व्हाइट हाउस में दलाई लामा और ओबामा की मुलाकात पर चीन बौखलाया

By: | Last Updated: Saturday, 22 February 2014 10:41 AM

बीजिंग: व्हाइट हाउस में दलाई लामा और अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की शुक्रवार को हुई मुलाकात पर चीन बौखला उठा है. बीजिंग ने अमेरिकी उपराजदूत को तलबकर दो-टूक कहा है कि अमेरिका के इस कदम से दोनों देशों के संबंधों पर बुरा असर पड़ेगा. इस सबके बीच स्थानीय मीडिया ने आज कहा कि यह मुलाकात बीजिंग के लिए शर्मिंदगी का सबब है.

 

चीन ने अमेरिक के उपराजदूत को यहां तलब करके अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की व्हाइट हाउस में तिब्बती धर्मगुरू दलाई लामा के साथ हुई बैठक पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है. उप विदेश मंत्री झांग येसुई ने चीन में अमेरिकी दूतावास के उपराजदूत डेनियल क्रीटेनब्रिंक को कल रात तलब किया और चीन के कड़े विरोध को दरकिनार करके ओबामा के दलाई लामा के साथ बैठक करने पर अपनी नाराजगी दर्ज कराई.

 

झांग ने कहा कि इस प्रकार के गलत कदम से चीन के आंतरिक मामलों में गंभीर रूप से हस्तक्षेप किया गया है, इसने ‘‘तिब्बत की स्वतंत्रता’’ को समर्थन नहीं देने की अमेरिकी प्रतिबद्धता का गंभीर उल्लंघन किया है, अंतरराष्ट्रीय संबंधों को संचालित करने वाले मौलिक नियमों का गंभीर रूप से उल्लंघन किया है और चीन एवं अमेरिका के संबंधों को गंभीर रूप से कमजोर कर दिया है. उन्होंने कहा, ‘‘चीन कड़ी नाराजगी और कड़ा विरोध व्यक्त करता है.’’

 

सरकारी समाचार पत्र ‘ग्लोबल टाइम्स’ के अनुसार व्हाइट हाउस में कल हुई इस मुलाकात पर प्रतिवाद करने के लिए चीन को कोई प्रभावी रास्ता नहीं मिला है.  अखबार ने कहा, ‘‘चीन के मजबूत होने के साथ अमेरिकी राष्ट्रपति का दलाई लामा के मिलना अथवा ताइवान को हथियार बेचने का प्रभाव कम हुआ है. परंतु अब भी शुक्रवार को हुई मुलाकात ने चीन को शर्मिंदा किया है. बीजिंग को विरोध करना था, लेकिन इसका बहुत ज्यादा असर नहीं हुआ.’’ राष्ट्रपति के तौर पर ओबामा की यह तीसरी मुलाकात है. चीनी उप विदेश मंत्री झांग येसुई ने अमेरिकी राजदूत को तलब किया.

 

चीनी संवाद समिति शिन्हुआ ने बयान के हवाले से कहा कि यह बैठक अंतरराष्ट्रीय संबंधों के मूलभूत नियमों का गंभीर उल्लंघन है और इससे अमेरिकी-चीनी संबंधों को काफी नुकसान पहुंचा है. ओबामा ने दलाई लामा से मुलाकात करके तिब्बतियों के मानवाधिकारों के लिए पुख्ता समर्थन की पेशकश की.

 

इस मुलाकात के दौरान ओबामा ने दलाईलामा के ‘बीच के रास्ते’ का समर्थन किया जिसमें दलाई लामा न तो तिब्बत को चीन में पूरी तरह मिला देने की बात करते हैं और न ही उनकी स्वतंत्रता की.

 

ओबामा के तिब्बती धर्मगुरू दलाई लामा से तीसरी बार मुलाकात करने की घोषणा के बाद चीन के तीखी प्रतिक्रिया की थी. चीन लंबे समय से दलाई लामा की विदेशी गणमान्य व्यक्तियों से मुलाकात का विरोध करता रहा है. दलाई लामा 1959 में चीन से भारत चले गए थे.

 

इससे पहले बैठक को लेकर व्हाइट हाउस की घोषणा पर चीन ने कडी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी और बाद में चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने इस बैठक को रद्द किए जाने की मांग करते हुए कहा था इससे द्विपक्षीय संबंधों पर बहुत बुरा असर पड़ेगा.

 

हुआ ने मीडिया से कहा था , ‘‘ हम इस मुलाकात को लेकर बेहद चिंतित है और हमने अमेरिकी पक्ष के समक्ष अपना विरोध जताया है.’’ हुआ ने कहा था कि तिब्बती मुद्दा चीन का घरेलू मामला है और वहां किसी भी दूसरा देश दखल नहीं दे सकता.

 

उन्होंने कहा था कि यह मुलाकात चीन के आंतरिक मामलों में दखल तथा अंतरराष्ट्रीय संबंधों के सिद्धांतों का गंभीर उल्लंघन हैं जिससे चीन-अमेरिका रिश्ते को भारी नुकसान हो सकता है. इससे पहले ओबामा और दलाई लामा ने 2010 और 2011 में भी मुलाकात की थी तथा चीन ने उस समय भी इसी प्रकार विरोध दर्ज कराया था.

World News से जुड़े हर समाचार के लिए हमे फेसबुक, ट्विटर, गूगल प्लस पर फॉलो करें साथ ही हमारा Hindi News App डाउनलोड करें
Web Title: व्हाइट हाउस में दलाई लामा और ओबामा की मुलाकात पर चीन बौखलाया
Explore Hindi News from politics, Bollywood, sports, education, trending, crime, business, साथ ही साथ और भी दिलचस्प हिंदी समाचार
First Published:

Get the Latest Coupons and Promo codes for 2017