भारत में पले बढ़े विजय शेषाद्रि ने जीता वर्ष 2014 का पुलित्जर पुरस्कार

By: | Last Updated: Tuesday, 15 April 2014 3:53 PM
भारत में पले बढ़े विजय शेषाद्रि ने जीता वर्ष 2014 का पुलित्जर पुरस्कार

न्यूयार्क: कोलंबिया विश्वविद्यालय द्वारा सोमवार को न्यूयार्क में 98वें वार्षिक पुलित्जर पुरस्कारों का ऐलान की गई.इस ऐलान में शेषाद्रि की ‘3 सेक्शन्स’ को मानव चेतना की खोज करने वाला एक बेहतरीन कविता संग्रह बताया गया.कविता श्रेणी का पुरस्कार किसी अमेरिकी रचनाकार की ‘मूल कविता की उत्कृष्ट किताब’ के लिए दिया गया.

 

कोलंबिया विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र शेषाद्रि को 10,000 डॉलर की पुरस्कार राशि मिलेगी.

 

पुलित्जर वेबसाइट पर उपलब्ध शेषाद्रि से जुड़ी जानकारी के अनुसार, वह वर्तमान में न्यूयार्क के सारा लॉरेंस आर्ट्स कॉलेज में कविता एवं नॉनफिक्शन लेखन पढ़ाते हैं. 1954 में बेंगलूर में पैदा हुए शेषाद्रि पांच साल की उम्र में अमेरिका आ गए थे और ओहियो के कोलंबस में पले बढ़े.

 

शेषाद्रि के कविता संग्रहों में जेम्स लाफलिन पुरस्कार विजेता ‘द लांग मिडो एंड वाइल्ड किंगडम’ (1996) शामिल हैं. उनकी कविताएं, निबंध और समीक्षाएं अमेरिकन स्कॉलर, दि नेशन, दि न्यूयार्कर, दि पेरिस रिव्यू, येल रिव्यू, दि टाइम्स बुक रिव्यू, दि फिलाडेल्फिया इन्क्वायरर जैसे कई प्रतिष्ठित प्रकाशनों और अंडर 35 : दि न्यू जेनरेशन ऑफ अमेरिकन पोएट्स और 1997 एवं 2003 के दि बेस्ट अमेरिकन पोएट्री समेत कई कविता संग्रहों में आ चुकी हैं.

 

वह पुलित्जर पुरस्कार जीतने वाले भारतीय मूल के पांचवें व्यक्ति हैं. सबसे पहले 1937 में विज्ञान संपादक गोविंद बिहारी लाल ने यह पुरस्कार जीता था.

 

भारतीय मूल की अमेरिकी लेखक झुंपा लाहिरी ने 2000 में, पत्रकार-लेखिका गीता आनंद ने 2003 में जबकि चिकित्सक सिद्धार्थ मुखर्जी ने कैंसर पर लिखी अपनी एक किताब के लिए 2011 में पुलित्जर पुरस्कार जीता था.

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Web Title: भारत में पले बढ़े विजय शेषाद्रि ने जीता वर्ष 2014 का पुलित्जर पुरस्कार
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