भारत के पीएम मनमोहन सिंह को चीन में मिला ये 'दुर्लभ' सम्मान

By: | Last Updated: Thursday, 24 October 2013 12:37 AM

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<b>बीजिंग.</b>
भारत के पीएम का चीन में
जोरदार सम्मान हुआ. मनमोहन
सिंह ने भारत और चीन के बीच
घनिष्ठ सहयोग के लिए सात
सू़त्री अनुबंध सिद्धांतों
का जिक्र किया. उन्होंने आज
कहा कि दोनों देशों को एक
दूसरे के हितों और संप्रभुता
के प्रति संवेदनशीलता
दिखानी चाहिए और सीमा संबंधी
मसलों को सुलझाने के लिए जल्द
कदम उठाने चाहिए. लेकिन सवाल
यह है कि क्या चीन पीएम के इस
यात्रा के बाद अपनी नापाक
हरकतों से बाज आएगा?
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सिंह ने चीनी कम्युनिस्ट
पार्टी के सेंट्रल पार्टी
स्कूल में भविष्य के नेताओं
को संबोधित करते हुए कहा कि
गठबंधन और नियंत्रण के
पुराने सिद्धांत अब
प्रासंगिक नहीं रह गए हैं.
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उन्होंने कहा, ‘‘ भारत और चीन
को रोका नहीं जा सकता और
हमारा हाल का इतिहास इसका
गवाह है तथा न ही हमें दूसरों
को रोकने के बारे में सोचना
चाहिए.’’
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प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह
का यहां जोरदार स्वागत हुआ और
‘भारत, चीन- एक नया युग’ विषय
पर उनके भाषण की श्रोताओं ने
खूब सराहना की. सिंह ने अपने
सात सूत्री अनुबंध सिद्धांत
में कहा, ‘‘हमें ‘पंचशील’ के
सिद्धांतों के प्रति अपनी
अटूट प्रतिबद्धताओं की
पुष्टि करनी चाहिए और
पारस्परिक सम्मान, एक दूसरे
के हितों एवं संप्रभुता और
पारस्परिक एवं समान सुरक्षा
के प्रति संवेदनशीलता की
भावना के साथ आपसी संबंधों का
संचालन करना चाहिए.’’
उन्होंने कहा कि नए प्रकार की
महान शक्ति संबंधों की
राष्ट्रपति शी चिनफिंग की
अवधारणा का भारत ने स्वागत
किया है.
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सिंह ने कहा, ‘‘यह 1950 के दशक
में प्रधानमंत्री जवाहरलाल
नेहरू और चीनी प्रधानमंत्री
चाव एनलाई द्वारा
प्रतिपादित पंचशील या
सहअस्तित्व के पांच
सिद्धांतों का समकालीन
विकास है.’’ सीमा रक्षा और
सीमा पार की नदियों के
मुद्दों पर हुए सहयोग समझौते
के एक दिन बाद सिंह ने कहा कि
भारत-चीन सीमा पर शांति और
सौहार्द कायम रखना ही
द्विपक्षीय सिद्धांतों की
आधारशिला है.<br /><br />उन्होंने
कहा, ‘‘यह आपसी विश्वास और
हमारे संबंधों के विस्तार के
लिए आवश्यक है. हमें ऐसा कुछ
नहीं करना चाहिए, जिससे यह
बाधित होती हो. निश्चिय ही, हम
अपने समझौतों का पालन और अपने
द्विपक्षीय तंत्र का
प्रभावी ढंग से उपयोग करके
इसे हासिल कर सकते हैं. इसके
साथ ही, हमें अपने सीमा विवाद
को हल करने के लिए तेजी से आगे
बढ़ना चाहिए.’’ कम्युनिस्ट
पार्टी सेंट्रल स्कूल में
सिंह का यह भाषण चीनी यात्रा
पर आए किसी भी विदेशी नेता को
मिला एक दुलर्भ सम्मान है.<br /><br />प्रधानमंत्री
ने यहां दोनों देशों के बीच
सहयोग पेशकश क्षेत्र की छह
सूत्री रूपरेखा भी पेश की और
अगले पांच वषरें में आधारभूत
संरचना में एक हजार अरब
अमेरिकी डॉलर का निवेश करने
की भारतीय योजना में चीनी
निवेश को आमंत्रित किया. <br /><br /><br />
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Web Title: भारत के पीएम मनमोहन सिंह को चीन में मिला ये ‘दुर्लभ’ सम्मान
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