पत्रकारों के लिए सबसे खतरनाक देशों में सीरिया नंबर वन

पत्रकारों के लिए सबसे खतरनाक देशों में सीरिया नंबर वन

By: | Updated: 17 Apr 2014 05:57 AM

न्यूयॉर्क: एक अमेरिकी संस्था ने सीरिया को पत्रकारों के लिए दुनिया में सबसे खतरनाक देश बताया है. पत्रकारों की अनसुलझी हत्याओं के आधार पर तैयार किए जाने वाले अपने सालाना रिपोर्ट में इसका उल्लेख किया है. रिपोर्ट में पत्रकारों की हत्या के अनसुलझे मामलों को देश की कुल जनसंख्या के अनुपात के प्रतिशत के रूप में देखा जाता है.

 

न्यूयॉर्क आधारित कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स (सीपीजे) के अनुसार युद्ध से जर्जर सीरिया में काम कर रहे पत्रकारों के लिए हाल में सबसे बड़ा ख़तरा लक्षित हत्याओं (टारगेटेड मर्डर) की बढ़ती संख्या है. सीपीजे ने कहा, ‘‘अपहरणों की संख्या में अभूतपूर्व बढ़ोत्तरी और गोलीबारी और संघर्ष में मरने वालों की संख्या में इज़ाफा सीरिया को पत्रकारों के लिए विश्व में सबसे ज्यादा खतरनाक देश बनाता है.’’

 

सूचकांक में इराक पत्रकारों की हत्या को सुलझाने में नाकाम रहने के कारण अब भी सबसे उपर बना हुआ है. निगरानी संस्था के अनुसार दूसरे स्थान पर सोमालिया और फिलीपीन तीसरे स्थान पर है. सर्वे के शुरूआत (2008) से ही इराक में पत्रकारों की हत्या के 100 मामलों में 100 प्रतिशत दंडमुक्ति के कारण सूची में उच्च स्तर पर बना हुआ है.

 

सीपीजे के अनुसार सर्वेक्षण के प्रारंभ होने के बाद से इराक में 2012 ऐसा पहला साल था जब अपने काम के दौरान पत्रकारों के मरने का कोई मामला सामने नहीं आया, लेकिन 2013 में 10 पत्रकारों की मौत हुई जिसमें से 9 हत्याएं थीं. सोमालिया में भी 2013 में चार पत्रकारों की हत्या हुई.

 

जिन देशों में पांच या उससे ज्यादा अनसुलझे मामले होते हैं उन्हीं को सूचकांक में शामिल किया जाता है। इस साल 13 देश इस सूची में हैं जबकि पिछले साल 12 ही थे. निगरानी संस्था के मुताबिक पीड़ितों में 96 प्रतिशत लोकल रिपोर्टर होते हैं, जो वहां पर राजनीति, युद्ध अथवा भ्रष्टाचार की रिपरेटिंग करते हैं.

फटाफट ख़बरों के लिए हमे फॉलो करें फेसबुक, ट्विटर, गूगल प्लस पर और डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App
Web Title:
Read all latest World News headlines in Hindi. Also don’t miss today’s Hindi News.

First Published:
Next Story रेडियो के शो के दौरान आरजे को हुआ लेबर पेन, बच्चा जन्म देने तक श्रोताओं से रहीं मुखातिब