‘मुर्गी के अंडे’ की मदद से भर गई गोद और घर में गूंज उठी ‘नन्हीं की किलकारी!’

‘मुर्गी के अंडे’ की मदद से भर गई गोद और घर में गूंज उठी ‘नन्हीं की किलकारी!’

By: | Updated: 01 Jan 1970 12:00 AM
लंदन: ब्रिटिश कपल मार्क और सुजैन हार्पर चाहते थे कि उनके घर में भी बच्चे की किलकारी गूंजे. कई बार गर्भपात होने के बाद उन्होंने आईवीएफ तकनीक पर भी 50 हजार डॉलर यानी करीब 30 लाख रुपये खर्च किए. लेकिन उन्हें सफलता एक बिल्कुल असामान्य इलाज से मिली. आखि‍रकार मुर्गी के एक अंडे ने मार्क और सुजैन के चेहरे पर खुशी की लहर पैदा कर दी.

 

 न्यूयॉर्क पोस्ट के मुताबिक टेस्ट‍िकुलर कैंसर के कारण मार्क के स्पर्म बिल्कुल खत्म हो गए थे. कैंसर से लड़ने के बाद अब दोनों ने निर्णय लिया कि वे कृत्रिम बीजारोपण तकनीक से बच्चा पैदा करेंगे लेकिन तीन बार इस तकनीक का इस्तेमाल करने पर भी हर बार सुजैन का गर्भपात हो गया. फिर दोनों ने आईवीएफ तकनीक के बारे में सोचा.

 

डॉक्टरों की सलाह ली तो पता चला सुजैन के गर्भाशय में ऐसे किलर सेल हैं जो भ्रुण को खत्म कर देते हैं. डॉक्टरों ने सुजैन के इलाज के लिए ‘एग यॉल्क’ ट्रीटमेंट को अपनाया. सफल इलाज के बाद सुजैन ने दिसंबर 2013 में एक लड़की को जन्म दिया, जिसका नाम कोनी रखा गया.

 

केयर फर्टीलिटी नॉटिंघम के डॉक्टरों ने अंडे के पीले भाग और सोयाबीन ऑयल को मिलाकर ‘इंट्रालिपिड्स’ तैयार किया. इस कॉम्बीनेशन में फैटी एसिड होते हैं, जिससे सुजैन के गर्भाशय में मौजूद किलर सेल का इलाज किया गया. इससे किलर सेल्स कमजोर पड़ गए और भ्रुण को पलने में मदद मिली. अब सुजैन अंडे का धन्यवाद करते नहीं थक रहीं.

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