भारत के साथ व्यापार और सुरक्षा भागीदारी बढाने को प्रतिबद्ध: अमेरिका

भारत के साथ व्यापार और सुरक्षा भागीदारी बढाने को प्रतिबद्ध: अमेरिका

By: | Updated: 17 Apr 2014 09:32 AM

वाशिंगटन: अमेरिका की विदेश उपमंत्री निशा देसाई बिस्वाल ने कल कहा कि अमेरिका अपने द्विपक्षीय कारोबार को बढाकर 500 अरब डॉलर प्रति वर्ष करने के लिए भारत के साथ मिलकर काम कर रहा है. उन्होंने कहा कि अमेरिका एक ऐसी भागीदारी को लेकर प्रतिबद्ध है जिसमें सुरक्षा क्षेत्र में मजबूत व प्रभावी भारत शामिल हो.

 

बिस्वाल कल बोस्टन में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी, कैनेडी स्कूल ऑफ गवर्नमेंट में संबोधित कर रही थीं. उन्होंने कहा कि अमेरिका दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश संबंधों को मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध है. हम व्यापार को बढाकर 500 अरब डॉलर सालाना करना चाहते हैं.

 

बिस्वाल के मुताबिक इसमें कोई शक नहीं है कि दोनों देशों के नेताओं ने जो रणनीतिक लक्ष्य तय किए हैं उन्हें हासिल करने के लिए भारत की आर्थिक सफलता बहुत मायने रखती है. उन्होंने कहा कि इसके लिए हमें हमें पीछे नहीं आगे देखना होगा.

 

इसका उदाहरण देते हुए बिस्वाल ने कहा कि जब द्विपक्षीय निवेश संधि सिरे चढेगी तो इससे भारत में और अधिक निवेश और नवोन्मेष (इनोवेशन) आएगा और दोनों के निजी क्षेत्रों के बीच भागीदारी और मजबूत होगी.

 

उन्होंने कहा कि हम समुद्र संरक्षण सहित अनेक वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए भारत के साथ भागीदारी पर विचार कर रहे हैं. बिस्वाल ने कहा कि दोनों देश अपने विश्वविद्यालयों के छात्रों और अनुसंधानकर्ताओं (रिसर्चर्स) के साथ मिलकर काम करा रहे हैं ताकि वे खाद्य सुरक्षा व कुपोषण जैसी वैश्विक चुनौतियों का मिलकर मुकाबला कर सकें.

 

उन्होंने कहा कि हम एनर्जी डॉयलाग के जरिए भारत के साथ काम कर रहे हैं. इसके अलावा स्वच्छ और अक्षय उर्जा (सोलर एनर्जी या सौर्य ऊर्जा) और उर्जा दक्षता पर संयुक्त अध्ययन किया जा रहा है. अमेरिका 2014 प्रौद्योगिकी (टेक्नॉलजी) शिखर सम्मेलन और प्रदर्शनी के लिए भी भारत के साथ भागीदारी कर रहा है.

 

इस अवसर पर उन्होनें दोनों देशों के बीच सुरक्षा क्षेत्र में भागीदारी की भी चर्चा की जिसमें सुरक्षा के मोर्चे में मजबूत और प्रभावी भारत को शामिल करना शामिल है. उन्होंने कहा कि अमेरिका ने विभिन्न क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा मुद्दों पर भारत के साथ संवाद और चर्चा का दायरा बढाया है.

 

इसके साथ ही वह रक्षा क्षेत्र में मजबूत सह-उत्पादन (को-प्रोडक्शन यानि साथ मिलकर चीज़ों को बनाना) और सह-विकास संबंधों के लिए भी काम कर रहा है. उन्होंने कहा कि अमेरिका ने भारत की सशस्त्र सेनाओं के आधुनिकीकरण में मदद में काफी प्रगति की है.

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