विश्वव्यापी खतरा है एंटीबायोटिक का कम होता असर

By: | Last Updated: Thursday, 1 May 2014 3:18 AM

नई दिल्ली: किसी भी तरह के संक्रमण से बचाने के लिए रोगी को दिए जाने वाले एंटीबायोटिक का असर न होना और संक्रमण का इलाज न होना लोगों के स्वास्थ्य के लिए विश्वव्यापी खतरा है. यह बात विश्व स्वास्थ्य संगठन की तरफ से जारी एक रिपोर्ट में कही गई है.

 

‘एंटीमाइक्रोबायल रेजिस्टेंस, ग्लोबल रिपोर्ट ऑन सर्विलांस’ शीषर्क से जारी इस रिपोर्ट में कहा गया है कि एंटीबायोटिक प्रतिरोध डब्ल्यूएचओ के दक्षिण पूर्व एशिया क्षेत्र में एक बढ़ती हुई समस्या है. इसमें भारत भी शामिल है.

 

डब्ल्यूएचओ में स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए सहायक महानिदेशक डॉ कीजी फुकुदा ने कहा, ‘‘अनेक पक्षों द्वारा तत्काल और समन्वित कार्रवाई नहीं करने पर दुनिया उत्तर-प्रतिजैविक काल (एंटीबायोटिक के बाद के समय) की ओर बढ़ेगी. इसमें एक बार फिर सामान्य संक्रमण और छोटे-मोटे जख्म जानलेवा हो सकते हैं जिनका इलाज दशकों से संभव था.’’

 

उन्होंने कहा, ‘‘अगर हम संक्रमण को रोकने के लिए प्रयासों को ठीक नहीं करेंगे और एंटीबायोटिक्स के उत्पादन, परामर्श और इस्तेमाल के तरीके में बदलाव नहीं करेंगे तो दुनिया को और भी ज्यादा नुकसान होगा. ये वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी चीजें और इनके प्रभाव और भी विनाशकारी होंगे.’’

 

इसमें अनेक अलग-अलग संक्रामक एजेंटों में यह प्रतिरोध पनप रहा है, लेकिन रिपोर्ट में नौ विभिन्न बैक्टीरिया में एंटीबायोटिक के असर न होने पर ध्यान दिया गया है. ये बैक्टीरिया रक्तप्रवाह का संक्रमण, डायरिया, निमोनिया, मूत्रनली का संक्रमण जैसी सामान्य और गंभीर बीमारीयों के लिए जिम्मेदार होते हैं.

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Web Title: विश्वव्यापी खतरा है एंटीबायोटिक का कम होता असर
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