मुशर्रफ ने विशेष अदालत के फैसले को दी चुनौती, मामला सैनिक अदालत को सौंपने को कहा

By: | Last Updated: Wednesday, 19 March 2014 4:27 PM

इस्लामाबाद: पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने विशेष अदालत के उनके राजद्रोह मामले को सैनिक अदालत को नहीं सौंपने के फैसले को चुनौती दी है. डॉन आनलाइन के मुताबिक, पूर्व राष्ट्रपति ने इस्लामाबाद उच्च न्यायालय में मंगलवार को अर्जी दायर कर चुनौती दी है. मुशर्रफ की ओर से बचाव पक्ष के वकील खालिद रांझा और फैसल हुसैन ने अर्जी दायर की.

 

सिंध उच्च न्यायालय के न्यायाधीश फैसल अरब की अध्यक्षता वाली विशेष अदालत ने 21 फरवरी को मुशर्रफ की स्थानांतरण याचिका ठुकरा दी थी.

 

मुशर्रफ के खिलाफ 3 नवंबर 2007 को देश पर आपातकाल थोपने और उच्च न्यायपालिका के न्यायाधीशों को नजरबंद करने के आरोप में राजद्रोह चलाया जा रहा है. मुशर्रफ उस समय देश के राष्ट्रपति थे.

 

पूर्व सैनिक तानाशाह ने अपनी याचिका में उल्लेख किया है कि वे अक्टूबर 1999 में श्रीलंका की सेना की 50वी वर्षगांठ के मौके पर आयोजित समारोह में पाकिस्तानी सेना का प्रतिनिधित्व करने के लिए सरकारी यात्रा पर गए हुए थे.

 

उन्होंने कहा है कि सरकारी कर्तव्य का निर्वाह कर जब वे स्वदेश लौट रहे थे तो उन्हें उनके ओहदे से महरूम कर दिया गया और जनरल ख्वाजा जियाउद्दीन को उनकी जगह नया सेनाध्यक्ष नियुक्त कर दिया गया था.

 

उन्होंने यह भी कहा है कि तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ एवं अन्य ने कराची अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उनके विमान को नहीं उतरने देने की अनुमति देकर उन्हें जान से मारने की भी कोशिश की थी.

 

पूर्व सैनिक तानाशाह ने कहा है कि उनके विमान के पायलट को या तो विमान को भारत में उतरने के लिए मजबूर किया गया या फिर ईंधन के अभाव में विमान दुर्घटनाग्रस्त हो जाता.

 

अपनी अर्जी में मुशर्रफ ने कहा है कि 12 अक्टूबर 1999 को सैनिक विद्रोह और उसके बाद के सभी कदमों को सर्वोच्च न्यायालय ने मान्य करार दिया था.

 

अर्जी में कहा गया है कि कतिपय कारणों से मुशर्रफ को 3 नवंबर 2007 को देश में आपातकाल लागू करना पड़ा था.

 

अर्जी में उल्लेख किया गया है कि तीन सैन्य अधिकारी जनरल खालिद मुनीर खान, जनरल मुजफ्फर अफजल और जनरल खालिद जहीर सेना से वर्ष 2004 और 2008 के बीच सेवानिवृत्त हुए और राष्ट्रीय जवाबदेही ब्यूरो (एनएबी) के तहत आरोपों का सामना कर रहे हैं और उनके मामले सैनिक अदालत को हस्तांतरित किए गए हैं.

 

इसमें कहा गया है कि सरकार उन्हें निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार से वंचित कर रही है.

 

अर्जी में आग्रह किया गया है कि विशेष अदालत के आदेश को दरकिनार करते हुए पाकिस्तान सरकार को उनका मामला सैनिक अदालत को हस्तांतरित करने का निर्देश दिया जाए.

 

उच्च न्यायालय अर्जी पर 20 मार्च को सुनवाई करेगा.

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Web Title: मुशर्रफ ने विशेष अदालत के फैसले को दी चुनौती, मामला सैनिक अदालत को सौंपने को कहा
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