मलेशियाई विमान: जल्द से जल्द तलाशना पड़ेगा ब्लैकबॉक्स वरना सच्चाई कभी नहीं आ पाएगी बाहर!

By: | Last Updated: Tuesday, 1 April 2014 4:49 AM

पर्थ: लापता विमान एमएच-370 के ‘‘ब्लैक बॉक्स’’ का संकेत समाप्त होने में मात्र एक सप्ताह का समय बचा है, ऐसे में अधिकारियों के सामने इतने कम समय में इसे तलाशने की चुनौती है.

 

आस्ट्रेलियाई पोत ओशन शील्ड कल पर्थ के लिए रवाना हुआ. इस पोत में ब्लैक बॉक्स का पता लगाने वाला अमेरिकी मशीन ‘टोव्ड पिंगर लोकेटर’ लगा हुआ है लेकिन इस पोत को दूरस्थ दक्षिणी हिंद महासागर में तलाश क्षेत्र तक पहुंचने में तीन दिन लग सकते हैं.

 

ब्लैक बॉक्स का संकेत आमतौर पर लगभग 30 दिन रहता है और ऐसी आशंका बढ़ रही है कि समय हाथ से निकल जाएगा. मलेशियाई विमान आठ मार्च को लापता हुआ था. इसमें 239 यात्री सवार थे.

 

आस्ट्रेलिया के रक्षा मंत्री डेविड जॉनसन ने स्वीकार किया कि इसका पता चलने की उम्मीद बहुत कम है क्योंकि विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने के स्थान का पता लगाने के लिए पहले मलबे का पता लगना जरूरी है.

 

उन्होंने राष्ट्रीय रेडियो पर कहा, ‘‘हमारे पास एक सप्ताह का समय बचा है लेकिन बैटरी कितने समय तक चलेगी, यह पानी के तापमान और उसकी गहराई और दबाव पर निर्भर करता है.’’ हालांकि विमान की तलाश के लिए बहुराष्ट्रीय तलाश काफी दिनों से जारी है लेकिन अभी तक इसका कोई पता नहीं चल पाया है.

 

मलेशिया का मानना है कि कुआलालम्पुर से बीजिंग जा रहे विमान का निर्धारित पथ किसी ने जानबूझ कर बदल दिया था और उपग्रह डाटा इस बात की ओर इशारा करता है कि यह हिंद महासागर में दुर्घटनाग्रस्त हो गया. मलेशियाई अधिकारियों ने बताया कि लापता विमान के एक पायलट द्वारा कहे गये अंतिम शब्द ‘‘गुडनाइट मलेशियन थ्री सेवन जीरो’’ थे जिसके बाद आज 10 विमानों और नौ जहाजों ने तलाश फिर से शुरू की.

 

इससे पहले बताया गया था कि अंतिम संदेश के शब्द ‘‘आल राइट गुड नाइट’’ थे. परिवहन मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘‘हम पुष्टि करना चाहते हैं कि वायु यातायात नियंत्रक और कॉकपिट के बीच अंतिम वार्ता का वक्त आठ मार्च को मलेशियाई समय के अनुसार एक बजकर 19 मिनट था और ‘‘गुड नाइट मलेशियन थ्री सेवन जीरो’’ कहा गया.’’

 

मंत्रालय ने कहा, ‘‘अधिकारी इस बात का पता लगाने के लिए अब भी जांच कर रहे हैं कि अंतिम शब्द चालक ने कहे थे या सह चालक ने.’’

 

 

क्या होता है ब्लैक बॉक्स?

 

सबसे पहले ब्लक बॉक्स ब्लैक यानि काला नहीं नारंगी यानि संतरे के रंग का होता है. विमान हादसे की वजहों का पता लगाने में दो उपकरण सबसे जरूरी होते हैं- एयरक्राफ्ट का फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (एफडीआर) और कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर (सीवीआर). इन्हीं दो उपकरणों को मिलाकर ‘ब्लैक बॉक्स’ कहा जाता है.

1. ब्लैक बॉक्स में डाटा को कलेक्ट किया जाता हैं. ये विमान के पिछले हिस्से में फिट रहता है. क्योंकि विमान का यह हिस्सा क्रैस होने के बाद भी सबसे कम प्रभावित होता है.

2. ये दोनों उपरण क्रैश-प्रूफ मेमरी यूनिट्स होते हैं. क्रैश के बाद यही उपकरण सुरक्षित रह पाते हैं. दोनों डिवाइसों को इस तरह बनाया जाता है कि ये आग, क्रैश और कई टन मलबे के दबाव के बावजूद नष्ट नहीं होते.

3. दोनों रिकॉर्डरों को चार अगल-अगल धातुओं से बनाया जाता है ताकि यह सुरक्षित रह सके. ये चार धातू एल्यूमिनियम, रेत, स्टेनलेस स्टील, टाइटेनियम हैं.

4. ब्लैक बॉक्स कॉकपिट के अंदर होने वाली सभी बातचीत, रेडियो संपर्क, उड़ान का विवरण जैसे- उसकी स्पीड, इंजन की स्थिति, हवा की गति, ऊंचाई, राडार की स्थिति वगैरह रिकॉर्ड करता है.

5. विमान का ब्लैक बॉक्स मिलने के साथ ही जांचकर्ता उसे लैब में ले जाते हैं जहां वे इनमें रिकॉर्ड किए गए सभी डाटा को डाउनलोड करते हैं और फिर घटनाओं की कड़ी जोड़ने की कोशिश करते हैं.

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Web Title: मलेशियाई विमान: जल्द से जल्द तलाशना पड़ेगा ब्लैकबॉक्स वरना सच्चाई कभी नहीं आ पाएगी बाहर!
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