भारत पर अमेरिका ने दोहरे मापदंड की बात स्वीकारी

By: | Last Updated: Saturday, 17 August 2013 8:00 AM
भारत पर अमेरिका ने दोहरे मापदंड की बात स्वीकारी

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<b>वाशिंगटन:</b>
अमेरिका की एक शीर्ष अधिकारी
ने स्वीकार किया है कि
धार्मिक स्वतंत्रता के
मुद्दे पर लोकतांत्रिक भारत
की आलोचना करने में अमेरिका
दोहरे मापदंड का उपयोग करता
है जबकि तानाशाही शासन वाले
अपने मित्र देशों की अनदेखी
कर देता है.
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अमेरिका के अंतर्राष्ट्रीय
धार्मिक स्वतंत्रता आयोग की
उपाध्यक्ष कैटरीना लेंटोस
स्वेट ने न्यूयार्क टाइम्स
को एक साक्षात्कार में कहा कि
भारत एक महान लोकतंत्र है और
तानाशाही की अपेक्षा
लोकतंत्र से अधिक उम्मीद
करते हैं.<br />
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उन्होंने कहा कि भारत के लिए
मापदंड बहुत ऊंचे रखे गए हैं
क्योंकि भारत दुनिया का सबसे
बड़ा लोकतंत्र है. यदि भारत
मूल्यों को शर्मिदा करता है
तो लोकतंत्र के तौर पर हम
शर्मिदा होते हैं.
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आयोग द्वारा भारत को धार्मिक
स्वतंत्रता की स्थिति में
अफगानिस्तान, रूस, क्यूबा,
नाइजीरिया और लाओस जैसे
देशों के साथ श्रेणी 2 में
रखने के बारे में पूछे गए
सवाल पर उन्होंने कोई स्पष्ट
कारण नहीं बताया.<br />
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गुजरात के दंगों के बाद आयोग
ने भारत को ‘विशेष चिंता वाले
देशों’ की श्रेणी में रखने की
सिफारिश की थी. इस श्रेणी में
धार्मिक स्वतंत्रता की सबसे
खराब स्थिति वाले देशों को
रखा जाता है. लेकिन विदेश
विभाग ने आयोग की सिफारिश की
अनदेखी कर दी.<br />
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Web Title: भारत पर अमेरिका ने दोहरे मापदंड की बात स्वीकारी
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