लो, एक बार फिर दुनिया सही-सलामत बच गई...

By: | Last Updated: Sunday, 23 February 2014 1:33 PM

न्यूयॉर्क: एक पुरानी कहावत है- मुद्दई लाख बुरा चाहे तो क्या होता है? वही होता है जो मंजूरे खुदा होता है. भगवान बुद्ध ने भी कहा था कि मारने वाले से बचाने वाला बड़ा होता है. दुनिया का बुरा चाहने वालों ने तो खूब अफवाहें फैलाईं, लेकिन माया कैलेंडर के प्रलय की तरह 22 फरवरी को देवताओं और दानवों में अंतिम युद्ध होने की वाइकिंग भविष्यवाणी भी महज एक कहानी साबित हुई.

 

वाइकिंग नोर्स मिथॉलजी के मुताबिक 22 फरवरी 2014 को दुनिया का अंत होना था. नोर्स मिथॉलजी में कहा गया है कि कुछ घटनाएं होंगी जो पृथ्वी पर जीवन का अंत कर देंगी.

 

इस मिथॉलजी में भविष्यवाणी की गई है कि नोर्स देवता थोर, लोकी, ऑडिन, फ्रेयर और हरमूर के बीच युद्ध होगा. इस युद्ध के बाद पृथ्वी समुद्र में गिर जाएगी और जीवन का अंत हो जाएगा. इसे पूरे घटनाक्रम को रग्नारोक नाम दिया गया है. लेकिन इस विनाश में दो मानव बच जाएंगे जो नया जीवन रचेंगे.

 

रग्नारोक के बारे में 13वीं सदी के मशहूर कवि और इतिहासकार स्नोरी स्टरलूजन ने लिखा था. नोर्स संस्कृति को मानने वाले लोग वाइकिंग्स इस पर यकीन करते रहे हैं.

 

वाइकिंग सेंटर के विशेषज्ञों ने अनुमान लगाया था कि 22 फरवरी को दुनिया का अंत होगा. इसी दिन 30वें वाइकिंग फेस्टिवल का ग्रैंड फिनाले है. विशेषज्ञों का कहना है कि 15 नवंबर को यॉर्क की छतों पर एक प्राचीन हॉर्न की आवाज सुनाई दी थी और यही नोर्स के मुताबिक महाविनाश का संकेत है.

 

इस भविष्यवाणी के आधार पर ही 30वें वाइकिंग फेस्टिवल में महाविनाश से बचाने के उपकरण भी बेचे गए. हालांकि दुनिया फिलहाल सही सलामत है.

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Web Title: लो, एक बार फिर दुनिया सही-सलामत बच गई…
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