ब्रिटिश विश्वविद्यालयों को भारतीय मूल की छात्रा की चुनौती

By: | Last Updated: Sunday, 12 January 2014 2:19 PM

लंदन: कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय की भारतीय मूल की छात्रा ने पूरे देश में कॉलेज परिसरों में मुस्लिम समुदाय की बैठकों में ‘‘ऐच्छिक’’ लैंगिक पृथक्करण को अनुमति देने वाले ब्रिटिश विश्वविद्यालयों के कदम को चुनौती दी है.

 

राधा भट्ट ने एक कानूनी पत्र में मांग की है कि यूनिवर्सिटिज यूके :यूयूके: यह स्वीकार करे की पिछले नवंबर में उसकी ओर से पृथक्करण पर जारी निर्देश ‘‘गैरकानूनी’’ था . यूयूके ब्रिटेन के सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों का प्रतिनिधित्व करता है.

 

यूयूके ने धार्मिक कारणों से बुलाई जा रही बैठकों में महिलाओं और पुरूषों के ‘‘ऐच्छिक’’ पृथक्करण को अनुमति देने की अपनी नीति को सही ठहराने के लिए एक केस स्टडी का हवाला दिया है.

 

ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरन के यह कहने के बाद यूयूके को पिछले महीने अपनी केस स्टडी वापस लेनी पड़ी थी और अपने निर्देशों की समीक्षा करनी पड़ी थी कि वह विश्वविद्यालयों में पृथक्करण को प्रतिबंधित करना चाहते हैं.

 

इतिहास की प्रथम वर्ष की छात्रा 19 वर्षीय भट्ट का मानना है यूयूके के निर्देश सभी महिलाओं के लिए खतरा है.

 

भट्ट का कहना है, ‘‘मैं इसे सिर्फ मुस्लिम मुद्दे के रूप में नहीं देखती. एकबार जब आप एक धार्मिक समूह को विभेदकारी तरीके अपनाने की अनुमति देते हैं तो यह स्लोप की तरह हो जाता है. दूसरे भी इसी राह पर चलेंगे.’’

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Web Title: ब्रिटिश विश्वविद्यालयों को भारतीय मूल की छात्रा की चुनौती
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