ब्लॉग: आलोचना के केंद्र में लेकिन लोकप्रियता के शिखर पर हैं मोदी

By: | Last Updated: Monday, 3 February 2014 5:31 AM

नई दिल्ली: स्वतंत्र भारत के राजनीतिक इतिहास में नरेंद्र मोदी शायद एकमात्र ऐसे नेता है जो सबसे ज्यादा आलोचना के केंद्र में रहे हैं. पिछले 12 सालों से नरेंद्र मोदी की जितनी आलोचना हुई है उतनी स्वतंत्र भारत के इतिहास में कभी किसी नेता की नहीं हुई. लेकिन आज देश में कोई सर्वेक्षण करा लें, नरेंद्र मोदी देश के सबसे लोकप्रिय नेता उभरकर सामने आएंगे. हां, वो एक वर्ग में सबसे ज्यादा अलोकप्रिय भी हो सकते हैं. लेकिन मोदी के समर्थकों की भीड़ उनके विरोधियों से कहीं ज्यादा है.

 

नरेंद्र मोदी की खास बात यह है कि मोदी हमेशा भावनात्मक चीजों को ही छूते हैं. वो अपने कार्यकर्ताओं से भी कहते हैं कि भावनात्मक बातें करो. दिल्ली में बीजेपी के राष्ट्रीय परिषद की बैठक में भी मोदी ने अपने कार्यकर्ताओं से अपील की थी वो जनता को बीजेपी की बातें भावनात्मक तरीके से बताएं. भारत एक भावना प्रधान देश है. मोदी और उनके रणनीतिकार इस बात को बखूबी समझते हैं.

 

नरेंद्र मोदी जहां भी रैली करते हैं वहां वो तीन बातों का जिक्र प्राय: करते हैं. पहला मोदी उस जगह या क्षेत्र को सीधे गुजरात से जोड़ते हैं. वो उस क्षेत्र की जनता को बताते हैं कि मेरा और आपका सीधा जुड़ाव है. दूसरा वो उस जगह के स्थानीय मुद्दे भी उठाते हैं. उस क्षेत्र की समस्याओं को सामने रखते हैं. उसका वैकल्पिक समाधान भी बताते हैं और समस्याओं के लिए विपक्ष पर निशाना साधना नहीं चूकते हैं. तीसरा वो पार्टी लाइन से थोड़ा हटकर हिंदुत्व को किनारे रखकर विकास की बातें करते हैं. युवाओं को भरोसा देते हैं कि नरेंद्र मोदी के पास उनकी सभी समस्याओं का समाधान है. बिजली, पानी, सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं से लेकर वो अंतरिक्ष अभियान को सशक्त करने और भारत को आईटी हब बनाने की बात करते हैं.

 

नरेंद्र मोदी का ध्यान फिलहाल देश के सबसे बड़े राजनीतिक प्रदेश उत्तर प्रदेश पर है. मोदी ने बीते रविवार को हाल ही में दंगों का दंश झेल चुके मेरठ में रैली की. मेरठ पश्चिमी उत्तर प्रदेश का कृषि संपन्न जिला है. अगर दंगों की बात छोड़ दी जाए तो इंजीनियरिंग कॉलेजों से लेकर चीनी मिलें यहां बहुतायात में है. किसान यहां समपन्न हैं. यहां किसी जमानें में किसान नेता चौधरी चरण सिंह का दबदबा रहा है. अब हालांकि चरण सिंह के बेटे अजीत सिंह पिता की खोई जमीन वापस पाने के लिए मश्क्कत जरूर कर रहे हैं लेकिन उन्हें असफलता ही हाथ लगी है. उनके पास चौधरी चरण सिंह जैसा ना तो जनाधार है और ना ही जनता के बीच वैसी लोकप्रियता. अजीत सिंह की पार्टी राष्ट्रीय लोकदल के पास लोकसभा की 4 सीटें हैं जो मुजफ्फरनगर दंगों के बाद बीजेपी के हिस्सें में जाते दिख रहीं हैं.

 

नरेंद्र मोदी के रणनीतिकार इस बात को अच्छी तरह समझते हैं. मोदी ने भाषण की शुरुआत ही अजीत सिंह के वोट बैंक जाट समुदाय में सेंध लगाते हुए की. मोदी को सुनने आई जनता से उन्होंने अपील की आपको चौधरी चरण सिंह की कसम है आप नीचे उतर आइए. मोदी ने चौधरी चरण सिंह का नाम लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों को संदेश दे दिया की कृषि मामलों में मोदी की सोच उनके लोकप्रिय नेता चौधरी चरण सिंह के जैसी ही है. मोदी ने कहा कि अगर चौधरी चरण सिंह होते तो मेरठ का यह हाल नहीं होता. साथ ही लोकदल को एनडीए से जुड़ने के लिए अप्रत्यक्ष रूप से निमंत्रण दे दिया. यानी की एक तीर से दो निशाने.

 

मोदी ने अपनी हर रैली की तरह मेरठ के विकास की बात की और मेरठ को सीधे अहमदाबाद से जोड़ दिया. मोदी ने कहा कि अहमदाबाद का सीधा नाता मेरठ से है. उन्होंने अध्यात्म से स्वामी दयानंद सरस्वती को जोड़ा, तो वीर रस के कवि हरिओम पवार को भी याद करना नहीं भूले. मोदी ने कहा कि मेरठ के कवि हरिओम कहा करते थे कि अहमदाबाद और मेरठ दोनों एक जैसे हैं दोनों जगह हमेशा दंगे होते हैं. मैने गुजरात को दंगा मुक्त कर दिया. मोदी ने सुभाष चंद बोस के अंदाज में कहा कि आप हमें सत्ता दीजिए हम आपको दंगा मुक्त प्रदेश देंगे.

 

मोदी ने प्रदेश की समाजवादी पार्टी पर भी जमकर निशाना साधा. मोदी ने कानून व्यवस्था के मुद्दे को भी उछाला. मोदी ने भावनात्मक अंदाज़ में कहा कि क्या आपकी मां-बेटियां सुरक्षित हैं? क्या आपको यकीन है कि वो बाहर जाकर सुरक्षित घर लौट आएंगी. मोदी ने अप्रत्यक्ष रूप से उस घटना की याद दिला दी जिसकी वजह से मुजफ्फरनगर दंगा भड़का था. मुजफ्फरनगर दंगा भी एक लड़की के छेड़छाड़ के मामले से ही शुरू हुआ था. दूसरा उन्होंने यूपी की कानून व्यवस्था को भी धता बता दिया. सीधे अखिलेश और मुलायम पर निशाना साध दिया. मोदी ने मुलायम को चुनौती देने के अंदाज़ में कहा कि अगर आपको मोदी से मुकाबला करना ही है तो रैलियों से नहीं कानून व्यवस्था ठीक करके करिए.

 

पश्चिमी उत्तर प्रदेश भारत में गन्ना के लिए जाना जाता है. पश्चिमी यूपी अकेले पूरे भारत को चीनी खिला सकता है. यहां के किसानों की प्रमुख फसल गन्ना ही है. हाल ही में गन्ना किसानों की चीनी मिल मालिकों से तकरार हो गई थी. मामला इतना बढ़ गया था कि गन्ना किसान, चीनी मिल मालिक और यूपी सरकार में आपस में ही ठन गई थी. जिसके बाद यूपी सरकार ने गन्ना खरीद के नियमों में कुछ बदलाव करके मामले को किसी तरह शांत करने का प्रयास किया था. मोदी ने लोगों की नब्ज़ पकड़ते हुए गन्ना किसानों के मामले को भी उठाया. मोदी ने गुजरात में गन्ना खरीद और भुगतान की प्रक्रिया का हवाला देते हुए पश्चिमी यूपी के लोगों को विश्वास दिलाया की अगर बीजेपी सत्ता में आती है तो गन्ना किसानों को राहत मिलेगी.

 

मोदी ने यूपी को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने की बात भी की. यूपी के युवाओं की नब्ज़ पकड़ते हुए मोदी ने कहा कि जब घूस से ही नौकरी मिलनी है तो नौकरियों के लिए इंटरव्यू क्यों कराए जाते हैं. मोदी ने उन तमाम लोगों को भरोसा देने का प्रयास किया जो ये सोचते हैं कि बिना घूस के यूपी में नौकरी नहीं मिल सकती हैं.

 

कुछ दिनों पहले ही राजधानी दिल्ली में नार्थ ईस्ट छात्र की हत्या के मामले को भी मोदी उठाना नहीं भूले. मोदी ने अपने भाषण में उन तमाम चीजों को उठाया जो जनता के दिल को छू सकती हैं. पश्चिमी यूपी में मोदी की यह रैली निश्चित रूप से बीजेपी के लिए फायदेमंद होगी.

 

मोदी अच्छे प्रशासक है या नहीं इस पर बहस की जा सकती है लेकिन मोदी अच्छे वक्ता है इस पर बहस की कोई गुंजाइस नहीं है. मोदी पर तमाम आरोप लग सकते हैं कि उनकी लोकप्रियता के पीछे, उनके भाषणों के पीछे उनकी पीआर एजेंसी है लेकिन चाहे कुछ भी हो क्षेत्रिय, राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और आर्थिक मुद्दों पर मोदी के बेबाक बोल उन्हें लोकप्रिय बना रहा है.

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