक के फल्लूजा में कब्ज़े के बाद  ISIL ने रमादी के कुछ इलाकों पर कब्ज़ा जमाया. और फिर अचानक मोसुल पर कब्जा करके खलबली मचा दी.

 

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जानकारों की मानें तो ISIL धीरे-धीरे अलक़ायदा से भी बड़ा और खतरनाक संगठन बनता जा रहा है. ISIL की बढ़ती ताकत के बीच बगदादी और अलक़ायदा में आपसी होड़ और तनाव की शुरुआत भी पहले ही हो चुकी है.

 

माना जाता है कि अलक़ायदा के मुखिया यमन अल ज़वाहिरी ने बगदादी से कहा था कि वो अपना सारा ध्यान इराक पर लगाए और सीरिया को पूरी तरह अल कायदा के एक गुट अल नुसरा के लिए छोड़ दे. मगर बगदादी ने अल ज़वाहिरी की बात नहीं मानी. उसने सीरिया में हमला जारी रखते हुए और रक्का शहर पर कब्ज़ा कर लिया. इस दौरान ISIL और अलक़ायदा के बीच कई बार खूनी लड़ाइयां भी हुईं.

 

पिछले कुछ दिनों में अबू बकर अल बगदादी ने जिस तेज़ी के साथ इराक में अपनी ताकत बढ़ाई है उसने सारी दुनिया को चौंका दिया है और अब तो बगदादी के लड़ाके बगदाद से सिर्फ चंद मील की दूरी पर रह गए हैं. अमेरिका ने जब से बगदाद में अपने सैनिक भेजने से इनकार किया है, ISIL के हौसले और भी बुलंद हो गए हैं.

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