मलेशियाई विमान: अगर चार दिनों में नहीं मिला विमान का ‘ब्लैक बॉक्स’ तो हदसा एक रहस्य बन जाएगा

मलेशियाई विमान: अगर चार दिनों में नहीं मिला विमान का ‘ब्लैक बॉक्स’ तो हदसा एक रहस्य बन जाएगा

By: | Updated: 01 Jan 1970 12:00 AM

पर्थ: ऑस्ट्रेलियाई नौसेना का जहाज ओशन शील्ड आज तलाश क्षेत्र में पहुंच सकता है. इस जहाज पर अमेरिकी ‘ब्लैक बॉक्स’ डिटेक्टर लगा है. इस खोज क्षेत्र में 14 विमान लगातार एमएच-370 की तलाश में लगे हुए हैं.

 

लगभग एक महीने पहले लापता हुए इस मलेशियाई विमान में 239 लोग सवार थे. अब तक यह पता नहीं लग पाया है कि वह कैसे या किस कारण दुर्घटनाग्रस्त हुआ. अधिकारियों का कहना है कि यदि ब्लैक बॉक्स नहीं मिलता है तो हो सकता है कि यह रहस्य कभी नहीं सुलझ पाए.

 

ओशन शील्ड पर लगे पिंगर लोकेटर के जरिए विमान के डाटा रिकॉर्डर को ढूंढ़ निकालना लगातार मुश्किल होता दिखाई दे रहा है. अधिकारी कह रहे हैं कि दुर्घटनास्थल की पुष्टि के बिना विशाल दक्षिणी हिंद महासागर में इस उपकरण को खोज निकालने की उम्मीद बहुत कम है.

 

इसके अलावा एक बड़ी चिंता यह भी है कि ब्लैक बॉक्स से बैटरी की मदद से आने वाला सिगनल भी कुछ दिनों में बंद होने की संभावना है. ओशन शील्ड सोमवार शाम को खोज क्षेत्र की तीन दिन की अभियान यात्रा पर पर्थ के लिए रवाना हुआ था.

 

ब्रिटेन की नौसेना का हाइड्रोग्राफिक जहाज एचएमएस ईको पहले ही इस क्षेत्र में है और उसने कल विमान डाटा रिकॉर्डर से होने वाले ध्वनि संचरण पर काम किया. 8 मार्च को लापता हुए विमान के ब्लैक बॉक्स को चार दिनों के अंदर खोज निकालना पड़ेगा वरना चार अप्रैल को एक महीना पूरा होने पर ब्लैक बॉक्स का डाटा समाप्त हो जाएगा.



क्या होता है ब्लैक बॉक्स?

 

सबसे पहले ब्लक बॉक्स ब्लैक यानि काला नहीं नारंगी यानि संतरे के रंग का होता है. विमान हादसे की वजहों का पता लगाने में दो उपकरण सबसे जरूरी होते हैं- एयरक्राफ्ट का फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (एफडीआर) और कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर (सीवीआर). इन्हीं दो उपकरणों को मिलाकर 'ब्लैक बॉक्स' कहा जाता है.


1. ब्लैक बॉक्स में डाटा को कलेक्ट किया जाता हैं. ये विमान के पिछले हिस्से में फिट रहता है. क्योंकि विमान का यह हिस्सा क्रैस होने के बाद भी सबसे कम प्रभावित होता है.


2. ये दोनों उपरण क्रैश-प्रूफ मेमरी यूनिट्स होते हैं. क्रैश के बाद यही उपकरण सुरक्षित रह पाते हैं. दोनों डिवाइसों को इस तरह बनाया जाता है कि ये आग, क्रैश और कई टन मलबे के दबाव के बावजूद नष्ट नहीं होते.


3. दोनों रिकॉर्डरों को चार अगल-अगल धातुओं से बनाया जाता है ताकि यह सुरक्षित रह सके. ये चार धातू एल्यूमिनियम, रेत, स्टेनलेस स्टील, टाइटेनियम हैं.


4. ब्लैक बॉक्स कॉकपिट के अंदर होने वाली सभी बातचीत, रेडियो संपर्क, उड़ान का विवरण जैसे- उसकी स्पीड, इंजन की स्थिति, हवा की गति, ऊंचाई, राडार की स्थिति वगैरह रिकॉर्ड करता है.


5. विमान का ब्लैक बॉक्स मिलने के साथ ही जांचकर्ता उसे लैब में ले जाते हैं जहां वे इनमें रिकॉर्ड किए गए सभी डाटा को डाउनलोड करते हैं और फिर घटनाओं की कड़ी जोड़ने की कोशिश करते हैं.

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