वेश्यावृत्ति को मानवाधिकार से जोड़ने पर एमनेस्टी का विरोध

By: | Last Updated: Tuesday, 28 January 2014 1:51 PM

नई दिल्ली: दुनियाभर में मानवाधिकारों के लिए लड़ने वाली संस्था एमनेस्टी इंटरनेशनल ने ऐसे कानूनों को खत्म करने की वकालत की है जो लोगों को सेक्स खरीदने-बेचने से रोकता है. एमनेस्टी का कहना है कि ‘पैसों के बदले सेक्स’ लोगों का कुदरती अधिकार है और लोगों को इससे वंचित नहीं किया जाना चाहिए. एमनेस्टी के इस रुख से खुद इस संस्था के भीतर ही विवाद उठ खड़ा हुआ है.

 

डेली मेल के मुताबिक ब्रिटिश लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता जूली बिंडेल ने लिखा है कि एमनेस्टी ने अपने पॉलिसी डॉक्यूमेंट में दावा किया है कि वेश्याएं पिंप्स और वो सभी लोग जो सेक्स खरीदते हैं दरअसल अपने स्वाभाविक अधिकार का इस्तेमाल करते हैं और उन्हें सभी तरह के सरकारी दखलंदाजी से मुक्त कर ऐसा करने की इजाजत दे देनी चाहिए. अपने इस डॉक्यूमेंट में एमनेस्टी ने वेश्याओं और कालगर्ल्स को कोयले की खदान में काम करने वाले मजदूरों और घरेलू नौकरों के बराबर माना है.

 

  इस पॉलिसी डॉक्यूमेंट को लेकर एमनेस्टी के भीतर ही विवाद शुरू हो गया है. एमनेस्टी को क्रूरता और यातना के खिलाफ संघर्ष और राजनीतिक कैदियों को रिहा कराने की कोशिश के लिए जाना जाता है. आलोचकों का कहना है कि एमनेस्टी अपने चुने हुए रास्ते से भटक गई है. जबकि एमनेस्टी के एक पूर्व सदस्य ने इस मानवाधिकार संस्था पर महिला अधिकारों से धोखाधड़ी करने का आरोप लगाया है.

 

एमनेस्टी के कई कार्यकर्ता भी संस्था के इस रुख से नाराज हैं. उनका कहना है कि विकासशील देशों में हम महिलाओं को वेश्यावृत्ति के लिए प्रोत्साहित कर उनकी समस्याओं का कोई समाधान नहीं दे सकेंगे. इससे भला किसका भला होगा? कभी कोई महिला स्वेच्छा से वेश्यावृत्ति नहीं करती बल्कि वेश्यावृत्ति शोषण और अन्याय का ही एक रूप है.

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Web Title: वेश्यावृत्ति को मानवाधिकार से जोड़ने पर एमनेस्टी का विरोध
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