मानवाधिकारों पर श्रीलंका को ब्रिटेन का सख्त संदेश

By: | Last Updated: Saturday, 16 November 2013 7:07 AM
मानवाधिकारों पर श्रीलंका को ब्रिटेन का सख्त संदेश

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<b>कोलंबो:
</b>ब्रिटिश प्रधानमंत्री
डेविड कैमरन ने श्रीलंका को
सख्त संदेश देते हुए कहा कि
अगर उसने मार्च 2014 तक
मानवाधिकार से जुड़े
मुद्दों को नहीं सुलझाया, तो
उनका देश यहां हुए कथित युद्ध
अपराधों की अंतर्राष्ट्रीय
जांच के लिए दबाव बनाएगा.
समाचार एजेंसी सिन्हुआ के
मुताबिक, कैमरन ने शुक्रवार
को श्रीलंका के युद्ध
प्रभावित उत्तरी हिस्से का
दौरा करने और राष्ट्रपति
महिंदा राजपक्षे से मुलाकात
करने के बाद अपना यह रुख
स्पष्ट किया.<br />
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श्रीलंका को 1948 में आजादी
मिलने के बाद जाफना की यात्रा
करने वाले कैमरन पहले विदेशी
नेता हैं. उन्होंने कहा, “इस
दौरे ने उत्तरी हिस्से के
तमिलों को आवाज दी है और यह
आवाज विश्व को सुननी चाहिए.”<br />
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उन्होंने संवाददाताओं से
कहा, “मैंने श्रीलंका के
राष्ट्रपति से यह स्पष्ट
किया है कि उनके पास उदारता
दिखाने और देश का विस्तृत एवं
सफल भविष्य बनाने का यह उचित
अवसर है और मुझे पूरा विश्वास
है कि वह इसका लाभ उठाएंगे.”<br />
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कैमरन ने कहा, “मैं बिल्कुल
साफ कर दूं. मार्च तक अगर जांच
पूरी नहीं हुई तो मैं संयुक्त
राष्ट्र मानवाधिकार आयुक्त
के साथ काम करने के लिए
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार
परिषद में अपने पद का
इस्तेमाल करूंगा और पूर्ण,
विश्वसनीय व अंतर्राष्ट्रीय
जांच की मांग करूंगा.”<br />
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श्रीलंका सरकार के आलोचकों
का कैमरन पर इस बात के लिए
काफी दबाव था कि वह श्रीलंका
में आयोजित राष्ट्रमंडल
देशों के शासनाध्यक्षों की
बैठक (चोगम) में हिस्सा न लें.<br />
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कनाडा ने 53 देशों के इस समूह
की इस महत्वपूर्ण बैठक में
हिस्सा नहीं लिया, जबकि भारत
और मॉरिशस के
प्रधानमंत्रियों ने भी
इसमें शिरकत नहीं की.<br />
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मॉरिशस के इस कदम के कारण 2015
में चोगम की बैठक की मेजबानी
का मौका भी उसके हाथ से निकल
गया.<br />
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कैमरन ने हालांकि, संतुलन
बनाते हुए कहा कि श्रीलंका के
पास काफी संभावनाएं हैं और
इसने प्रभावी आर्थिक विकास
को बेहद कम अवधि में प्राप्त
किया है.<br />
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उन्होंने कहा कि इस सबके
बावजूद मानवाधिकारों के
उल्लंघन को नजरअंदाज नहीं
किया जा सकता और ब्रिटेन
मार्च 2014 से पहले श्रीलंका
सरकार द्वारा इसके
मानवाधिकार मामले की जांच की
उम्मीद करता है.<br />
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Web Title: मानवाधिकारों पर श्रीलंका को ब्रिटेन का सख्त संदेश
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